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    आगरा का वन आवरण स्थिर

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 15 Feb 2022 11:35 PM (IST)

    2019 के मुकाबले वन आवरण व झाड़ीदार क्षेत्र न घटा है और न ही बढ़ा है जिले में पिछले पांच सालों में लगाए गए हैं 1.50 करोड़ पौधे

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    आगरा का वन आवरण स्थिर

    आगरा, जागरण संवाददाता। पिछले पांच साल में 1.50 करोड़ पौधे लगाए गए हैं, लेकिन 2019 के मुकाबले 2021 में भी वनस्थिति रिपोर्ट के मुताबिक वन आवरण स्थिर है। 1.50 करोड़ पौधों से न तो हरियाली बढ़ाई है और न ही वन आवरण घटा है।

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    भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून द्वारा प्रत्येक दो साल के अंतर पर भारत के सभी राज्यों व जिलों के वन आवरण का ब्योरा वन स्थिति रिपोर्ट में प्रकाशित किया जाता है। रिपोर्ट के आधार पर कार्बन स्टाक व वन आवरण के क्षेत्रफल में बढ़त या घटौती का आकलन किया जाता है। आगरा जिले में राज्य सरकार के पौधारोपण अभियान के अंतर्गत 2018 में 20 लाख, 2019 में 28 लाख , 2020 में 38 लाख और 2021 में 45 लाख पौधे लगाए गए। इसके अतिरिक्त समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी हर साल लाखों की संख्या में पौधारोपण का दावा किया जाता है। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2021 छह महीने की देरी से जनवरी 2022 में जारी हुई है। यह रिपोर्ट पिछले साल मई या जून में जारी होनी थी। आगरा टीटीजेड द्वारा निर्धारित मानकों में पीछे

    राष्ट्रीय वन नीति व टीटीजेड में निर्धारित फारेस्ट कवर जिले के कुल क्षेत्रफल का 33.3 प्रतिशत होना चाहिए। जिले में वन आवरण का क्षेत्रफल 33 प्रतिशत के सापेक्ष केवल 6.50 प्रतिशत ही है। बीआरडीएस ने किया तुलनात्मक अध्ययन

    जैव विविधता का अध्ययन करने वाली संस्था बीआरडीएस की टीम ने पिछली तीन रिपोर्ट के अध्ययन में पाया कि वन स्थिति रिपोर्ट - 2017 में आगरा का कुल वन आवरण 272 वर्ग किमी था एवं झाड़ीदार जंगल 64 वर्ग किमी था। 2017 में आगरा के वन आवरण में चार वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई थी। 2019 की रिपोर्ट के अनुसार आगरा का वन आवरण 9.38 वर्ग किमी घटकर 262.62 वर्ग किमी रह गया और झाड़ीदार क्षेत्र बढ़कर 75.14 वर्ग किमी हो गया था। 2021 की रिपोर्ट के अनुसार आगरा के वन आवरण और झाड़ीदार क्षेत्रफल स्थिर बना हुआ है। संस्था के अध्यक्ष डा. केपी सिंह ने बताया कि वन आवरण व झाड़ीदार क्षेत्र न घटा है और न ही बढ़ा है। रिपोर्ट का अध्ययन करने वालों में डा. प्रवीन, निधि यादव, नेहा शर्मा, शिवम, हिमांशी, शमी सैय्यद, पलक और विपिन शामिल हैं।

    2019 की ही रिपोर्ट है, जंगल बनने में आठ से दस साल का समय लगता है। इतनी जल्दी रिपोर्ट में अंतर नहीं दिखता है। 2019 की रिपोर्ट का असर 2023 के बाद की रिपोर्ट में दिखेगा। कई कारण होते हैं, जिनकी वजह से ग्रोथ धीरे होती है।

    अखिलेश पांडेय, डीएफओ