आगरा, तनु गुप्‍ता। चेहरे पर लंबा घूंघट, हाथों में लठ्ठ और हास परिहास का अपने अनूठे तरीके से जवाब। प्रेम से पगे लठ्ठ खाने के लिए हुरियारों का उल्लास होली के रंगों को और भी रंगीन कर देता है। बरसाने की कुंज गलियों में हुई लठामार होली का दूसरा चरण आज पूरा होने की तैयारी है। बरसाना में जाकर राधा रानी की सखियों के लठ्ठों से घायल हुए हुरियारों का आज नंदगांव की हुरियारने लठ्ठों से हिसाब लेंगी। नंद भवन सज गया है, दूर तक नील गगन अबीर से गुलाबी होने के लिए तैयार खड़ा है। नंदगांव की रंगीली गली में अब से बस कुछ ही देर में अनूठी पंरपरा की तस्वीर बनेगी।

जी हां, ब्रज की अनूठी होली का उल्लास जारी है। आज सायं साढ़े पांच बजे से नंदगांव में लठामार होली खेली जाएगी। बरसाना की लठमार होली के अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ल दशमी को बरसाना के हुरियारे नंदगांव की हुरियारिनों से होली खेलने उनके यहां पहुंचेंगे। लठामार होली से पूर्व बरसाना और नंदगांव के गोस्‍वामी समाज के मध्‍य गायन होगा। इसके बाद बरसाना के हुरियारे नंदगांव की हुरियारनों संग हास परिहास करेंगे और इसी मनो विनोद के मध्‍य शुरु हो जाएगी लठामार होली। कृष्ण के प्रेम के प्रतीक स्वरूप इस परंपरा को देखने के लिए देश विदेश से हजारों श्रद्धालु सुबह से ही नंदगांव पहुंच चुके हैं। सायं साढ़े पांच बजे से लठामार होली शुरु होगी और करीब एक घंटे तक नंदगांव की हुरियारने बरसाना के हुरियारों पर लठ्ठ बरसाएंगी। इसी के साथ लठामार होली का यहां समापान हो जाएगा।

हारे हुरियारों की चुनौती बरसाने के हुरियारों ने की स्वीकार

बरसाने की हुरियारिन ने लठा मार- मार के नंदगांव के हुरियारों को लठामार में हरा दिया था। हारे हुरियारे ने बरसाना की राधारानी और उनकी सखियों को धमकी दी कि कल शनिवार को अपने हुरियारेन ने बरसाना भेज दीयों। तब देखिनगे उनमें कितना जोर है। बरसाना की हुरियारिन ने नंदगांव के हुरियारों की चुनौती को स्वीकार कर लिया। आज शनिवार को बरसाना की हुरियारिन अपने- अपने हुरियारों को पूरी तैयारी के साथ नंदगांव भेजेंगी। जाने से पहले बरसाने के हुरियारे राधारानी से आशीर्वाद लेकर नंदगांव जाएंगे। इधर सखियों के हाथ मार खाकर नंदगांव वापस लौटे हुरियारों ने अपने घर जाकर लठामार होली में हुई हार का किस्सा सुनाया और बताया कि बरसाने के हुरियारे होली खेलने के लिए सवेरे आ रहे हैं। पूरी तैयारी कर लो, सबरी कसक निकारनी है। यह सुनकर नंदगांव की हुरियारिनों की भुजाएं फडफ़ड़ा उठीं और सूर्योदय का इन्तजार करने लगीं।

ये है मान्यता

लठामार होली खेलने की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा के समय से हुई थी। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाने होली खेलने पहुंच जाया करते थे। कृष्ण और उनके सखा यहां राधा और उनकी सखियों के साथ ठिठोली किया करते थे, जिस बात से नाराज होकर राधा और उनकी सभी सखियां ग्वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। लाठियों के इस वार से बचने के लिए कृष्ण और उनके दोस्त ढालों और लाठी का प्रयोग करते थे। प्रेम के साथ होली खेलने का ये तरीका धीरे-धीरे परंपरा बन गया।

वहीं ब्रज में एक अन्य मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण फाल्गुन मास की नवमी को होली खेलने बरसाना गए और बिना फगुवा (नेग) दिए ही वापस लौट आए। राधाजी ने बरसाना की सभी सखियों को एकत्रित किया और बताया कि कन्हैया बिना फगुवा दिए ही लौट गए हैं। हमें नंदगांव चलकर उनसे फगुवा लेना है। अगले दिन ही (दशमी) को बरसाना की ब्रजगोपियां होली का फगुवा लेने नंदगांव आती हैं। कन्हैया की इसी लीला को जीवंत रखने के लिए यहां भी लठामार होली का आयोजन किया जाता है।

बरसाना में हुआ लठामार होली का पहला भाग

नंदगांव यानी भगवान कृष्ण की लीला स्थली। नंदगांव राधारानी के गांव बरसाना से केवल आठ किलोमीटर दूर है। शुक्रवार को बरसाना में लठामार होली खेली गई थी। नंदगांव के हुरियारे बरसाना पहुंचे थे, जहां उन्होंने राधा रानी के गांव की हुरियारिनों संग परंपराओं को निभाते हुए होली खेली। शनिवार सायं को बरसाना के हुरियारे नंदगांव पहुंचेंगे और वहां की हुरियारिनों संग लठामार होली खेलेंगे।

क्या हुई तैयारियां

बरसाना के हुरियारों के स्वागत के लिए नंदभवन को भव्य रूप से सजाया गया है। नंदगांववासी बेसब्री से बरसाना के हुरियारों को इंतजार कर रहे हैं। हर तरफ होली का उल्लास है।

सूर्य भी हो जाते हैं स्थिर

अद्वितीय राधाकृष्ण की अलौकिक होली लीला देखने के लिए भगवान सूर्य भी कुछ क्षण के लिए स्थिर हो जाते हैं। मान्यता है कि जब तक गोपियां हुरियारे और कान्हा के साथ होली नहीं खेलतीं तब तक सूर्य नहीं छिपता है।

उड़ता है परंपराओं का गुलाल

यदि प्रेम के अनूठे रंग देखने हैं तो बरसाना और नंदगांव की होली को देखिए। यहां की होली के रंगों में प्रेम बरसता है। परंपराओं का गुलाल उड़ता है। अगर संबंधों को निभाना सीखना है तो ब्रज वालों से सीखिए। नंदगांव के लोगों में सखा भाव और बरसाने में सखी भाव की मिठास आज भी जीवंत है।

जन्मभूमि में रंगभरनी एकादशी पर होगा लठ्ठों का प्रहार

मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि पर रंगभरनी एकादशी पर सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा लठामार होली का मंचन होगा। इसे देखने के लिए हजारों भक्त सुबह से ही जन्मभूमि प्रांगण में एकत्र हो जाएंगे।

नगाड़े की तान पर नृत्य करेंगी हुरियारिनें

रंगभरनी एकादशी पर रविवार को नौहझील के गांव मरहला मुक्खा में होली महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। परंपरा के अनुरूप पहले मरहला मुक्खा, बरौठ, पालखेड़ा, बाघर्रा, नौशेरपुर, पारसौली, बाजना, मानागढ़ी, जरैलिया, तिलकागढ़ी, रायपुर, मुसमुना, भैरई, दौलतपुर, छिनपारई, देदना आदि गांवों के लोग सुबह तड़के यमुना महारानी का पूजन करेंगे। इसके बाद गांव मरहला मुक्खा पहुंचकर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे। दिन की धूप चढ़ते-चढ़ते तमाम रंग-बिरंगे हुरियारे गांव में जगह-जगह होली के गीतों पर झूमते नजर आएंगे। जहां नगाड़ों की तान पर हुरियारिनें हुरियारों संग जमकर नृत्य करेंगी। हुरियारिनें हुरियारों पर प्रेम पगी लाठियां बरसाएंगी। रात्रि में जिकड़ी भजनों का मुकाबला होगा।  

Posted By: Prateek Gupta

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