आगरा, किशन चौहान/रसिक शर्मा रिश्ता न नाता, फिर भी मन को भाता। नंदगांव-बरसाना के बीच आज तक कोई रिश्ता नहीं हुआ। फिर भी दोनों गांव के लोग एक-दूसरे को जीजा-साले मानते हैं। गुरुवार को नंदगांव में जीजा-साले के बीच जमकर हंसी-ठिठोली हुई। लठामार होली में लट्ठ बरसे तो आनंद की बारिश हुई। होली की मस्ती में श्रद्धालु कृष्ण के जयकारे लगा रहे थे, नंदगांव होली खेलने पहुंचे बरसाना के हुरियारे नंद के जमाई की जय का उद्घोष करते रहे। घूंघट की ओट से हुरियारिनें बरसाना के हुरियारों पर अपनी प्रेमपगी लाठियां बरसातीं रहीं।

फगुवा के बहाने होरी खेलन आईं नंद के द्वार कुछ यहीं भाव लेकर गुरुवार को बरसाना के लोग नंदगांव होली खेलने पहुंचे। यशोदा कुंड पर पाग बांधने के बाद हुरियारों की टोली मस्ती करते हुए नदंभवन पहुंची। जगह-जगह हुरियारों पर रंग की बौछार हो रही थी। बरसाना-नंदगांव के बीच आज भी राधाकृष्ण का ही भाव है। तभी तो नंदगांव के लोग खुद को बृषभान का जमाई, तो बरसाना के लोग खुद को नंद का जमाई मानते हैं। इस प्राचीन परंपरा को आज भी दोनों गांव के लोग साढ़े पांच हजार वर्ष से निभा रहे हैं।

लगता है भाभी आज तो दूध पीकर न आई

बरसाना के हुरियारों पर जब नंदगांव की हुरियारिन अपनी प्रेमपगी लाठियां बरसा रही थीं तो कूदते-उछलते हुरियारे अपनी ढाल पर लाठियों की बौछार झेल कह रहे थे लगता है भाभी आज दूध पीकर न आईं, जरा जोर लगाकर दे लट्ठ तभी तो मजा आवेगों।

विदेशी भी झूमे होली की मस्ती में

होली के आनंद में एक ओर जहां हर कोई झूमता नजर आ रहा था, वहीं विदेशी महिलाएं भी रंग में सराबोर होकर मस्ती करती दिखीं। इस दौरान हुरियारे भी विदेशी महिलाओं पर अबीर-गुलाल की बारिश कर रहे थे।

वनवे रहा मंदिर मार्ग

विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के दौरान नंदबाबा मंदिर मार्ग को वनवे किया गया। वहीं श्रद्धालुओं की गाडिय़ों को पांच किलोमीटर दूर रोका गया। लाखों की भीड़ से ये व्यवस्था भी ध्वस्त होती दिखी। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही।  

रंगों के समंदर में डूब गया नंदीश्वर पर्वत

अदभुत नजारा नंदगांव का, भक्ति में मस्ती का गजब समावेश, सतरंगी गुलाल की आंधी के बीच रंगों की झमाझम बारिश, भीगते तन मन के साथ ढोल नगाड़ों की धुन पर थिरकते हुरियारे और हुरियारिन, लठ बरसातीं नंदगांव की हुरियारिन तो ढाल से बचाव करते बरसाने के हुरियारे, तड़ातड़ बरसती प्रेम पगी लाठियां। नंदगांव में लठामार होली से उठी मस्ती की हिलोरों ने ब्रजमंडल ही नहीं मानो समूची श्रद्धा की दुनिया को अपने आगोश में समेट लिया।  बरसाना की लठमार होली के अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ल दशमी को बरसाना के हुरियारे नंदगांव की हुरियारिनों से होली खेलने उनके यहां पहुंचे। लठामार होली से पूर्व बरसाना और नंदगांव के गोस्वामी समाज के बीच गायन हुआ। बरसाना के हुरियारों ने नंदगांव की हुरियारिनों संग हास परिहास किया। फिर शुरू हुई लठामार होली। कृष्ण के प्रेम के प्रतीक स्वरूप इस परंपरा को देखने के लिए देश विदेश से हजारों श्रद्धालु सुबह से ही नंदगांव पहुंच गए। ब्रज मंडल की होली को निहारते सूर्यदेव भी आज ढलने का नाम नहीं ले रहे थे।

 

हारे हुरियारों की चुनौती बरसाने के हुरियारों ने की स्वीकार

बुधवार को बरसाने की हुरियारिन ने लठ मार-मार के नंदगांव के हुरियारों को लठामार में हरा दिया था। हारे हुरियारे ने बरसाना की राधारानी और उनकी सखियों को धमकी दी कि गुरुवार को अपने हुरियारिन ने बरसाना भेज दियो। तब देखिन्गे उनमें कितना जोर है। बरसाना की हुरियारिन ने नंदगांव के हुरियारों की चुनौती को स्वीकार कर लिया। गुरुवार को बरसाना की हुरियारिन ने अपने-अपने हुरियारों को पूरी तैयारी के साथ नंदगांव भेजा। जाने से पहले बरसाने के हुरियारे राधारानी से आशीर्वाद लिया।

Posted By: Prateek Gupta

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