आगरा, जागरण संवाददाता। गुरु द्रोणाचार्य ने तो एकलव्य को अपना शिष्य नहीं बनाया था, लेकिन एकलव्य ने गुरु भक्ति नहीं छोड़ी। जंगल में गुरु द्रोण की प्रतिमा के समक्ष ही उसने धनुर्विद्या का अभ्यास कर स्वयं को निखारा था। एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिमनास्टिक का प्रशिक्षण पा रहे प्रयागराज के जिमनास्ट प्रणव मिश्रा और प्रणव कुशवाह ने तो गुरु के लिए घर और शहर ही छोड़ दिया। नहीं छोड़ा तो गुरु का साथ और सानिध्य। 10 वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्होंने अपने गुरु को गुरु दक्षिणा दी है। उनका चयन पांचवीं सेंट्रल साउथ एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय जूनियर टीम में हुआ है।

दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में खेल मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथारिटी आफ इंडिया (साई) द्वारा ट्रायल का आयोजन किया गया था। इसमें शानदार प्रदर्शन करते हुए एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम के प्रशिक्षु प्रणव मिश्रा और प्रणव कुशवाह ने बांग्लादेश के ढाका में 26 से 31 अक्टूबर तक होने वाली पांचवीं सेंट्रल साउथ एशियाई आर्टिस्टिक जिमनास्टिक चैंपियनशिप के लिए भारतीय जूनियर टीम में जगह बनाई। प्रणव मिश्रा दूसरे अौर प्रणव कुशवाह तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता के लिए चुने गए चार खिलाड़ियों में दो आगरा के हैं। दोनों के इस स्तर तक पहुंचने के संघर्ष की दास्तां भी उतार-चढ़ावों और गुरु में विश्वास से जुड़ी है। प्रणव मिश्रा और प्रणव कुशवाह ने वर्ष 2011 में प्रयागराज में कोच राममिलन के निर्देशन में जिमनास्टिक सीखना शुरू किया था। वहां वह स्वयं को निखार ही रहे थे कि वर्ष 2017 में राममिलन का तबादला आगरा हो गया। गुरु के प्रति पूर्ण समर्पित दोनों खिलाड़ी भी उनके पीछे-पीछे आगरा अा गए। एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम के जिमनास्टिक छात्रावास में प्रवेश ले लिया। वर्ष 2018 से प्रणव मिश्रा और वर्ष 2019 से प्रणव कुशवाह ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने गुरु का नाम रोशन करना शुरू कर दिया।

वर्ष 2020 में कोरोना वायरस के संक्रमण का ग्रहण लगा तो खेल भी अछूते नहीं रहेे। मार्च में छात्रावास खाली कराकर खिलाड़ियों को उनके घर भेज दिया गया और अभ्यास तक बंद हो गया। छह माह से अधिक के अंतराल के बाद स्टेडियम खुला जरूर, लेकिन छात्रावास पर ताला लटका रहा। इसके चलते उन्होंने शहजादी मंडी, सदर बाजार में किराये का मकान लेकर स्टेडियम में अभ्यास शुरू कर दिया। 10 वर्षों के अथक परिश्रम के बाद उनकी साधना सफल हो गई है। उप्रकीड़ा अधिकारी और जिमनास्टिक कोच राममिलन यादव ने बताया कि वर्ष 2017 में जब उनका तबादला आगरा के लिए हुआ तो प्रणव मिश्रा और प्रणव कुशवाह भी आगरा आ गए। यहां रहकर दोनों खिलाड़ियों ने कड़ा अभ्यास कर स्वयं को निखारा है। आज उन्हें उनके परिश्रम का फल भारतीय टीम में चयन होने पर मिला है।

जिमनास्टिक के खिलाड़ी प्रणव कुशवाहा और प्रणव मिश्रा। 

स्‍टेडियम में प्रयागराज के आठ खिलाड़ी

प्रणव मिश्रा और प्रणव कुशवाहा समेत प्रयागराज के आठ खिलाड़ी स्टेडियम में जिमनास्टिक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2017 में प्रणव मिश्रा, प्रणव कुशवाह, शिवांश गुप्ता और जतिन आगरा आ गए थे। वर्ष 2018 में दो, 2019 में एक और 2020 में एक और खिलाड़ी आगरा आकर प्रशिक्षण प्राप्त करने लगा।

प्रणव मिश्रा की उपलब्धियां

वर्ष 2018 में कोलकाता में हुई 63वीं नेशनल स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में तीन कांस्य पदक जीतेे। मुंबई में वर्ष 2018 में हुई 28वीं सब-जूनियर जिमनास्टिक नेशनल चैंपियनशिप में इंडिविजुअल आलराउंड चैंपियन में दूसरे स्थान पर रहे। चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीता। अगरतला में हुई 64वीं नेशनल स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में इंडिविजुअल आलराउंड चैंपियन में प्रथम स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में पांच स्वर्ण पदक जीते। वर्ष 2019 में पुणे में हुई 55वीं जूनियर जिमनास्टिक नेशनल चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते। आगरा में हुई 65वीं नेशनल स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में इंडिविजुअल आलराउंड चैंपियन में प्रथम स्थान पर रहे।

प्रणव कुशवाह की उपलब्धियां

वर्ष 2018 में त्रिपुरा के अगरतला में हुई 64वीं नेशनल स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में इंडिविजुअल आलराउंड चैंपियन में दूसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। वर्ष 2019 में गुजराज के बड़ौदरा में हुई 29वीं सब-जूनियर जिमनास्टिक नेशनल चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते। आगरा में वर्ष 2019 में हुई 65वीं नेशनल स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीते।

Edited By: Prateek Gupta