आगरा, जागरण टीम। स्वतंत्रता दिवस की धूम केवल अपने देश में ही नहीं है। बल्कि विदेशी धरती पर भी तिरंगा शान से लहरा रहा है। थाइलैंड में देश के जाने माने कवि डा. कुमार विश्वास के नेतृत्व में काव्य की दुनिया के प्रतिष्ठित चेहराें ने जब राष्ट्र गान का पाठ किया तो विदेशी भी सम्मान में अपनी सीटाें से उठ खड़े हुए। आजादी के अमृत महोत्सव का एक अंश ये भी था कि हिंदी और हिंदुस्तान की गूंज विदेश में सुनाई दी।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर डिजिटल ब्रांडिंग की प्रमुख कंपनी डिजीटल खिड़की के तत्वावधान में इंडो-थाई न्यूज़ के बैनर तले बैंकॉक में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. कुमार विश्वास सहित भारत के अनेक लोकप्रिय कवि उपस्थित थे। कार्यक्रम में हास्य व्यंग्य के महारथी रमेश मुस्कान, वीर रस की प्रमुख कवयित्री कविता तिवारी, प्रसिद्ध युवा गीतकार स्वयं श्रीवास्तव, हेमंत पाण्डेय, सुरेन्द्र यादवेन्द्र तथा सोनल जैन अपने काव्यपाठ के लिए उपस्थित थे।

बैंकॉक में आगरा के हास्य कवि रमेश मुस्कान को सम्मानित करते संस्था सदस्य। 

कवि कवयित्रियों ने देशभक्ति से लेकर प्रेम तक पर अनेक कविताओं का पाठ किया और श्रोतागण देर शाम तक हिंदी कविता के जादू में झूमते नज़र आए। कार्यक्रम के अंत में जैसे डॉ. कुमार विश्वास ने अपना काव्य-पाठ आरंभ किया जनता का उल्लास सातवें आसमान पर जा पहुंचा। डॉ. कुमार विश्वास ने इस अवसर पर अपनी विश्व-प्रसिद्ध कविता “होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो” का पाठ किया तथा विदेश की उस भूमि पर भी जनता तिरंगा लेकर उस कविता की पंक्तियों पर झूमती नज़र आयी।

बैंकॉक में राष्ट्रगान के दौरान उपस्थित जनसमूह। 

यह कार्यक्रम भारत और थाइलैंड के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्ते को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस दौरान अपनी उत्साह पूर्ण भागीदारी के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वहॉं बड़ी संख्या में भारतीयों के साथ थाई निवासी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में काव्यपाठ करने वाले युवा गीतकार स्वयं श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि यह कार्यक्रम अपने आप में अनूठा था। यह मेरे लिए विदेश में काव्य पाठ का पहला अवसर था और मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि विदेशी मिट्टी पर भी हिंदी कविता को इतना अधिक प्यार और सम्मान प्राप्त होगा।

आयोजकों के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए हास्य कवि रमेश मुस्कान ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित होते रहने चाहिए ताकि अपने देश से दूर बसे लोगों के बीच भी हिंदी कविता की खिड़की से भारतीयता की ताज़ा और सुवासित हवा सतत संचरित होती रहे।

 

Edited By: Prateek Gupta