आगरा, जागरण टीम। ठा. बांकेबिहारी की लीला अनूठी है, तो उनके भक्तों की आस्था निराली है। मंदिर में दिनों-दिन बढ़ती भक्तों की भीड़ के बीच दर्शन में हो रही कठिनाइयों का मंदिर सेवायत ही नहीं भक्तों ने भी अनूठा तरीका अपना लिया है। मंदिर सेवायतों ने वेबसाइट बनाकर भक्तों को ई-पूजा का आह्वान किया, तो श्रद्धालु भी पीछे नहीं रह रहे। ई-पूजा के लिए बाकायदा वेबसाइट पर श्रद्धालुओं की बुकिंग हो रही है और श्रद्धालु ई-पूजा करके आराध्य के प्रति अपनी आस्था भी जता रहे हैं।

ठा. बांकेबिहारी मंदिर के नाम से भले ही मंदिर प्रबंधन ने अब तक पूजा-सेवा के लिए किसी तरह की वेबसाइट नहीं बनवाई है। लेकिन, करीब दर्जनभर से अधिक मंदिर सेवायतों ने अलग-अलग वेबसाइट बनाकर श्रद्धालुओं के सामने मंदिर के इतिहास से लेकर मंदिर में होने वाली पूजा-सेवा की जानकारी तक उपलब्ध करवाई है। इसके साथ ही कुछ सेवायतों ने तो श्रद्धालुओं को ई-पूजा का भी अनूठा विकल्प दिया है। ताकि वे घर बैठे ही आराध्य की सेवा-पूजा कर सकें। इसके लिए श्रद्धालु को सेवायत द्वारा तैयार करवाई गई वेबसाइट पर दिए नंबरों पर संपर्क स्थापित करना है। वेबसाइट पर दी गई पूजा-सेवा के संबंध में सेवायत को अपनी बुकिंग करानी है और फिर सेवायत श्रद्धालु के संकल्प को पूरा करने का भरोसा दिलाता है। हालांकि इसके लिए उचित दान-दक्षिणा भी जरूर ली जा रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि ई-पूजा की बुकिंग करवाने वाले श्रद्धालुओं को आराध्य के आनलाइन दर्शन भी कराए जा रहे हैं। जो ठाकुरजी की आरती से लेकर दर्शन तक के वायरल हो रहे वीडियो से प्रमाण भी मिलता है। जबकि ठा. बांकेबिहारी मंदिर की परंपरा में इस तरह की पूजा-सेवा का कोई प्रविधान ही नहीं है। इस तरह की एक दो नहीं बल्कि दर्जनों वेबसाइट संचालित हो रही हैं। इनमें न केवल बांकेबिहारी के सेवायत बल्कि दूसरे लोग भी आराध्य की सेवा-पूजा के नाम पर श्रद्धालुओं से संपर्क साधे हुए हैं।

बांकेबिहारी की ई-पूजा के विकल्प

वेबसाइट पर दी गई ई-पूजा में दान, फूलबंगला की बुकिंग के अलावा अखण्ड दीपक, प्रातःकाल देहली पूजन, श्रीचरण पूजन, गुलाब जल से निजमहल (गर्भगृह) का प्रक्षालन एवम् ठा. बिहारीजी महाराज का स्नान, स्नान से पूर्व ठा. बिहारीजी महाराज की इत्र से मालिश तथा पोशाक में इत्र और शयन के पश्चात् ठाकुरजी की इत्र से मालिश, केशरयुक्त चंदन से चर्चित श्रीतुलसीदल-नाम-गोत्र सहित श्रीचरणों में अर्पण, प्रातःकाल उत्यापन भोग (माखन-मिश्री), श्रृंगार आरती एवं राजभोग आरती नाम-गोत्र सहित, सर्दी में खिचड़ी भोग केशर-मेवा युक्त, पोशाक मुकुट-श्रृंगार, स्वर्ण आभूषण एवं चांदी पात्र (बर्तन), श्रृंगार-भोग, सामने के दो दीपक ठा. बिहारीजी महाराज के बाईं व दाईं ओर सेवा। इस तरह की सेवा के विकल्प ई-पूजा में श्रद्धालु को दिए गए हैं।

वेबसाइट पर दिए नंबर पर संपर्क

मंदिर के सेवायतों द्वारा बनाई गई वेबसाइट पर सेवायत का नाम व फोन नंबर दिया गया है। इस नंबर पर कोई भी श्रद्धालु संपर्क स्थापित कर ई-पूजा के लिए अपनी बुकिंग करवा सकता है।

मंदिर की सेवापूजा का पूरा अधिकार सेवायतों को

ठा. बांकेबिहारी मंदिर में गर्भगृह और पूजा-सेवा के बंटवारे, पूजा की विधि पर मंदिर प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। ये सब मंदिर सेवायतों के अधिकार क्षेत्र में है। मंदिर प्रबंधन केवल मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन, व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा-सहूलियत की जिम्मेदारी संभालता है।

वेबसाइट के जरिए इस तरह की पूजा-सेवा की परंपरा मंदिर के किसी भी संविधान में उल्लिखित नहीं है। लेकिन, प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात होने के कारण इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

-मुनीश शर्मा, प्रबंधक: ठा. बांकेबिहारी मंदिर। 

ठाकुर बांकेबिहारी का वीडियो सेवायतों द्वारा वायरल करने को लेकर प्रबंधन ने पूर्व में भी शिकायत की है। यदि कोई ऐसा वीडियो हमारे सामने आता है, तो वायरल करने वाले की जानकारी मिलती है तो हम उसके ऊपर कार्रवाई करेंगे।

मुनीश शर्मा, प्रबंध

Edited By: Tanu Gupta