Deemed University: केंद्रीय हिंदी संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय बनने से एक कदम दूर, शुरू होंगे कई नए कोर्स
Central Hindi Institute डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में। शिक्षा मंत्रालय भेजा जाएगा शपथ पत्र। 12 पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया फीस हो चुकी जमा।
आगरा, प्रभजोत कौर। केंद्रीय हिंदी संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। शिक्षा मंत्रालय से एक पत्र संस्थान में आया है, जिसमें एक शपथ पत्र मांगा गया है। शपथ पत्र केंद्रीय हिंदी संस्थान और केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नाम को लेकर है। इसके बाद यूजीसी का निरीक्षण होगा। डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद संस्थान में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे। उसके बाद यहां स्नातक, एमफिल और शोध उपाधि के पाठ्यक्रमों के साथ ही फैशन डिजायनिंग और भाषा विज्ञान संबंधी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
12 साल पहले आई थी संकल्पना
संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की बात 12 साल पहले शुरू हुई थी।संस्थान के निवर्तमान उपाध्यक्ष प्रो. कमलाप्रसाद ने सबसे पहले इसकी चर्चा की थी। उसके बाद निवर्तमान निदेशक प्रो. शंभूनाथ ने 2008 से पहले ही प्रस्ताव बना कर जमा किया था। डीम्ड यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया में संस्थान की तरफ से 2016 में दस लाख रुपये की फीस तक जमा हो चुकी है। पिछले दिनों मंत्रालय से एक पत्र आया है, जिसमें मंत्रालय की ओर से केंद्रीय हिंदी संस्थान और केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को लेकर एक शपथ पत्र मांगा गया है। बता दें कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के अंतर्गत काम करता है। यह शपथ पत्र मंत्रालय भेजने के बाद यूजीसी की टीम संस्थान का निरीक्षण करेगी कि संस्थान डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के सभी मानकों को पूरा करता है या नहीं। इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को दी जाएगी, इसके बाद संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मंत्रालय देगा।
बढ़ जाएंगे पाठ्यक्रम
वर्तमान में संस्थान में विदेशी और स्वदेशी विद्यार्थियों के लिए हिंदी के पाठ्यक्रम ही संचालित हैं। इनमें 10वीं, 12वीं,स्नातक और बीएड स्तर पर हिंदी पढ़ाई जाती है। डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद यहां पीएचडी, एमफिल, डीलिट जैसे पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे। शोध क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। संस्थान के राजस्व के लिए यहां फैशन डिजायनिंग, अनुवाद, भाषा विज्ञान आदि पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा सकेंगे।
डिग्री की होगी विश्वव्यापी मान्यता
संस्थान से पढ़े विद्यार्थियों की डिग्री को किसी भी अन्य राज्य या देश के विश्वविद्यालय में मान्यता नहीं मिलती है। डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद यहां की डिग्री की विश्वव्यापी मान्यता होगी। वर्तमान में संस्थान में 100 विदेशी और लगभग 275 सीटें स्वदेशी विद्यार्थियों की रहती हैं।पाठ्यक्रम नए शुरू होने पर सीटें भी बढ़ेंगी।
बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
संस्थान को मानद विवि का दर्जा मिलते ही यहां नए पदों का सृजन होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे तो उसके लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति होगी।
संस्थान का इतिहास
हिंदी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप को समान स्तर का बनाने के लिए और साथ ही पूरे भारत में हिंदी भाषा के शिक्षण को सबल आधार देने के उद्देश्य से 19 मार्च, 1960 को भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने एक स्वायत्तशासी संस्था केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का गठन किया और एक नवम्बर 1960 को इस संस्थान का लखनऊ में पंजीकरण करवाया गया। भारत सरकार द्वारा केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय को संचालित करने का पूर्ण दायित्व सौंपा गया। एक जनवरी, 1963 को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम बदल कर केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय कर दिया गया। बाद में 29 अक्टूबर, 1963 को संपन्न परिषद की गोष्ठी में केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय नाम भी बदलकर केंद्रीय हिंदी संस्थान कर दिया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय आगरा में है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 के दिशा-निर्देशों के अनुसार हिंदी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप का विकास कराना और दिशा-निर्देशों के अनुसार हिंदी को अखिल भारतीय भाषा के रूप में विकसित करने के लिए कार्य करना संस्थान का मुख्य उद्देश्य है।
डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए प्रयास काफी सालों से चल रहे हैं। मानद विवि का दर्जा मिलते ही आगरा के शिक्षा जगत को काफी लाभ मिलेगा।नए पाठ्यक्रमों के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। गाइडलाइंस के मुताबिक हर आवश्यकता को पूरा किया जा रहा है।
- डा.चंद्रकांत त्रिपाठी, कुलसचिव
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।