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    Indian Rail: रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर आखिर क्यों लिखी जाती है समुद्र तल से ऊंचाई? पढ़िए इसके मायने

    By Abhishek SaxenaEdited By:
    Updated: Mon, 06 Jun 2022 11:48 AM (IST)

    Indian railway भारतीय रेल हम सभी के जीवन से जुड़ी है। कभी न कभी हम रेल यात्रा करते हैं। खिड़की के किनारे बैठकर जब स्टेशन देखते हैं तो समुद्र तक से ऊंचाई का एक शब्द यहां अंकित होता है। यात्रियों से इसका क्या संबंध है।

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    Indian Railway: रेलवे स्टेशन पर समुद्र तल की ऊंचाई का शब्द अंकित होता है।

    आगरा, जागरण टीम। देश में रेलवे लाखों लोगों की यात्रा का हिस्सा होती है। छुट्टियों के दिन हों या त्योहार पर घर आना-जाना, अक्सर हम ट्रेन से सफर करते हैं। ट्रेन में सफर करने के दौरान जब भी स्टेशन या जंक्शन पर गाड़ी रुकती है तो हम उस स्टेशन का नाम पढ़ते हैं।

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    जो हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू या वहां की स्थानीय भाषा में होता है। स्टेशन के नाम के साथ ही हमें वहां कुछ और पढ़ने को मिलता है। कभी-कभी मन में ये सवाल जरूर उठता होगा कि आखिर ये क्यों लिखा गया है। ये शब्द है समुद्र तल से ऊंचाई।

    अब आखिर आप ये सोचते होंगे कि सफर तो हम ट्रेन से कर रहे हैं और मैदानी या पहाड़ी इलाकों में कर रहे हैं तो समुद्र तल से ऊंचाई का क्या संबंध है। हम आपको इस लेख के जरिए बताते हैं कि समुद्र तल से ऊंचाई के मायने क्या हैं।

    यात्री सुरक्षा से जुड़ी है जानकारी

    किसी स्टेशन पर पहुंचते हैं तो स्टेशन के प्रारंभ और निकास स्थान पर पीले रंग में बड़े-बड़े अक्षरों में स्टेशन का नाम के ठीक नीचे समुद्र तल से ऊंचाई भी लिखी होती है। आपको बता दें कि स्टेशनों पर जो समुद्र तल की ऊंचाई लिखी होती है उसका सीधा मतलब यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। हमारे देश का हर क्षेत्र या राज्य कहीं ऊंचाई पर है तो कहीं नीचा भी है। इसकी माप के लिए भारतीय रेलवे समुद्र तल को मानक के रूप में इस्तेमाल करती है

    रेल के ड्राइवर को है जानकारी

    यात्रियों के लिए ये शब्द मायने नहीं रखते हैं लेकिन रेल ड्राइवर के लिए इसकी बहुत अहमियत होती है। ड्राइवर ट्रेन लेकर चलता है तो हर स्टेशन पर वह देखता रहता है कि वर्तमान में हम समुद्र तल से ऊंचाई की ओर जा रहे हैं या नीचे की ओर सफर कर रहे हैं। रेलवे ट्रैक हर जगह समतल नहीं होते हैं। 

    इंजन की शक्ति यानि टॉर्क को बढ़ाकर चलाते हैं।

    एक रेल में करीब 12 बोगियां या उससे अधिक होती हैं। लोको पायलट इस समुद्र तल के माध्यम से ही पता लगाते हैं कि वे ऊंचाई की ओर जा रहे हैं तो इंजन की शक्ति यानि टॉर्क को बढ़ाकर चलाते हैं। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो ट्रेन उस गति से नहीं चल पाएगी, जो उसके लिए निर्धारित है।

    वहीं जब ट्रेन ढलान की तरफ जा रही होगी तो ड्राइवर इंजन की कम शक्ति का प्रयोग करते हुए अपने ब्रेकिंग सिस्टम के माध्यम से उसे नियमित रूप से नियंत्रित करता रहेगा। इससे दुर्घटना भी नहीं होगी। इसलिए सभी रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर समुद्र तक की ऊंचाई का जिक्र किया जाता है।