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    अमेरिका के बाद भारत ने बनाया ऐसा पैराशूट, दुर्गम इलाकों में मानव रहित कर सकता है लैंडिंग, और भी हैं कई खूबियां

    एडीआरडीई ने विकसित किया देश का पहला मानव रहित स्वदेशी पैराशूट। दुनिया में सिर्फ अमेरिका के पास है यह पैराशूट 500 किग्रा वजन के सैन्य उपकरण उठाने में सक्षम। पहाड़ी इलाकों में उतारे जा सकेंगे विस्‍फोटक और हथियार। मलपुरा ड्रापिंग जोन में सीएडीएस-500 का किया गया सफल परीक्षण।

    By Prateek GuptaEdited By: Updated: Wed, 22 Dec 2021 09:02 AM (IST)
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    एडीआरडी द्वारा बनाए गए सीएडीएस 500 पैराशूट का परीक्षण मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में करते एयरफोर्स के जवान।

    आगरा, अमित दीक्षित। पहाड़ी क्षेत्र हो या फिर रतीली जमीन। भारतीय जवानों को युद्ध के दौरान सैन्य उपकरण पहुंचाने में दिक्कत नहीं होगी। हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) ने देश का पहला मानव रहित स्वदेशी पैराशूट विकसित किया है। यह कंट्रोल्ड एरियल डिलीवरी सिस्टम-500 (सीएडीएस) है। शनिवार को एएन-32 विमान से पांच हजार मीटर की ऊंचाई से इस सिस्टम का मलपुरा ड्रापिंग जोन में सफल ट्रायल किया गया। एडीआरडीई वैज्ञानिकों का दावा है कि दुनिया में अमेरिका के पास ही यह सिस्टम है।

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    एडीआरडीई के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एके सक्सेना ने बताया कि अभी तक मानव रहित स्वदेशी सिस्टम नहीं था। जिसे देखते हुए इस तरीके का सिस्टम विकसित किया गया है। सिस्टम का वजन 15 किग्रा है। इसमें एक ही पैराशूट का इस्तेमाल किया गया है। इस सिस्टम में वे प्वाइंट नेवीगेशन लगा हुआ है जिसमें हेडिंग सेंसर के माध्यम से कितना भी खराब मौसम हो या फिर तेज हवा चल रही हो। सटीक जगह पर ही इसकी लैंडिंग होती है। सैन्य उपकरण को प्लेटफार्म के ऊपर रखा जाएगा। इन सबक का वजन 500 किग्रा से अधिक नहीं होना चाहिए।

    परीक्षण में मानव रहित जंपिंग पैराशूट के सफल होने पर खुशी जताते वायु सैनिक और एडीआरडीई के वैज्ञानिक। 

    11 पैराट्रूपर्स ने भी लगाई छलांग : शनिवार को मलपुरा ड्रापिंग जोन में एएन-32 विमान से सीएडीएस-500 के साथ ही 11 पैराट्रूपर्स ने भी छलांग लगाई। इसकी अगुवाई कर्नल संदीप प्रताप ने किया। मुख्य टेस्ट जंपर विंग कमांडर लोकेश भी शामिल रहे। सिस्टम का डिजाइन वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष भटनागर, अजीत गौड़, ले. कर्नल अनुज कुमार ने तैयार किया है।

    100 बार हो सकेगा प्रयोग : सीएडीएस-500 की लाइफ सौ लैंडिंग की है। इसके बाद इसका प्रयोग बंद कर दिया जाएगा। उन्नत किस्म के वर्जन को भी विकसित किया जा सकता है।

    इसलिए सिस्टम की पड़ी जरूरत : भारत ने पाकिस्तान और चीन के साथ हुए युद्धों से सबक लिया है। युद्ध में अक्सर रसद सामग्री या फिर सैन्य उपकरणों की कमी हो जाती है। इसका असर सीधे सैनिकों पर पड़ता है। सैनिकों को किसी तरीके की कमी न हो, इसके लिए सीएडीएस-500 को विकसित किया गया है।

    सीएडीएस-1000 पर चल रहा कार्य : एडीआरडीई की टीम सीएडीएस-1000 को विकसित कर रही है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि एक हजार किग्रा का वजन लेकर कहीं पर भी उतर सकता है।