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आगरा किला: फिर से मुगल काल जैसी दिखेगी हाथी गेट की 22 फीट ऊंची दीवार, 60 लाख की लागत से काम शुरू

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:17 AM (IST)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आगरा किला के हाथी गेट पर खाई की बाहरी दीवार का संरक्षण कार्य शुरू किया है। ...और पढ़ें

आगरा किला।

आगरा किला।

HighLights

  1. हाथी गेट पर खाई की बाहरी दीवार का संरक्षण शुरू।

  2. 22 फीट ऊंची दीवार के क्षतिग्रस्त हिस्से सहेजे जाएंगे।

  3. 60 लाख रुपये की लागत, छह माह में पूरा होगा।

जागरण संवाददाता, आगरा। आगरा किला में हाथी गेट के पास खाई की बाहरी दीवार का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने शुरू किया है। खाई में भरा मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त 40 मीटर और 22 मीटर लंबी दीवार को मूल स्वरूप में सहेजा जाएगा। दीवार करीब 22 फीट ऊंची है। इस पर करीब 60 लाख रुपये व्यय होंगे और छह माह का समय लगेगा।

मुगल काल में बाहरी खाई में पानी भरा रहता था, जिससे दुश्मन सैनिक अंदर नहीं आ सकें। आगरा किला का उल्लेख सबसे पहले 11वीं शताब्दी में गजनी की सेना के आक्रमण के समय मिलता है। 

22 फीट ऊंची दीवार को दो जगह मूल स्वरूप में सहेजा जाएगा

वर्तमान किले का निर्माण अकबर ने वर्ष 1565 से 1573 के मध्य कराया था। जहांगीर के समय सफेद चूने के प्लास्टर का काम हुआ और शाहजहां के समय संगमरमर से भवनों का निर्माण हुआ। औरंगजेब यहां अधिक समय नहीं रहा। आगरा किला में सुरक्षा की दृष्टि से दोहरी खाई है। बाहरी खाई में पानी भरा रहता था और अंदर वाली खाई में हिंसक जानवर रहते थे।

आगरा किला के बाहर स्थित खाई की बाहरी दीवार कई जगहों पर टूट गई है। दीवार देखकर प्रतीत होता है कि समय-समय पर इसकी मरम्मत की जाती रही है। दीवार में लाखौरी ईंटों के अलावा पत्थरों के टुकड़े और ब्रिटिशकालीन ईंटें भी लगी हुई हैं।

अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. स्मिथा एस. कुमार ने बताया कि हाथी गेट के पास खाई की बाहरी दीवार के संरक्षण को मलबा हटाने का काम शुरू करा दिया गया है। दीवार को मूल स्वरूप में सहेजा जाएगा।

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चार से से केवल एक गेट से प्रवेश

आगरा किला में मुगल काल में चार गेट थे। इनमें से दिल्ली गेट से शहंशाह, शाही परिवार के सदस्य, दरबारी प्रवेश करते थे। यह वर्तमान में सेना के नियंत्रण क्षेत्र में है। हाथी गेट और वाटर गेट (खिज्र दरवाजा) ब्रिटिश काल में बंद कर दिए गए थे। वर्तमान में किले में अमर सिंह गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश मिलता है।

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