नशा मुक्ति केंद्रों का सचः आगरा में गली− गली में नशा छुड़ाने का दावा, नशे से मुक्ति के लिए कराते हैं ध्यान
नशा मुक्ति केंद्रों का सचः गली-गली खुले नशा मुक्ति केंद्र ध्यान से छुड़ाते हैं नशा। छह से लेकर नौ हजार रुपये प्रतिमाह लेते हैं शुल्क। नशा छुड़ाने की 90 फीसद गारंटी भी लेते संचालक। एत्माद्दौला क्षेत्र में नशा मुक्ति केंद्र में मजदूर की मौत होने के बाद मामला सुर्खियों में।

आगरा, जागरण संवाददाता। नशा समाज की बुराई है। नशे की लत जितनी बढ़ रही है। उसे छुड़ाने का दावा करने वाले भी उतने ही बढ़ते जा रहे हैं। शहर की गली और मोहल्लों में किराए की बिल्डिंग में नशा मुक्ति केंद्र खुल गए हैं। यहां योग, ध्यान और काउंसलिंग से नशा छुड़ाने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए हर माह मोटी रकम भी वसूली जा रही है।
एत्माद्दौला क्षेत्र में नशा मुक्ति केंद्र में मजदूर की मौत होने के बाद मामला सुर्खियों में है। दैनिक जागरण टीम ने शनिवार को शहर के कुछ नशा मुक्ति केंद्रों की पड़ताल की तो अधिकतर में योग, ध्यान और कीर्तन से नशा छुड़ाने के दावे ही सुनने को मिले। जीवन फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र कमला नगर में एक कोठी में संचालित यह नशा मुक्ति केंद्र एक वर्ष पहले ही खुला है। प्रबंधक अभय कुमार यहां मिले। उन्होंने बताया कि उनके केंद्र में फिलहाल 22 मरीज हैं। 90 फीसद मरीज नशे की आदत छोड़कर जाते हैं।काउंसलिंग, योग और ध्यान के अलावा मरीजों की रुचि के कार्यक्रम कराए जाते हैं। उन्हें परिवार की अहमियत का अहसास कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक डा. अमरप्रीत सिंह से कंसल्ट करके दवा दी जाती हैं। एक माह से लेकर तीन माह तक के कोर्स हैं।छह हजार रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है। गरीब मरीजों से शुल्क कम भी ले लेते हैं। नया जीवन नशा मुक्ति केंद्र सिकंदरा क्षेत्र में हाईवे पर रतन कांप्लेक्स में स्थित यह नशा मुक्ति केंद्र 2011-12 से संचालित है। यहां तीन माह से लेकर आठ माह तक के कोर्स हैं। काउंसलिंग, योग और ध्यान के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक से परामर्श लिया जाता है। यहां भी 90 फीसद नशे की लत छुड़ाने की गारंटी ली जा रही है। आत्मविज्ञान नशा मुक्ति केंद्र सिकंदरा क्षेत्र के बजरंग नगर स्थित इस नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक ने बताया कि 12 वर्ष से वे संचालन कर रहे हैं। योग, व्यायाम, काउंसलिंग और ध्यान के माध्यम से मरीजों की नशे की लत को छुड़ाया जाता है। लोगों की मानसिकता पर निर्भर करता है कि वे कितनी जल्दी इस गलत आदत को छोड़ते हैं। केंद्र में उन्हें यह अहसास कराया जाता है। इसकी कोई दवा नहीं है। चिकित्सक के परामर्श से जरूरत पड़ने पर हल्की नींद की गोली दी जाती है। तीन वक्त का खाना और नाश्ता दिया जाता है। मरीजों के रहन-सहन पर खर्च होता है। इसलिए शुल्क लिया जाता है।
इनकी छूट गई नशे की लत
जीवन फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र में 81 दिन रहकर नशे से मुक्ति पाने वाले फिरोजाबाद में रहने वाले एक शिक्षक धन्यवाद बोलने पहुंचे थे। वे एक इंटर कालेज में सरकारी शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन में शराब पीने की लत लग गई थी। नशा मुक्ति केंद्र में काउंसलिंग, योग, ध्यान व व्यस्त दिनचर्या के कारण शराब की लत छूट गई है। जीवनी मंडी की कृष्णा कालोनी निवासी 18 वर्षीय एक युवक में शराब के साथ-साथ सूखे नशे की लत भी लग गई थी। युवक की बहन उसे कालिंदी विहार स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा गई। वहां तीन माह रहने पर उसकी नशे की लत छूट गई। इसके बाद महिला ने अपने पड़ोस में रहने वाले एक युवक को भी केंद्र में भर्ती करा दिया है। नशा मुक्ति के लिए वैज्ञानिक तरीका है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, एसएन मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में नशा मुक्ति को इलाज किया जाता है।मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिकों की देखरेख में मरीजों को आवश्यकतानुसार दवा दी जाती है और काउंसलिंग की जाती है।
डा. दिनेश राठौर, प्रमुख अधीक्षक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान
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