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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 23, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आगरा में 99 दिन नजरबंद रहे थे छत्रपति शिवाजी, कैद से चकमा देकर भाग निकलने की कहानी भी है दिलचस्‍प

By Prateek GuptaEdited By:
Published: Sat, 23 Apr 2022 12:09 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मारक विकसित करने के दिए हैं निर्देश। पुरंदर की संधि के बाद 11 मई 1666 को ...और पढ़ें

छत्रपति शिवाजी को आगरा में 99 दिन के लिए नजरबंद रखा गया था।
छत्रपति शिवाजी को आगरा में 99 दिन के लिए नजरबंद रखा गया था।

आगरा, निर्लोष कुमार। मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने धर्मार्थ कार्य, पर्यटन, संस्कृति व भाषा विभागों की कार्य योजना की प्रस्तुति के दौरान आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद शिवाजी के आगरा दौरे पर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिवाजी को यहां 99 दिन नजरबंद रहना पड़ा था। इसके बाद वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए बचकर निकल गए थे। हिंदू स्वराज्य की नींव उन्होंने रखी थी।

शिवाजी की आगरा यात्रा

राजा जयसिंह से पुरंदर की संधि करने के बाद शिवाजी अपने दल के साथ 11 मई, 1666 को आगरा आए थे। इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने अपनी किताब 'औरंगजेब' में शिवाजी की आगरा यात्रा का विस्तृत वर्णन किया है। शिवाजी ने आगरा की सीमा पर सेवला सराय के नजदीक मुलक चंद की सराय पर डेरा डाला था। यह सराय अब नहीं है। शिवाजी 12 मई को आगरा किला स्थित दीवान-ए-खास में औरंगजेब के दरबार में गए, लेकिन उचित सम्मान नहीं मिलने पर वह नाराजगी जताते हुए लौट आए। औरंगजेब ने इसी दिन शिवाजी को राजा जयसिंह के बेटे रामसिंह की छावनी के निकट सिद्दी फौलाद खां की निगरानी में नजरबंद करने का आदेश किया।

शिवाजी ने यूं दिया चकमा

16 मई, 1666 को शिवाजी को रदंदाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। शिवाजी ने बीमारी का बहाना बनाकर गरीबों को फल बांटना शुरू कर दिए। औरंगजेब ने 18 अगस्त को उन्हें रामसिंह की छावनी के निकट स्थित फिदाई हुसैन की शहर के बाहर टीले पर स्थित हवेली में रखने का आदेश किया। 19 अगस्त, 1666 को शिवाजी अपने पुत्र संभाजी के साथ यहीं से फलाें व मिठाइयों की टोकरी में बैठकर निकल गए थे। उनकी जगह हीरोजी फरजंद पलंग पर लेटे रहे। औरंगजेब को उनके बचकर निकलने की जानकारी 20 अगस्त, 1666 को मिली। शिवाजी 12 सितंबर, 1666 को राजगढ़ पहुंचे। उनका अागरा प्रवास 101 दिन का रहा था, जिनमें से 99 दिन उन्हें नजरबंदी में बिताने पड़े थे।

इतिहास में मिलता है रामसिंह की हवेली का जिक्र

इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि आगरा किला में शिवाजी को बंधक बनाकर रखे जाने का जिक्र इतिहास में नहीं मिलता है। सभी इतिहासकारों ने उन्हें रामसिंह की हवेली के नजदीक रखे जाने की बात कही है।

बदला जा चुका है म्यूजियम का नाम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर, 2020 में आगरा में निर्माणाधीन मुगल म्यूजियम का नामकरण छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पर्यटन विभाग ने इसका नोटिफिकेशन किया था। म्यूजियम में शिवाजी पर अाधारित गैलरी बनाने और यहां उनकी प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव भी बना था।