आगरा, जागरण संवाददाता। नाम में क्या रखा है? मुहावरे के तौर पर बोला जाने वाला यह जुमला नए सवालों के साथ फिर जवाबों की तलाश में है। मसला, मुगल सल्तनत की लंबे समय तक राजधानी रहे आगरा का नया नाम इससे पूर्व की पौराणिक कथाओं व किवदंतियों से जोड़ते हुए अग्रवन रखने का है। दो माह पहले शासन से संदर्भित जिस सुझाव को डीएम ठुकरा चुके हैं, उस पर अब विश्वविद्यालय शोध करा रहा है।

आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करने की मांग लंबे समय से चल रही है। डेढ़ साल पूर्व आगरा उत्तर के विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने आगरा का नाम अग्रवन करने की मांग उठाते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। जगन प्रसाद अब नहीं रहे। पत्र में उन्होंने लिखा था कि आगरा में बहुत से वन हैं और महाराजा अग्रसेन के अनुयायी भी हैं। ऐसे में इसका नाम अग्रवन होना चाहिए। शासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम एनजी रवि कुमार से मांगी। दो माह पूर्व डीएम ने जांच कर रिपोर्ट भेज दी। डीएम ने बताया कि आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करने के कोई साक्ष्य नहीं मिले। इसके चलते नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं है।

इससे पहले कि डीएम की रिपोर्ट के बाद मामला ठंडा होता सीएम पोर्टल पर कुछ लोगों ने नए सिरे से मांग उठा दी। इसमें भी आगरा का नाम अग्रवन करने की बात कही गई थी। इस बार डीएम ने यह पत्र रजिस्ट्रार के मार्फत आंबेडकर विवि के कुलपति को भिजवा दिया। कुलपति प्रोफेसर अरविंद दीक्षित ने अब यह काम इतिहास विभाग को सौंप दिया है। विभाग अब आगरा के नाम के इतिहास की परत दर परत उधेड़कर साक्ष्य की खोज में जुट गया है। इसके लिए आम जन से एक सप्ताह में साक्ष्य और प्रमाण मांगे गए हैं।

इतिहास और किताबों के पन्नों में आगरा 

-1506 में सिकंदर लोदी यमुना के रास्ते आया, ऐसा कहा जाता है कि 'आगे राह' और 'सिकंदरा आ गिरा' से आगरा नाम पड़ा, लेकिन कोई साक्ष्य नहीं है। 

- आगरा किला, बादलगढ़ का किला हुआ करता था, सिकंदर लोदी, बाबर और उसके बाद अकबर ने पुराने किलों को ध्वस्त कर नया किला बनवाया, यह अब आगरा किला है। 

- प्रभु दयाल मीतल की ब्रज का इतिहास किताब में ब्रज के 12 वनों का उल्लेख है, इसमें अग्रवन नहीं है। 

- इतिहासकार सतीश चंद्र चतुर्वेदी ने वर्ष 1958 में पुस्तक 'अंगिरा से आगरा' लिखी थी, इसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि यह शिव के उपासक ऋषि अंगिरा की तपोभूमि थी, इसलिए अंगिरा कहते थे। 

- 1971 के गजट में लिखा है आगरा ब्रज के 12 वन में से एक है, इसका नाम अग्रवन है। 

आगरा विवि का नाम 1996 में बदलकर किया आंबेडकर विवि

देश के पुराने विवि में से एक आगरा विवि की स्थापना एक जुलाई 1927 को हुई थी। 1996 में बसपा सरकार में आगरा विवि का नाम बदलकर डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि रखा गया।

एक सप्ताह में मांगे साक्ष्य और प्रमाण

आगरा नाम के इतिहास और पूर्व में क्षेत्र का नाम अग्रवन या अन्य होने के साक्ष्य व प्रमाण जुटाने का दायित्व डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग उठा रहा है। अत: विश्वविद्यालय ने समस्त जनसाधारण से आग्रह किया है कि उपरोक्त के संदर्भ में यदि किसी भी प्रकार का ऐतिहासिक, पौराणिक अथवा पुरातात्विक प्रमाण हो तो वे विवि के ईमेल पर भेज सकते हैं।

इनका क्‍या है कहना

आंबेडकर विवि के इतिहास विभाग द्वारा आगरा के नाम को लेकर शोध किया जा रहा है। यह अग्रवन, अंगिरा या आगरा था, इससे जुड़े साक्ष्य आमजन से भी एक सप्ताह में मांगे गए हैं।

डॉ. अरविंद दीक्षित, कुलपति डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि

ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज और खोदाई में कोई साक्ष्य मिलता है, तभी उसे प्रमाणिक माना जाता है। अग्रवन से जुड़े साक्ष्य का संकलन करने के लिए इतिहासकारों की मदद ली जा रही है।

प्रो. सुगम आनंद, इतिहास विभाग डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि

सिकंदर लोदी ग्वालियर के अजेय किले पर कब्जा करने आया था। वह ग्वालियर के करीब पहुंचने के लिए यमुना के रास्ते यहां पहुंचा। ग्वालियर जाने के लिए आगे राह, आगे है, से होते हुए धीरे-धीरे आगरा नाम पड़ गया।

डॉ. बीडी शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर इतिहास विभाग डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि

आगरा ऋषियों की भूमि रही है, पौराणिक कथाओं में अग्रवन नाम है, लेकिन इसे इतिहास नहीं माना जा सकता है। इतिहास में रेणुका धाम, फतेहपुर सीकरी, शौरीपुर नाम हैं।

डॉ. अपर्णा पोद्दार, पूर्व विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग आगरा कॉलेज

सिकंदर लोदी के आने से पहले का आगरा का इतिहास मिलता है। इसमें नाम अग्रवन और अग्रोहा का जिक्र प्रभु दयाल मीतल की किताब में है।

डॉ. मधु वशिष्ठ, प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग बीडी जैन डिग्री कॉलेज

आगरा का नाम बदलने के बारे में जानकारी नहीं है। संभव है किसी स्तर पर कोई पत्र दिया गया हो, उसपर जानकारी मांगी गई हो।

रेणुका कुमार, अपर मुख्य सचिव, राजस्व

 

Posted By: Tanu Gupta

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