जवाहर बाग हिंसा के छह वर्ष: बलिदानी एसपी मुकुल द्विवेदी की पत्नी का छलका दर्द, बोलीं- सरकार और सीबीआइ जांच से नहीं संतुष्ट
Jawahar bagh case बलिदानियों की प्रतिमा लगाने का उद्यान विभाग का प्रस्ताव शासन ने किया खारिज विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर स्मारक का निर्माण कराने का दिया आश्वासन हर बार बलिदानी का दर्जा देने की मांग की गई।

आगरा, जागरण टीम। मथुरा के जवाहर बाग में अपने पति के बलिदान स्थल पर उनको नमन करने गुरुवार को आईं तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने सरकारी सिस्टम से बेहद व्यथित हैं।
उन्होंने कहा कि छह साल हो गए। न सीबीआइ की जांच आगे बढ़ी और न उनके पति को बलिदानी का दर्जा दिया। भाजपा सरकार ने अपना एक कार्यकाल पूरा कर लिया और दूसरी बार वापस सत्ता में आ गई। बलिदानियों के नाम पर एक स्मारक न बनवा सकी। बोलीं, सीबीआइ की जांच और सरकार के रवैये से वह संतुष्ट नहीं हैं। कई बार मुख्यमंत्री से भी मिलने का समय मांगा, मिला नहीं।
स्मारक बनवाने का प्रयास
श्रद्धांजलि देने पहुंचे मांट विधायक राजेश चौधरी ने कहा, वह स्मारक बनवाने की अड़चन का पता कर उसे दूर कर स्मारक बनवाने का प्रयास करेंगे। जवाहर बाग पर स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के स्वयंभू मुखिया रामवृक्ष यादव ने मार्च 2014 में कब्जा कर लिया था। दो जून 2016 को जवाहर बाग खाली करने के दौरान हुई हिंसा में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की अतिक्रमणकारियों ने हत्या कर दी थी।
छह साल बाद नहीं बना स्मारक
गुरुवार सुबह एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी अपने बहनोई सतीश पांडेय के साथ जवाहर बाग पहुंचीं। बलिदान स्थल पर श्रद्धांजलि देते हुए अर्चना द्विवेदी ने कहा, आज छह साल हो गए। आज तक बलिदानियों के नाम पर स्मारक तक नहीं बन सका। उनके नाम पर पार्क का नामकरण नहीं हुआ। उनको जिला उद्यान अधिकारी जगदीश प्रसाद के माध्यम से जानकारी मिली कि प्रतिमा लगवाने के लिए शासन को जो प्रस्ताव भेजा था, वह खारिज हो गया। हर बार बलिदानी का दर्जा देने की मांग की गई।
पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी इसकी घोषणा की थी, लेकिन वह भी कार्य नहीं हुआ। भाजपा सरकार अपना एक कार्यकाल पूरा कर चुकी और दूसरी बार फिर आ गई। सरकार ने कुछ नहीं किया। इसे केवल एक राजनैतिक मुद्दा बना लिया गया। वह सीबीआइ जांच और सरकार के रवैये से संतुष्ट नहीं हैं।
उन्होंने कहा, दस गुणा दस वर्गगज की भूमि मांगी थी, जिस पर एक चबूतरा मैं अपने खर्च से बनवा दूंगी। ताकि वहां श्रद्धा के फूल चढ़ा सकूं, लेकिन वह भी नहीं हुआ। कई बार मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके कार्यालय से समय मांगा गया, नहीं मिला।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे मांट के विधायक राजेश चौधरी ने कहा, बलिदानियों का स्मारक बनना चाहिए। विधायक श्रीकांत शर्मा ने भी प्रयास किए थे। किस वजह से नहीं बन सका है। यह तो वही जानें। बोले, मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। उनको प्रत्यावेदन भी देंगे और स्मारक बनवाने के प्रयास करेंगे।
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