Flood in Chambal: मध्यप्रदेश की बारिश से रौद्र रूप में नदी, बाढ़ की चपेट में कई गांव, सेना ने संभाला मोर्चा, तस्वीरें
ग्राम पंचायत चीलपुरा अंडवा पुरैनी और फरासपुरा के अंतर्गत सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रभावित गांव में करीब सेना के 70 जवान तैनात किए गए हैं जो बीमार लोगों के साथ बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को लगातार रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।

आगरा, जागरण टीम। मध्यप्रदेश और हाडोती क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बाद कोटा बैराज से पानी की निकासी के चलते धौलपुर जिले में चंबल नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। जिसके कारण राजाखेड़ा उपखंड में करीब दर्जन भर से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में बने हुए है। हालात यह हैं कि बाढ़ के पानी ने गांव के साथ स्कूलों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
घर बाढ़ के पानी में डूबने की कगार पर
उपखंड के गांव गढ़ी जाफर, दगरा, बरसला, हेत सिंह का पुरा, खोड़ आदि गांव टापू में तब्दील हो चुके है तो वहीं अंधियारी गांव में लोगों के घर बाढ़ के पानी में डूबने की कगार पर पहुंच चुके हैं। वहीं बात करें दिहोली थाना क्ष्रेत्र के चम्बल तटवर्ती गांव की तो वहां स्थिति और भी भयावह बनती जा रही है।
चंबल नदी में पानी का स्तर बढ़ा
चंबल नदी में पानी की भारी आवक को देखते हुए बुधवार सुबह पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर रेंज, राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा, पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने राजाखेड़ा उपखंड के चंबल प्रभावित गांवों का दौरा कर हालातों का जायजा लिया और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए वहां तैनात फोर्स को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
इसी के साथ प्रभावित गांव में लोगों के लिए भोजन, दवाई आदि के लिए उपखण्ड अधिकारी और बीडीओ को निर्देश दिए। वहीं सेना द्वारा चंबल प्रभावित गांव में ड्रोन कैमरे के द्वारा निगरानी की जा रही है।
चंबल नदी में पानी बढ़ने से फसल जलमग्न
चंबल नदी में पानी की लगातार आवक बढ़ने से राजाखेड़ा उपखंड चम्बल तटवर्ती गांव में सैकड़ों बीघा फसल पानी में जलमग्न हो गई है। जिससे यहां के किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगे खाद-बीज खरीद कर जैसे तैसे फसल को उगा तो लिया लेकिन विगत दो साल से लगातार चंबल की बाढ़ का दंश झेल रहे लोगों को इस बार भी चंबल ने रोने पर मजबूर कर दिया है।
चंबल के बढ़ते जलस्तर के कारण बीहड़ के दर्रे में से पानी होकर खेतों में पहुंच चुका है। जिससे खेतों में खड़ी बाजरा-तिल आदि फसलें पूरी तरह से जलमग्न होकर पानी में डूब चुकी है।
प्रशासन की टीम ने किया बाढ़ क्षेत्र का दौरा
खतरे के निशान से एक मीटर दूर बह रही चंबल नदी की वजह से कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति है। इसको देखते हुए बुधवार को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। बाढ़ के हालातों को देखते हुए वहा के सात गांवों के लिए पांच स्टीमरों की व्यवस्था की गई है।
रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा गांव के लिए खेड़ा राठौर पर स्टीमर की व्यवस्था है। पुरा भगवान के लिए गांव की पुलिया के निकट, झरनापुरा और कुआं खेड़ा के लिए हर लालपुरा गांव के पास स्ट्रीमर लगाया गया है। गुड़ा गांव के ग्रामीणों के लिए सिमराही गांव के पास आवागमन के लिए नाव व स्ट्रीमर की व्यवस्था की गई है।
कोटा बैराज से पानी छोड़ने पर चंबल नदी का जलस्तर 128.7 मीटर पहुंच गया जो खतरे के निशान से सिर्फ 1.3 मीटर दूर है। उपजिलाधिकारी बाह रतन सिंह का कहना है कि ग्रामीणों की मदद के लिए पांच स्टीमर लगाए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जो लोग बीमार थे, उन्हें पहले ही निकाल दिया गया है। बाढ़ चौकियों पर टीमें मुस्तैद है। वे लगातार मदद में जुटी हैं। बाढ़ चौकियों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों का निगरानी की जा रही है।
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