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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महिला डाक्टर बनीं 'भगवान', मुंह से सांस देकर बचाई जान

By JagranEdited By:
Published: Tue, 15 Mar 2022 06:00 AM (IST)

प्रशंसनीय चिकित्सक ने नहीं टूटने दी नवजात कन्या की सांसों की डोर एत्मादपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुए प्रसव का वीडियो वायरल

महिला डाक्टर बनीं 'भगवान', मुंह से सांस देकर बचाई जान
महिला डाक्टर बनीं 'भगवान', मुंह से सांस देकर बचाई जान

जागरण टीम, आगरा। कोरोनाकाल में तड़पती जिदगी को दम तोड़ते सभी ने देखा है। चंद नोटों की खातिर मानवता भूले कुछ डाक्टरों की अमानवीयता से जब-तब इस पेशे पर सवाल खड़े होते रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि डाक्टर को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता। एत्मादपुर में प्रसव के बाद नवजात शिशु को मुंह से सांसें देकर उसके जीवन की ज्योति को बुझने से बचाने वाली महिला चिकित्सक डा. सुरेखा चौधरी ने इसे सच साबित कर दिखाया।

एत्मादपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बुर्जगंगी निवासी खुशबू को आठ मार्च को प्रसव पीड़ा होने पर आशा सुशीला ने भर्ती कराया था। खुशबू ने बेटी को जन्म दिया लेकिन नवजात सांस नहीं ले पा रही थी डा. सुरेखा चौधरी ने मशीन से आक्सिजन देने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। फूल सी बेटी की सांसों की डोर टूटती, इससे पहले ही महिला चिकित्सक ने मुंह से सांस देना शुरू कर दिया। स्टाफ द्वारा मोबाइल से बनाए गए वीडियो में डा. सुरेखा खून से लथपथ नवजात को मुंह से सांस देने और उसके सीने पर पंप कर दिखाई दे रही हैं। किलकारी मारते ही चिकित्सक की आंखों में जंग जीतने जैसी चमक थी वहीं प्रसूता की आंखों में खुशी के आंसू। यह वीडियो सोमवार सुबह इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो देखने के बाद लोग महिला चिकित्सक की प्रशंसा कर रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डा. संजीव वर्मा ने बताया कि खुशबू का यह पहला प्रसव था। अब जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हमारे लिए भगवान हैं डाक्टर मेडम

चिकित्सक की नेकदिली की कायल खुशबू कहती हैं, डाक्टर मेडम हमारे लिए भगवान हैं। उनकी वजह से मेरी बेटी की जान बच सकी और आज हमारे आंगन में खुशियां हैं। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के बाद प्रयास करतीं महिला चिकित्सक का उन्होंने तभी शुक्रिया किया था। यही मेरा कर्तव्य: डा. सुरेखा

डा. सुरेखा का कहना है कि 22 वर्षीय खुशबू का पहला प्रसव था। जन्म के बाद बेटी की सांसें नहीं चल रही थीं। थोड़ी देर के प्रयास के बाद उसकी सांस लौट आई। बच्ची का वजन कम था लेकिन अब दोनों स्वस्थ हैं। वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों के फोन आ रहे हैं। मुझे बधाई दे रहे हैं। मैं भी एक मां हूं। महिला के जीवन में बच्चे की क्या महत्ता है, इसका भान है। पेशे से चिकित्सक होने के नाते यही मेरा कर्तव्य है।

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