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    UP Police Bharti परीक्षा में चौंकाने वाला मामला सामने आया, कम उम्र दिखाकर पास किया एग्जाम, सत्यापन में पकड़ा

    एक युवक ने जन्मतिथि बदलकर और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके परीक्षा पास करने की कोशिश की। हालांकि दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसकी धोखाधड़ी पकड़ी गई। उसके पास से दो अलग-अलग तिथियों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों की तलाश कर रही है।

    By Jagran News Edited By: Abhishek Saxena Updated: Sat, 25 Jan 2025 07:25 AM (IST)
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    Agra News: पुलिस हिरासत में नकली दस्तावेज लगाकर पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल हुआ प्रदीप। सौ.पुलिस

    जगरण संवाददाता, आगरा।  Agra News: जन्मतिथि बदलकर नकली दस्तावेजों से पुलिस भर्ती परीक्षा पास करने वाला युवक दस्तावेज सत्यापन के दौरान पकड़ा गया। आरोपित के पास से दाे अलग-अलग तिथियों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। परीक्षा की उम्र निकल जाने पर आरोपित ने कम उम्र के दस्तावेज बनवाकर परीक्षा दी थी। फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट के दौरान धोखाधड़ी पकड़ी गई।

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    पुलिस दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों की तलाश कर रही है। मुकदमा पुलिस भर्ती परीक्षा के फ़िज़िकल स्टैंडर्ड टेस्ट में प्रतिभागियों के दस्तावेजों की जांच कर रहे दारोगा नवनीत गौड ने दर्ज कराया है।

    मुकदमा में बताया गया है कि गुरुवार को सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस लाइन के बहुउद्देशीय हाल में डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिज़िकल स्टैंडर्ड टेस्ट के दौरान बायोमेट्रिक के समय मथुरा, धर्मपुरा के प्रदीप सिंह के फार्म में जन्मतिथि 5 जुलाई 2005 और ईकेवाईसी में 12 मई 1998 प्रदर्शित हो रही थी। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर उसके बैग की तलाशी ली गई। बैग में मोबाइल फोन ,दो आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मिले।

    हिरासत में लेकर की पूछताछ

    हिरासत में लेकर पूछताछ में आरोपित ने बताया कि परीक्षा में शामिल होने के लिए उसकी उम्र निकल चुकी थी। इस कारण उसने नकली दस्तावेज बनाकर परीक्षा दी थी। पुलिस ने आरोपित को जेल भेजा है। दोबारा पास की थी दसवीं की परीक्षा आरोपित प्रदीप ने पुलिस को बताया कि उसका नाम दस्तावेजों में प्रदीप कुमार सिंह था। इस नाम से उसने 2013 मे दसवीं की परीक्षा दी थी। इसके बाद प्रदीप सिंह नाम से 5 जुलाई 2005 की जन्मतिथि का दूसरा आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की मदद से 2020 में दोबारा दसवीं की परीक्षा पास की थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्र कम कर दस्तावेज बनाए थे।

    प्रमाण पत्रों के सत्यापन में सिपाही बनने से दूरी बना रहे संदिग्ध

    पुलिस सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी प्रमाण पत्रों के सत्यापन में सिपाही बनने से दूरी बना रहे हैं। प्रतिदिन 10 से 15 अभ्यर्थी अनुपस्थित हो रहे हैं। यह वह अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष अगस्त में आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी। जिनके प्रपत्रों में त्रुटि होने पर उनसे प्रोवीजनल प्राेफार्मा भरवाया गया था। लिखित परीक्षा में पास होने पर उन्हें प्रमाण पत्र सत्यापन के समय इस त्रुटि को दूर कराके लाना था।

    लिखित परीक्षा में पास होने के बाद पुलिस लाइन में चल रही प्रमाण पत्रों के सत्यापन एवं शारीरिक माप-जोख के लिए आए अभ्यर्थी अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करते हुए जागरण

    अब तक दो अभ्यर्थी हुए गिरफ्तार

    एक सप्ताह के दौरान पुलिस ने प्रमाण पत्र सत्यापन में दो अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है। दोनों ने अपनी जन्मतिथि में फेरबदल किया था। उक्त दोनों ने भी प्रोवीजनल प्रोफार्मा भरा था। आशंका है कि इनमें अधिकांश अभ्यर्थी वह हैं, जिन्हें प्रमाण पत्रों के सत्यापन में की गई गड़बड़ी के चलते पकड़े जाने का डर सता रहा है।

    प्रमाण पत्रों के सत्यापन एवं उनकी माप-तोल की प्रक्रिया पुलिस लाइन में चल रही

    पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा वर्ष 2024 में 23,24,25 एवं 30 व 31 अगस्त को शहर के 27 केंद्रों पर दो पाली में आयोजित हुई थी। जिसमें 1,17,600 अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। साल्वर गिरोहों पर पुलिस की सख्ती समेत डिजिटल तकनीक का प्रयोग करने से 78,834 अभ्यर्थियों ने ही परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन एवं उनकी माप-तोल की प्रक्रिया 26 दिसंबर से पुलिस लाइन में चल रही है। सत्यापन के लिए तीन बोर्ड बनाए गए हैं, प्रत्येक बोर्ड में छह सदस्य हैं। इस बार बोर्ड में एक चिकित्सक को भी रखा गया है। प्रत्येक बोर्ड प्रतिदिन 75-75 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है।

    10 से 15 अभ्यर्थी नहीं आ रहे

    प्रतिदिन 10 से 15 अभ्यर्थी नहीं आ रहे हैं। जिसके पीछे पुलिस की सख्ती मानी जा रही है। परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों में त्रुटियां होने पर बोर्ड ने उन्हें संदिग्ध मानते हुए प्रोफार्मा भरवाया था। उन्हें परीक्षा देने से नहीं रोका था। प्रोफार्मा भरवाने का उद्देश्य अभ्यर्थियों द्वारा प्रमाण पत्रों की त्रुटि को सत्यापन के समय सही कराकर लाना था।

    प्रोफार्मा भरने वाले ही अधिकांश अभ्यर्थी सत्यापन प्रक्रिया से दूरी बना रहे हैं। प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी करने पर उन्हें अपने पकड़े जाने का डर सता रहा है।डीसीपी मुख्यालय सैयद अली अब्बास ने बताया कि प्रमाण पत्रों के सत्यापन में प्रतिदिन कई अभ्यर्थी अनुपस्थित हो रहे हैं। जिन लोगों को तय तारीख से पहले या बाद की तिथि प्रमाण पत्रों के सत्यापन की चाहिए, उन्हें इसकी अनुमति दी जा रही है।

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    वर्दी पहनने का 150 से अधिक अभ्यर्थियों का सपना टूटा

    पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में पास होने के बावजूद 150 से अधिक अभ्यर्थियों का वर्दी पहनने का सपना टूट गया। पुलिस लाइन में प्रमाण पत्रों के सत्यापन और शारीरिक माप-जोख में प्रतिदिन पांच से सात अभ्यर्थियों की लंबाई कम होने पर निकल रहे हैं। अधिकांश अभ्यर्थी द्वारा माप-ताेल के लिए दोबारा आवेदन किया जा रहा है। जिस पर उनका मेडिकल दूसरे बोर्ड द्वारा किया जाता है। गिनती के अभ्यर्थी ही दोबारा बोर्ड में उत्तीर्ण हो रहे हैं। पुलिस भर्ती में सामान्य वर्ग में पुरुष की न्यूनतम लंबाई 168 सेंटीमीटर महिला की 152 सेंटीमीटर होनी चाहिए।