हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आई Red Head विदेशी बतख, आगरा के Wetlands पर पक्षी प्रेमी खींच रहे दनादन तस्वीरें
आगरा के वेटलैंड्स में हजारों किलोमीटर दूर से आई रेड हेड विदेशी बतख ने पक्षी प्रेमियों को आकर्षित किया है। ...और पढ़ें

आगरा के पास जोधपुर झाल में लाल आंखों वाली काॅमन पोचर्ड बतख।
सुमित द्विवेदी, आगरा। मौसम ने अपना रुख बदल दिया है। सर्द हवाओं के बीच सूरज की चटक रोशनी भी अब इंसानों के साथ प्रवासी पक्षियों को भी भा रही है। यही कारण है कि शहर के विभिन्न Wetlands में प्रवासी पक्षियों का डेरा जम गया है।
जिसमें प्रमुख रूप से सूर सरोवर और जोधपुर झाल वेटलैंड की पानी की सतह पर लाल-भूरे सिरों वाली कुछ बतखें गोते लगा रही हैं। ये कोई साधारण बतख नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त घोषित प्रवासी पक्षी ‘काॅमन पोचर्ड’ है।
जिसका वैज्ञानिक नाम अयथ्या फेरिना है, आगरा समेत आसपास क्षेत्र में इन्हें ‘लाल सिर’ या ‘छोटी लालसरी’ भी कहा जाता है। एशियन वाॅटर बर्ड सेंसस के आंकड़ों के मुताबिक 2020 के बाद सूर सरोवर और जोधपुर झाल में पहली बार एक दर्जन से अधिक संख्या में नजर आए हैं।
डीसीएफ चंबल चांदनी सिंह ने बताया नर का सिर चटक लाल और मादा का भूरा दोनों ही आठ फीट तक गहराई में डुबकी लगाकर जलीय पौधे, कीड़े-मकोड़े खोज निकालते हैं। रात में भोजन करना इनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
शहर के वेटलैंड्स में इनकी मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है। वे विदेशी परिंदों की दनादन तस्वीरें ले रहे हैं। ये प्रवासी पक्षी सुदूर पूर्वी साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के रास्ते उत्तर भारत पहुंचते हैं।
उत्तर भारत में आगरा, भरतपुर के कुछ वेटलैंड्स इनके पसंदीदा ठिकाने हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) की रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ और बान कन्वेंशन में सूचीबद्ध ये प्रजाति उन 29 संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है जो इसी फ्लाई-वे से गुजरते हैं।
80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भरते हैं उड़ान
इन बतख को झुंड में रहना, टफ्टेड डक के साथ घुलना-मिलना और माइग्रेशन के दौरान 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सीधी फड़फड़ाती उड़ान भरती हैं। सर्दी के मौसम में ये बतख सूर सरोवर पक्षी विहार समेत अन्य वेटलैंड्स में देखने को मिल जाएंगी।
