आगरा, योगेश कुमार। शिक्षा, शिक्षण और शिक्षालय को लेकर सोशल मीडिया पर एक भद्दे कमेंट ने झकझोर दिया। एक दिव्यांग शिक्षक ने गांव कबार के इस ‘कबाड़ स्कूल’ को संवारने का जिम्मा लिया। मन से बच्चे पढ़ाते रहे और तनख्वाह से संवारते रहे स्कूल। लगन रंग लाई। अब ये स्मार्ट स्कूल बन चुका है। प्रोजेक्टर से शिक्षा दी जाती है, किताबी शिक्षा के साथ ही नवोदय विद्यालय में दाखिला के लिए तैयारी कराई जाती है।

ये स्कूल है विकास खंड सकीट के गांव कबार का प्राथमिक विद्यालय। काफी पुराना ये स्कूल भी औरों जैसा ही था। नाममात्र का स्कूल बन गया था। ग्रामीण अपने बच्चों को दूसरे स्कूल के लिए प्राथमिकता देने लगे थे। वर्ष 2016 का वाकया है। फेसबुक पर कबार गांव के इस विद्यालय को ‘कबाड़ स्कूल’ संबोधित किया गया था। जिले के परिषदीय स्कूल के शिक्षक अजनेश पैर से दिव्यांग हैं। सोशल मीडिया पर स्कूल पर भद्दा कमेंट देख दिव्यांग अजनेश का माथा ठनका। स्कूल के हालात सुधारने का भरोसा दिलाकर यहां तबादला करा लिया।

ऐसे बनाया स्मार्ट स्कूल

कबार गांव के स्कूल में हेडमास्टर अजनेश बताते हैं कि वर्ष 2016 में स्कूल में उन सहित दो ही शिक्षक थे। 40 बच्चे थे। सबसे पहले स्कूल के हालात सुधारे। तनख्वाह से साफ-सफाई, रंगाई-पुताई कराई। प्रोजेक्टर और एलइडी लगवाई। लैपटॉप खरीदा। स्मार्ट क्लास में पढ़ाई कराने लगे। बच्चों की लगन तो बढ़ी ही, धीरे-धीरे ग्रामीणों की भी सोच बदली। आज की स्थिति में स्कूल में 180 बच्चे हैं। विभागीय अधिकारियों ने उनकी डिमांड पर दो शिक्षकों की भी अतिरिक्त तैनाती कर दी है।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी

अजनेश ने बताया कि बच्चों को नवोदय, सैनिक स्कूल, विद्या ज्ञान की तैयारी कराकर परीक्षाएं दिलाईं। 2017 में दर्जनभर बच्चों ने परीक्षा दीं, हालांकि कोई बच्चा सफल न हुआ। वर्ष 2018 में तीन बच्चे प्रदीप, नेहा व सुषमा ने नवोदय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की।

मंडल से चुने गए एकमात्र शिक्षक

पिछड़े क्षेत्र में स्मार्ट क्लासेज की परीक्षा में अजनेश को पिछले साल शासन ने भी सराहा। मंडल भर से भेजे गए आवेदनों में से एकमात्र अजनेश का ही चयन हुआ था। शिक्षण के क्षेत्र में उन्हें कई अन्य पुरस्कार भीं मिल चुके हैं।

- शिक्षक अजनेश के प्रयासों से प्राथमिक विद्यालय कबार प्रथम जिले का मॉडल स्कूल बन चुका है। यहां स्मार्ट क्लासेज की शुरूआत के लिए शिक्षक ने अपने स्तर से व्यवस्था की है। विभाग को उन पर नाज है और अन्य शिक्षकों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

संजय सिंह, बीएसए एटा

 

Posted By: Tanu Gupta

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