Navratri 2022: आगरा के इस मंदिर पर शीश नवाता है हर श्रद्धालु, कामाच्छा देवी मंदिर की मान्यता ही है ऐसी
मान्यता है कि यमुना किनारा रोड पर हाथी घाट पर 80 साल पहले एक टीले पर देवी मां की प्रतिमा प्रकट हुई थी। साथ ही यहां स्थापित एक त्रिशूल को लेकर कहा जाता है कि उसके स्थान परिवर्तन के कई बार प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली।

आगरा, जागरण संवाददाता। आसाम में हैं कामाख्या देवी और आगरा में हैं जन-जन की आस्थाओं का केंद्र कामाच्छा देवी मंदिर। यमुना तट की शोभा बढ़ाते इस मंदिर की ध्वजा को दूर से ही देख लेते हैं। ऐसा कोई इंसान नहीं है, जिसका यमुना किनारा रोड से गुजरते वक्त मंदिर के सामने शीश न नवाता हो।
इतिहास
करीब 80 साल हाथीघाट पर टीले और घनी झाड़ियां हुआ करती थीं। इन्हीं एक टीले पर देवी मां की मूर्ति प्रकट हुई। किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं गया। देवी के आराधक स्व.बाबा रमनलाल भगत को सपने में देवी ने दर्शन दिए और अपने वहां होने का अहसास कराया। उसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू हो गया और निरंतर भव्य आकार लेता गया। अब तो मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। मंदिर में नौ देवियां विराजमान हैं। अन्य देवी, देवताओं की मूर्तियां भी यहां हैं।
विशेषता
80 साल से लगातार यहां एक ही पात्र में ज्योति जल रही है। इसे बाबा स्व. रमनलाल भगत ने ही मूर्ति के समक्ष प्रज्ज्वलित किया था। इसी प्रकार यहां एक त्रिशूल है। उसके स्थान परिवर्तन के कई बार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। त्रिशूल वैसा ही रहने दिया गया।
ऐसे पहुंचें मंदिर
मंदिर हाथी घाट के सामने प्रमुख स्थान पर है। आगरा किला या बिजलीघर चौराहा से आने पर बाईं ओर व बेलनगंज से आएंगे तो दाईं ओर स्थित है। आटो, रिक्शा, बस, सभी साधनों से यहां आ सकते हैं।
कोरोना काल के दो साल बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या उत्साह जनक है। अष्टमी व नवमी को फूल बंगला सजाया जाएगा व भंडारा होगा। देवी जागरण इस बार नहीं कराया जा रहा है।
पं.अमित शर्मा, पुजारी
मैं इस मंदिर में कई दशकों से जा रही हूं। मेरी हर मनोकामना देवी मां ने पूरी की है। वे इसी प्रकार सभी की झोली खुशियों से भरती रहें।
चारू शर्मा, श्रद्धालु
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