कुत्तों को नसबंदी से मिलेगी निजात, अब मादा में कापर टी लगाने की तैयारी
आगरा में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए नगर निगम नसबंदी कर रहा है। पशु प्रेमियों ने दर्द कम करने के लिए मादा कुत्तों में कॉपर टी लगाने का सुझाव दिया है जिस पर विचार किया जा रहा है। शहर को रैबीज मुक्त करने के लिए टीकाकरण अभियान भी चल रहा है। एक अनुमान के अनुसार शहर में एक लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं।

जागरण संवाददाता, आगरा । आवार कुत्तों के बढ़ते आतंक से निजात के लिए नगर निगम ने निरंतर प्रयास में जुटा है। कुत्तों का नसबंदी कराने की प्रक्रिया चल रही है। पशु प्रेमियों, कुछ चिकित्सकों ने इस दर्द से कुत्तों को निजात दिलाने के लिए मादा में कापर टी का प्रयोग करने का सुझाव दिया है।
इसके लिए पशु कल्याण विभाग वैटनरी कालेजों के वैज्ञानिकों से सलाह ले रहा है। साथ ही प्रयोग के लिए शासन को भी लिखा जा रहा है। वहीं शहर को रैबीज फ्री बनाने के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी दो वर्ष से चल रही है।
शहर में एक लाख से अधिक कुत्ते
शहर में एक लाख से अधिक आवारा कुत्तों का आतंक है। इनके वैक्सीनेशन के लिए तीन वर्षीय विशेष अभियान चल रहा है, जिससे आगरा को रैबीज फ्री बनाया जा सके। इसके बाद भी आतंक निरंतर बढ़ रहा है। गलियों, कालोनियों और मुख्य मार्ग पर वाहनों के पीछे रात में दौड़ लगाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन सवार आए दिन चोटिल भी हो जाते हैं। ताजमहल पहुंचने वाले पर्यटक भी कई बार इनका शिकार होते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि धूमिल होती है।
नगर निगम कुत्तों की नसबंदी करा रहा है, लेकिन ये एक दर्द भरी प्रक्रिया है, जिस पर पशु प्रेमी प्रजनन रोकने के दूसरे माध्यम अपनाने की बात कह रहे हैं। नसबंदी के लिए जलेसर रोड पर 1.65 करोड़ रुपये से एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर तैयार हो गया है। 1500 कुत्तों की प्रति माह नसबंदी होती है। अब इसकी जगह कापर टी लगाने की योजना चल रही है। ये मादा में लगाई जाएगी, लेकिन कितने उपयोगी होगी, इस पर विशेषज्ञों से वार्ता चल रही है।
खूंखार कुत्तों को रखा जाएगा शेल्टर में
जिला अस्पताल में भी प्रतिदिन 350 से 400 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं। न्यायालय के पुराने आदेश के कारण कि कुत्तों का डोमिसायल चेंज नहीं हो सकता है। कुत्तों को शेल्टर होम में भी नहीं रखा जा सकता था। अब खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था होनी है, लेकिन इनकी पहचान में बड़ी कठिनाई आएगी।
वर्ष में दो बार होती है गर्भवती
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डा. अजय कुमार ने बताया कि एक कुतिया एक बार में 16 बच्चे तक देती है और वर्षभर में दो बार प्रजनन कर सकती है। 60 दिन का गर्भधारण करती है। छह से 10 महीने में कुत्ता ब्रीडिंग के लिए तैयार हो जाता है।
ये है आंकड़ा
आवारा कुत्ते, 1.10 लाख
प्रति माह नसबंदी, 1500
वैटरनी कालेजों के वैज्ञानिकों से वार्ता चल रही है। पशु प्रेमियों के आग्रह पर इसे प्रयोग के तौर पर कापन टी को अपनाने का प्रयास है। मादा कुत्ता वर्ष में दो बार हीट पर आती है, इसलिए इसकी सफलता पर चर्चा हो रही है। -डॉ. अजय कुमार, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
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