दीपावली पर गाय के गोबर से बने दीयों से रोशन करें घर, पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित, आगरा नगर निगम में लगा काउंटर
दीपावली पर गाय के गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल दीये और मूर्तियों की मांग बढ़ गई है, जिनकी कीमत 100-200 ...और पढ़ें

गाय के गोबर से बने दीये।
HighLights
गोबर से बने दीये और मूर्तियां पर्यावरण अनुकूल हैं
विसर्जन पर नदियों को प्रदूषित नहीं करते, जल शुद्ध करते
लव यू जिंदगी संस्था से दो दर्जन लोगों को रोजगार
जागरण संवाददाता, आगरा। दीपावली पर गाय के गोबर से निर्मित दीयों और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों से घर महक उठेंगे। साथ ही धूपबत्ती, हनुमान, शिव, सरस्वती, कुबेर और रामदरबार की मूर्तियों की भी खूब मांग है। वंदनवार, शुभ-लाभ, ओम, श्री, स्वस्तिक और रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। 100 से 200 रुपये तक कीमत वाले ये उत्पाद इस बार दीपावली की सजावट में खास जगह बना रहे हैं।
पर्यावरण अनुकूल इन उत्पादों की खासियत है कि विसर्जन के बाद ये नदियों और नहरों को प्रदूषित नहीं करते, बल्कि पानी की शुद्धता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
दीये, मूर्तियों, हवन सामग्री की कीमत है 100 से 200 के बीच
लव यू जिंदगी के संस्थापक प्रांकुर जैन ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति इनका विसर्जन नदी या नहर में नहीं कर सकता है, तो वह घर में ही एक बाल्टी में पानी भरकर मूर्ति या अन्य सामान को एक सप्ताह के लिए डूबा कर रख दें। इसके बाद मूर्ति आदि को हाथ से बारीक तोड़कर पौधों व पेड़ आदि में डाल दें। टेढ़ी बगिया स्थित कान्हा गोशाला से गोबर एकत्रित कर उत्पादों को बनाया जाता है। कमाई का कुछ प्रतिशत ग्रामीण गोशाला में गाय के लिए खाना आदि की आपूर्ति की जाती है। इसके जरिये हम लगभग दो दर्जन लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
गोबर से बने उत्पाद विसर्जन पर नदी के पानी को करते हैं शुद्ध
शहर व अन्य जिलों में की प्रदर्शनी में पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की प्रदर्शन किया जाता है। छह साल पहले हमने गाय के गोबर से बने उत्पादों की शुरुआत की। इनमें गोबर, मैदालकड़ी, ग्वारगम का प्रयोग किया जाता है। हमारी संस्था रोजाना एक हजार घरों से खाना एकत्रित कर गोशाला में पहुंचती है।
बरसात में रहती है सीड बाल की मांग
संस्थापक प्रांकुर जैन ने बताया कि अनूप सिंघल और शिव शंकर मुंद्रा के साथ मिलाकर पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर संस्था की शुरुआत की। लोगों को गणेश चतुर्थी पर गणेश मूर्ति, नवरात्र पर दुर्गा मूर्ति, हवन सामग्री, हवन लकड़ी, उपले व विभिन्न तरह की राखी उपलब्ध करा रहे हैं। बरसात में सीड बाल का मांग रहती है, जिसमें नीम, जामून और सहजन का बीज रहता है। गोबर इसमें खाद का काम करता है।
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सुबह 11 से रात सात बजे तक खरीद सकते हैं दीये
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय सिंह ने बताया कि गो उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए न लाभ न हानि पर गाय के गोबर और बने उपले, हवन सामग्री, हवन लकड़ी नगर निगम स्थित कार्यालय के काउंटर से उपलब्ध कराई जा रही है। कोई भी व्यक्ति नगर निगम कार्यालय में आकर सुबह 11 से रात सात बजे तक सामान खरीद सकता है।
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