आगरा, संदीप शर्मा। वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो, जैसी तमाम प्रेरणादायी कविताएं पढ़कर हम सभी ने खुद को बचपन से ही हिंदी और हिंदुस्तान के बेहद करीब पाया। उक्त कविताओं का सृजन द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने किया था, जो आगरा की शान थे। उनकी कविताओं और साहित्य संग्रह को उनके पुत्र डा. विनोद कुमार माहेश्वरी दोबारा से सहेजने में जुटे हैं, ताकी भावी पीढ़ी फिर से देश और भाषा के प्रति प्रेम और सौहार्द का भाव सीखे और बाल साहित्य को नई संजीवनी मिल सके।

ए 46 आलोक नगर निवासी आगरा कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. विनोद कुमार माहेश्वरी बताते हैं कि उनके पिता ने अपने साहित्य से हिंदी की खूब सेवा की। उनकी कविताएं पढ़कर एक पीढ़ी युवावस्था पार कर चुकी है। अब नई पीढ़ी तक इसी साहित्य की प्रेरणा को पहुंचाने के लिए वह उनके साहित्य को नया स्वरूप देने में जुटे हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने उनकी आत्मकथा सीधी राह चलता रहा से की थी, जो उन्होंने अपने निधन से दो घंटे पहले ही पूरी की थी। उन्होंने इसका संपादन कराकर प्रकाशित कराया। साथ ही 50 कविताओं का संग्रह ऋचा ऋगवेदी, स्वर सामवेदी भी उन्होंने प्रकाशित कराया। इस वर्ष उनका थोड़ा और साहित्य नए सिरे से प्रकाशित कराने की तैयारी है। द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी के साहित्य पर देश के चुनिंदा समालोचकों के आलेखों का संग्रह मेरी कविता का हर बोल तुम्हारा है वर्ष 2020 में प्रकाशित हो चुका है। इसमें देशभर से करीब 15 लेखकों, समालोचकों आदि के आर्टिकल प्रकाशित किए गए थे। साथ ही उन्होंने बैंकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की डा. पूरन रानी गुप्ता से पिता की 50 कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद कराया है, रेनवों नामक इस संकलन को अहिंदी भाषी व विदेशी बच्चों के लिए तैयार कराया है, ताकि वह भी उससे प्रेरणा ले सकें। इसकी प्रशंसा लोक सभा स्पीकर और उपराष्ट्रपति ने भी कर चुके हैं।

इसकी है तैयारी

डा. माहेश्वरी ने बताया कि वह पिता की रचनावली का परिमार्जित और संशोधित संस्करण जल्द ही प्रकाशित कराने वाले हैं, जो तीन खंडों में होगा। मुद्रण प्रक्रिया में है। इसे 1997 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा ने जारी किया था। पिता के बाल साहित्य पर दिल्ली के प्रसिद्ध साहित्यकार और कवि डा. ओम निश्चल ने भी एक पुस्तक लिखी है, जिसका मुद्रण जारी है। वह 2021 में ही आएगी। वह पिता की 150 से 200 चुनी हुई कविताओं का संकलन भी तैयार करा रहे हैं, जो इसी वर्ष प्रकाशित होंगी।

प्रतिमा अनावरण की तैयारी

डा. माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पिता से जुड़ी हुई वस्तुओं और यादें सहेजी हैं। उनका कमरा आज भी वैसा ही है, जैसा तब था। पिता का साहित्य, ऐनक, लाठी, घड़ी और पर्स भी सुरक्षित है। वहीं रोहता में उनके समाधि स्थल को नवनिर्मित कराकर प्रतिमा स्थापित कराई गई है, जिसका अनावरण अगले माह प्रस्तावित है।

Edited By: Prateek Gupta