पैरों की नसों में ब्लॉकेज से खतरा, हर माह तीन बाइपास सर्जरी; देखिए क्या है लक्षण और बचाव
एसएन मेडिकल कॉलेज में पैरों की नसों में ब्लॉकेज के मामले बढ़ रहे हैं। हर महीने औसतन तीन मरीजों की बाइपास सर्जरी हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार धूम्रपान मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले मरीजों को इसका खतरा अधिक है। समय पर इलाज न होने पर पैर काटना भी पड़ सकता है। डॉ. सुशील सिंघल के अनुसार जनवरी से जून तक 150 मरीजों को परामर्श दिया गया है।

अजय दुबे l जागरण आगरा। बाह के रहने वाले 40 वर्षीय कदम सिंह को दो वर्ष से पैरों में असहनीय दर्द था। खड़े तक नहीं हो पाते थे। जांच में उनके पैरों को खून की सप्लाई करने वाली मुख्य धमनी में ब्लाकेज पाई गई। ऐसा ही केस फिरोजाबाद के रहने वाले 70 वर्षीय रामबाबू के साथ हुआ। पैर में गैंग्रीन होने पर भर्ती हुए। उनके दाएं पैर की खून की नस में 90 प्रतिशत ब्लाकेज थी।
दिल में ब्लाकेज से हार्ट अटैक की तरह ही पैरों में खून की सप्लाई करने वाली नसों में भी ब्लाकेज होने के मामले बढ़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कालेज में हर महीने औसत तीन से अधिक मरीजों के पैरों की बाइपास सर्जरी की जा रही है। समय से सर्जरी नहीं होने पर पैर तक काटना पड़ सकता है।
सप्ताह में पांच से छह मरीज आ रहे
एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन (सीटीवीएस) डा. सुशील सिंघल ने बताया कि सप्ताह में दो दिन ओपीडी होती है। हर सप्ताह ओपीडी में पेरीफेरल आर्टियल डिजीज (पीएडी) के पांच से छह मरीज आ रहे हैं। जैसे दिल की मांसपेशियों और धड़कने के लिए खून की सप्लाई वाली नसों में ब्लाकेज होती है।
वैसे ही पीएडी में पैरों को खून की सप्लाई करने वाली धमनियों में सिकुड़न व कोलेस्ट्राल, चर्बी जमने से ब्लाकेज होने लगती है। पहले पैरों में दर्द होता है लेकिन नजरअंदाज करने पर धीरे-धीरे ब्लाकेज से पैरों तक खून की सप्लाई कम होने लगती है। खड़े होने, आराम करने पर भी दर्द होता है। फिर भी इलाज न कराने पर गैंग्रीन (पैरों के टिश्यू खराब होना) हो जाता है।
150 मरीजों को दिया परामर्श
डा. सिंघल ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से जून तक 150 मरीजों को परामर्श दिया जा चुका है। वहीं, गैंग्रीन होने पर मरीज भर्ती हो रहे हैं। मरीजों में पेट से पैरों की तरफ जाने वाली खून की नस में ब्लाकेज से पैरों में दर्द होता है। जांघ व घुटने के पास ब्लॉकेज होने पर एक पैर में दर्द होता है। इसके लिए कलर डाप्लर और सीटी एंजियोग्राफी कराई जाती है। ब्लॉकेज होने पर कृत्रिम नस डालकर उस हिस्से को बाइपास कर खून की सप्लाई की जाती है। छह महीने में 20 मरीजों के पैरों की बाइपास सर्जरी की जा चुकी है।
आगरा: बुजुर्ग महिला की हार्ट सर्जरी के बाद कार्डियोथोरेसिक सर्जन डा. सुशील सिंघल(बाएं)। सौजन्य स्वयं
ये हैं लक्षण
चलने पर पिंडली या जांघ में दर्द
आराम करते समय भी पैरों में जलन या झनझनाहट
त्वचा ठंडी या नीली पड़ना
पैरों में घाव होने पर जल्दी न भरना
धूमपान, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा डा. सुशील सिंघल ने बताया कि पैरों में खून की नसों में ब्लाकेज का प्रमुख कारण धूमपान है। 50 वर्ष से अधिक आयु के मधुमेह रोगी, उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीज और जिन मरीजों को हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक पड़ चुका है, उनमें ब्लाकेज का खतरा अधिक रहता है।
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