आइये.. और शौक से ले जाइये तेजाब!
जागरण संवाददाता, आगरा:
केस एक: 29 जून को ताजगंज की रहने वाली छब्बीस वर्षीय रेखा समेत परिवार के चार लोगों पर उसकी बहन के देवर ने तेजाब उड़ेल दिया। गंभीर रूप से झुलसी रेखा ने दम तोड़ दिया। केस दो: तीन जून 2009। भरी दुपहरी एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंटीन में पहुंचे सिरफिरे ने तेजाब फेंका। कई झुलसे।
ये दो वारदातें महज बानगी है उस मौत के सामान की, जो शहर में खुलेआम बिकता है। वारदात-दर-वारदात हो रही हैं। केन्द्र सरकार भी प्रदेश सरकार से पूछ रही है कि खुल्लम-खुल्ला तेजाब कैसे बिक रहा है, लेकिन सब कुछ आज भी धड़ल्ले से हो रहा है। न इजाजत और न ही लाइसेंस, कहीं-कहीं तो फड़ लगकर तेजाब बेचा जा रहा है।
मजे की बात तो ये है कि शहर में तेजाब का आयात करने वाली चंद एजेंसियों पर ही लाइसेंस है। ये एजेंसियां कॉलेज लैब, डेयरी लैब और ज्वैलरी एवं पार्ट्स को साफ करने के लिए ही सप्लाई करती हैं। ये फुटकर दुकानदारों तक कैसे पहुंच रहा है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सूत्र बताते हैं शहर में करीब सौ से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों पर चोरी का तेजाब बेचा जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक तेजाब तीन तरह का होता है। इसे शहर में आयात करने के लिए करीब 15-16 एजेंसियों के पास लाइसेंस हैं, लेकिन ये एजेंसी किसी भी फुटकर दुकानदार को तेजाब नहीं बेचतीं। इसके बावजूद सैकड़ों लीटर तेजाब रोजाना शहर में बिक रहा है। यहीं से कुछ अपराधी भी तेजाब खरीदकर दुस्साहसिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
नमक के तेजाब के नाम से पहचाना जाने वाला हाइड्रो क्लोरिक एसिड (एचसीएम) अमूमन किसी भी पार्ट्स से चिकनाई आदि खत्म करने के लिए काम आता है। ये जानलेवा तो नहीं होता लेकिन आंखों के लिए काफी खतरनाक है। सल्फ्यूरिक एसिड यानी गंधक का तेजाब मुख्यत: पीतल की ज्वैलरी, बर्तन और मूर्तियों को साफ करने में इस्तेमाल होता है। साथ ही कॉलेज और डेयरी लैब में भी खास जरूरत पड़ती है।
इनमें से सबसे खतरनाक है नाइट्रिक एसिड। इसकी सप्लाई सोना, चांदी और कॉपर को चमकाने के लिए की जाती है, लेकिन किसी न किसी तरह यह अराजक तत्वों तक पहुंच रहा है, जिससे वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। गंभीर घटनाओं के बावजूद प्रशासन इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
ये हैं बिक्री के ठिकाने
शहर में किनारी बाजार, रावतपाड़ा, नमक की मंडी, माल का बाजार, बेलनगंज, संजय प्लेस, लोहामंडी, शाहगंज, सेंट जोंस चौराहा, मंटोला, एत्मादपुर आदि प्रमुख हैं। खास बात ये है कि तेजाब की भले ही 100 से अधिक दुकानें हों लेकिन खतरनाक नाइट्रिक एसिड सिर्फ 24-25 दुकानों पर ही बेचा जाता है।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।