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    जानिए कब है 2022 की पहली मासिक शिवरात्रि, साथ में पढ़ें पूजन मुहूर्त और विधि

    By Tanu GuptaEdited By:
    Updated: Wed, 29 Dec 2021 02:27 PM (IST)

    मासिक शिवरात्रि 2022 मासिक शिवरात्रि की पूजा आधी रात में की जाती है। इसे निशिता काल कहा जाता है। इसकी शुरुआत भगवान शिव की मूर्ति या शिव लिंग के अभिषेक से की जाती है। इस बार 1 जनवरी को मासिक शिवरात्रि का व्रतर खा जाएगा।

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    एक जनवरी 2022 को है नये वर्ष की पहली मासिक शिवरात्रि।

    आगरा, जागरण संवाददाता। कहते हैं कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से भोलेनाथ बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में नए साल की शुरुआत भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ ही होगी। इस बार 1 जनवरी को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। साल के पहले दिन भगवान शिव के पूजन का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ शाेनू मेहरोत्रा के अनुसार मासिक शविरात्रि का व्रत कृष्ण पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि के दिन रखा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में भगवान शिव लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। बता दें कि शिव लिंग पूजा सबसे पहले भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने की थी। ये व्रत हर महीने की चतुर्दशी के दिन रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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    अगर कोई व्यक्ति मासिक शविरात्रि के व्रत शुरू करना चाहता है तो वे महाशिवरात्रि के दिन से इन व्रतों को शुरू किया जा सकता है। साथ ही, इसे एक साल तक जारी रखा जा सकता है। अविवाहित महिलाएं विवाह के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रतरखती हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं शादीशुदा जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए ये व्रत रखती हैं।

    मासिक शिवरात्रि तिथि

    हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 1 जनवरी 2022 को प्रात: 7 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर, 2 जनवरी 2022, रविवार को प्रात: 3 बजकर 41 मिनट तक है।

    पूजा मुहूर्त

    मासिक शिवरात्रि का पूजा का शुभ मुहूर्त 1 जनवरी, शनिवार को रात 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर, देर रात 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

    पूजा विधि

    मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि की पूजा आधी रात में की जाती है। इसे निशिता काल कहा जाता है। इसकी शुरुआत भगवान शिव की मूर्ति या शिव लिंग के अभिषेक से की जाती है। भोलेनाथ को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, सिंदूर, हल्दी पाउडर, गुलाब जल और बेल के पत्ते चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव की आरती या भजन गाए जाते हैं और शंख बजाया जाता है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। बता दें कि शिवरात्रि के व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है। व्रत के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना काफी शुभ माना जाता है।