सपा MP रामजीलाल सुमन ने सरकार को घेरा: 'नकली दवाओं के कारोबारियों को हो कड़ी सजा, कंपनियाें ने दिया BJP को मोटा चंदा'
राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने नकली दवाओं के कारोबार पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति में कमी के कारण यह अवैध व्यापार फल-फूल रहा है जिससे करोड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में है। सरकार द्वारा लिए गए दवाओं के नमूनों में से भी कई गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए। कहा कि नकली दवा विक्रेता देश के दुश्मन हैं और उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

जागरण संवाददाता, आगरा। सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने देश में भारी मात्रा में नकली दवाओं की बिक्री पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, नकली दवाओं के अवैध व्यापार को रोकने के लिए सरकार में दृढ़ इच्छा शक्ति की कमी है। जानलेवा गोरखधंधे में संलिप्त व्यापारियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं होने की वजह से करोड़ों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
पूरी दुनिया में नकली दवा का कारोबार 17 लाख करोड़ से अधिक का
विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट में बताया गया है कि, पूरी दुनिया में नकली दवाओं का कारोबार 17 लाख करोड़ से अधिक का है। भारत इस गोरखधंधे की प्रमुख मंडी है। महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने सदन में स्वीकार किया है कि, सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों को नकली दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालात से निपटने हेतु गुनहगारों को दंड दिलाने की न्यायिक प्रक्रिया बेहद लचीली है, सरकार का रुख भी इनके प्रति उदार है, जिससे गुनहगार बड़ी आसानी से बच जाते हैं।
रामजीलाल सुमन ने की प्रेस वार्ता
शनिवार को संजय प्लेस के एचआइजी फ्लैट स्थित आवास पर प्रेस वार्ता में रामजीलाल सुमन ने कहा कि, राज्यसभा में उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया है कि, वर्ष 2019 से 2025 के बीच 5,74,233 दवाओं के नमूने लिए गए थे, जिनमें सिर्फ 16,839 दवाइयां ही गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप पाई गईं।
दवा कंपनियों ने बीजेपी को दिया मोटा चंदा
हकीकत यह है कि दवा बनाने वाली कंपनियों ने भाजपा को मोटा चंदा दिया है। टोरेंट फार्मास्यूटिकल लिमिटेड ने 61 करोड़ रुपए, सिप्ला लिमिटेड ने 37 करोड़ रुपए, सन फार्मा लेबोरेटरीज लिमिटेड ने 31 करोड़ रुपए, जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड ने 18 करोड़ रुपए, इंटास ने 20 करोड़ रुपए, आइपीसीए लैबोरेट्रीज लिमिटेड ने 10 करोड़ रुपए का चंदा भाजपा को दिया।
नमूने गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप नहीं मिले
इन कंपनियों द्वारा बनाई गईं दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए नमूने लिए गए तो कार्डीवास, लैटोप्रोस्ट आई ड्राप्स, रेमडेसिविर इंजेक्शन, कोविफोर, लारियागो टैबलेट जैसी न जाने कितनी ही दवाओं के नमूने गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके बावजूद भी जो प्रभावी कानूनी कार्रवाई इन कंपनियों के खिलाफ होनी चाहिए थी वो नहीं हुई और कहीं से भी इन पर मानसिक दबाव नहीं पड़ा।
'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट- 1940' प्रभावी था
सपा राज्यसभा सदस्य ने कहा, कि यह देखने को मिला कि भाजपा सरकार के संरक्षण में इन कंपनियों की नकली दवाओं का गोरखधंधा और ज्यादा फला-फूला है। नकली दवाओं की बिक्री को रोकने के लिए देश में 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट- 1940' प्रभावी था। सरकार ने इस कानून को अव्यावहारिक मानकर 2023 में इसमें संशोधन किया और अपराध की प्रकृति के अनुरूप दंड का प्रविधान किया। इसके अंतर्गत मिलावटी दवाइयां बेचने पर 5 लाख रुपए तक का आर्थिक दंड तथा 3 वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रविधान किया गया है।
दंड दिलाने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए
सांसद ने कहा, कि मजेदार बात यह है कि इन अवैध दवा विक्रेताओं के खिलाफ जो मुकदमे पंजीकृत हुए उनमें से सिर्फ 5.9 प्रतिशत मामलों में ही दंडित किया जा सका है। यह अत्यधिक गंभीर है और हमें दंड दिलाने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए। व्यवस्था की खामियों का आकलन कर आवश्यक सुधार करने की आवश्यकता है। यह कितना गंभीर मामला है कि देश के करोड़ों लोग इस अवैध धंधे की चपेट में हैं। वर्तमान समय में नकली दवाओं के अवैध कारोबार के शिकार करोड़ों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
जान से हाथ धाेना पड़ रहा
रामजीलाल सुमन ने कहा, कि गंभीर बीमारियों में गरीब आदमी द्वारा अपनी हैसियत से अधिक खर्चा करने पर भी जब अपेक्षित परिणाम नहीं आता है तो एक ओर उस व्यक्ति को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है तो वहीं पीढ़ी दर पीढ़ी यह परिवार आर्थिक गुलामी का शिकार हो जाता है। नकली दवा विक्रेता देश के दुश्मन हैं, इस अपराध के लिए बड़ी से बड़ी सजा भी इनके लिए कम है।
सरकारी संरक्षण के बिना नहीं हो सकता है ये काम
रामजीलाल सुमन ने कहा, कि अभी हाल ही में आगरा में नकली दवाओं पर ताबड़तोड़ छापे पड़ने के बाद जो तथ्य प्रकाश में आए हैं उससे यह स्पष्ट है कि, इतने बड़े पैमाने पर यह गुनाह सरकारी संरक्षण के बगैर हो ही नहीं सकता। डेढ़ दर्जन ट्रेनों से नकली दवाओं की ये खेप आगरा में उतरती है और कुरियर के माध्यम से भी नकली दवाइयां लोगों तक पहुंचती हैं। बड़ी और नामी कंपनियों के रैपर में नकली दवाइयां बेची जा रही हैं। सरकार ऐसे मामलों पर अनभिज्ञ बनी हुई है। इसका तात्पर्य यह है सरकारी तंत्र इस गोरखधंधे में लिप्त है।
सिर्फ औपचारिकता पूरी करके कर दी जाएगी इतिश्री
पूरे प्रकरण में जो सतही कार्रवाई की जा रही है उसमें पुराने अनुभवों के आधार पर भी इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी करके इस मामले की इतिश्री कर दी जाएगी। इस अवैध कारोबार में जो लोग लगे हुए हैं उन्हें ये सख्त संदेश देने की आवश्यकता है कि यह गोरखधंधा बंद हो और इसमें लिप्त लोगों को कड़ी सजा दी जाए जिससे भविष्य में कोई भी कंपनी नकली या मिलावटी दवा का व्यापार करने की हिम्मत न कर सके।
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