Heatstroke से भी बचाता है घड़ा-सुराही का पानी, प्राकृतिक एल्कलाइन के साथ हैं कई फायदे
कोरोना काल के बाद मिट्टी के मटके का रुझान बढ़ गया है। पुराने दौर के मटके अब नए कलेवर में भी आ गए हैं। सुविधा के लिए कुम्हार अब टोंटी भी लगा रहे हैं। बाजार में सौ से 140 रुपये में इनकी कीमत है। 20 लीटर का मटका

आगरा, जागरण टीम। हम में से कई लोग गर्मियों में मिट्टी के बर्तन में पानी रखते हैं। घड़ा, सुराही में पानी पीना आजकल स्टील और प्लास्टिक के कंटेनर से बेहतर है साथ ही इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। आज भी कई घरों में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुराही या मिट्टी का घड़ा जिसे आम चलन में मटका भी बोलते हैं। इसका पानी फ्रिज से अच्छी ठंडक देता है। मटका उन दिनों से इस्तेमाल हो रहे हैं कि जब ठंडा पानी देने के लिए घरों में फ्रिज नहीं थे। मिट्टी के बर्तन वाष्पीकरण के सिद्धांत पर काम करते हैं, जो पानी को ठंडा करने में मदद करते हैं।
कारीगर इन्हें खूबसूरत और फैशनबल बना रहे हैं
आजकल घर के एक कोने में रखी सुराही स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखी जाने लगी है। यहीं कारण है कि मटके बनाने वाले कारीगर इन्हें खूबसूरत और फैशनबल बना रहे हैं। साधारण मटकों के साथ अब अलग स्टाइल और डिजाइन वाले घड़े और सुराही भी बाजार में उपलब्ध हैं। टोंटी वाले और कैंफर जैसे आकार वाले घड़े भी बाजार में हैं। खास बात यह है कि कलरफुल और पेंटिंग वाले मटके भी आप ऑर्डर देकर बनवा सकते हैं।
स्वास्थ्य के लिए अच्छा है सुराही का पानी
रेफ्रिजरेट या फ्रिज का पानी बहुत ठंडा हो जाता है और बाहर रखा पानी बहुत गर्म। इस दौरान गर्मियों में घड़ा या सुराही का पानी ही सबसे अच्छा होता है। एक छोटी सी सुराही की बड़ी खासियत होती थी। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदार सुरेश का कहना है कि सुराही लोग सफर में इस्तेमाल करते थे।
मिट्टी का बर्तन जितना झरझरा होता है उसकी खासियत होती है कि वह पानी को धीरे-धीरे ठंडा करता है और देर तक पानी ठंडा रहता है। इसकी सही शीतलता गले के लिए अच्छी होती है। गर्मी के सफर में सुराही का पानी पीने से गला खराब नहीं होता है। इसके अलावा खांसी से पीड़ित लोगों भी मिट्टी के बर्तन का पानी पी सकते हैं।
हीटस्ट्रोक से बचाता है पानी
आजकल तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। ऐसे में हीटस्ट्रोक या लू एक का खतरा बहुत रहता है। मिट्टी के बर्तनों में रखे पानी में विटामिन और खनिज शरीर के ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं ये शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करते हैं।
आयुष चिकित्सक रामकुमार यादव का कहना है कि मानव शरीर अम्लीय होता है, जबकि मिट्टी क्षारीय होती है। क्षारीय बर्तनों का पानी हमारे शरीर की अम्लीय प्रकृति के साथ प्रतिक्रिया करता है और एक उचित पीएच संतुलन बनाने में मदद करता है। जिसके चलते मिट्टी के बर्तन का पानी पीने से गैस और पेट संबंधी समस्याओं को दूर रखने में मदद मिलती है।
मटकों की मांग बढ़ी
गर्मी के साथ ही शहर में मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान मटके की तरफ बढ़ा है। खास बात ये है कि अब लोग प्लास्टिक की टोंटी लगे मटके पसंद कर रहे हैं। बिक्री बढ़ने से कुंभकारों के चेहरे खिले हैं।
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