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आगरा (जेएनएन)। प्रदेश तथा केंद्र सरकार की तमाम कवायद के बाद भी ताजनगरी आगरा के सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में रैगिंग चरम पर है। विचित्र तरीके से हो रही रैगिंग का मामला जब तक पकड़ में आया तब तक कॉलेज के सीनियर्स ने जूनियर्स को भेजे गए सभी मैसेज को डिलिट कर दिया। अब मामले की जांच बिना सुबूत तो संभव ही नहीं है।

मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की बड़ी शिकायत मिलने पर जांच कमेटी का गठन कर उसको जांच सौंप दी गई है। एसएन मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन दिनों से गरमा रहा रैगिंग का मुद्दा अब सवालों के घेरे में घिर चुका है। सीनियर छात्रों के जूनियर छात्रों के मोबाइल पर भेजे गए मैसेज को डिलिट करा दिया है। यानि जिन सबूतों के आधार पर पूरे मामले की जांच होनी थी, उन्हीं सबूतों को मिटा दिया गया। अब रैंगिग की जांच किस आधार पर एंटी रैगिंग सेल करेगा, यह बड़ा प्रश्न है।

दरअसल 2018 बैच के छात्रों को सीनियर छात्रों ने व्हाट्सएप पर सात पेज की गाइड लाइन भेजी थी। इसमें छोटे बाल, ड्रेस के कलर कोड, जूते, वाहन से न आना, सिर झुकाकर चलना जैसी हिदायतें दी गई थीं। इसके साथ बाकी के छह पेजों पर शपथ पत्र, मेडिकल कोर्स की अश्लील भाषा में परिभाषाएं जैसी आपत्तिजनक तमाम बातें गढ़ी गई थीं।

जूनियर छात्र-छात्राओं का आरोप है कि उन्हें एकांत में बुलाकर इस गाइड लाइन को पढऩे के लिए कहा जाता था। विरोध करने पर छात्रों को पीटा भी जाता था। मामले की शिकायत कुछ जूनियर छात्रों ने अपने माता पिता से कर दी। इस पर छात्रों के अभिभावक प्रधानाचार्य से मिले और सीनियर छात्रों की इस हरकत की जानकारी दी।

इस पर प्रधानाचार्य ने मामले की जांच को एंटी रैगिंग सेल को सौंप दिया। एंटी रैगिंग सेल ने 2017-18 के सीनियर छात्रों को बुलाकर दोबारा ऐसी हरकत न करने की हिदायत भी दी। सीनियर छात्रों के अभिभावकों को भी बुलाया गया और उन्होंने अपने बच्चों की हरकत पर माफी भी मांगी।

कुछ छात्रों के अनुसार इसी दोनों बैच के छात्रों को बुलाया गया और दोबारा ऐसी हरकत न होने की हिदायत के साथ मोबाइल से मैसेज डिलिट करा दिए गए।ऐसे में सवाल उठता है कि एंटी रैगिंग सेल अब किस आधार पर मामले की जांच करेगी, क्योंकि मुख्य आधार व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज ही थे।

Posted By: Dharmendra Pandey

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