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घर के 'दीपक' को जलाए रखने के लिए 70 वर्ष के पिता ने दान किया गुर्दा, आगरा SN में एल्पोर्ट सिंड्रोम पीड़ित बेटे का ट्रांसप्लांट

Published: Mon, 12 Oct 2026 02:31 PM (IST)

Agra News: आगरा में 70 वर्षीय पिता ने अपने बेटे को गुर्दा दान कर जीवनदान दिया, जिसने पहले ही गुर्दे ...और पढ़ें

आगरा:एसएन मेडिकल कालेज में गुर्दा प्रत्यारोपण करने वाली टीम। सौजन्य एसएन

आगरा:एसएन मेडिकल कालेज में गुर्दा प्रत्यारोपण करने वाली टीम। सौजन्य एसएन

HighLights

  1. 70 वर्षीय पिता ने अपने बेटे को गुर्दा दान किया।

  2. एल्पोर्ट सिंड्रोम पीड़ित 24 वर्षीय बेटे का प्रत्यारोपण।

  3. एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में सफल 6.5 घंटे की सर्जरी।

जागरण संवाददाता, आगरा। गुर्दे की अनुवांशिक बीमारी से दो बेटों को खो चुके बुजुर्ग पिता ने घर का दीपक जलाए रखने के लिए चिकित्सकों के मना करने पर भी गुर्दा दान किया। 70 वर्ष की आयु में गुर्दा देने के खतरे के बारे में चिकित्सकों ने उन्हें समझाया लेकिन वे नहीं माने।

एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आरएमएल, दिल्ली की टीम के साथ चिकित्सकों की टीम ने गुर्दा प्रत्यारोपण किया, गुर्दा दान करने वाले की उम्र अधिक होने के कारण साढ़े छह घंटे प्रक्रिया चली। यह एसएन का दूसरा गुर्दा प्रत्यारोपण है।

राजवीर के हैं तीन बेटे और तीन बेटियां

राजाखेड़ा, धौलपुर के रहने वाले राजवीर के तीन बेटे और तीन बेटियां हैं, सबसे छोटे बेटे 24 वर्ष के दीपक के दोनों गुर्दे खराब थे, तीन वर्ष से डायलिसिस हो रही थी। उनके बड़े बेटे मनोज की 2018 और मझले बेटे सतीश की 2022 में गुर्दे खराब होने से मृत्यु हो गई थी।

deepak family small

एसएन में गुर्दा प्रत्यारोपण कराने वाले दीपक मध्य में उन्हें गुर्दा देने वाले पिता राजीवर बाएं और मां भूरी देवी दाएं। सौजन्य एसएन।

एसएन में अनुवांशिक एल्पोर्ट सिंड्रोम से पीड़ित 24 वर्ष के मरीज का किया गया गुर्दा प्रत्यारोपण

नेफ्रोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि मरीज को अनुवांशिक एल्पोर्ट सिंड्रोम है, यह अनुवांशिक बीमारी है इसमें मां करियर होती है और बेटों को बीमारी हो सकती है बेटियों में बीमारी नहीं होती है। इसमें कोलोजन प्रोटीन में म्यूटेशन हो जाता है और गुर्दे, आंख खराब हो सकती हैं।

एल्पोर्ट सिंड्रोम के बारे में

एल्पोर्ट सिंड्रोम के कारण दीपक को उनकी मां, बहन और ननिहाल के रिश्तेदार गुर्दा दान नहीं कर सकते थे। उनके पिता 70 वर्ष के राजवीर ने गुर्दा देने के लिए कहा, जबकि 65 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति का ही गुर्दा लिया जाता है, जिससे गुर्दे की गुणवत्ता भी अच्छी हो और गुर्दा दान करने के बाद समस्या ना आए। समझाने के बाद भी वे नहीं माने, भावुक हाे गए। इसके बाद जांच कराई गई। गुर्दे की गुणवत्ता अच्छी होने सहित अन्य जांच ठीक होने पर शनिवार सुबह 11 30 बजे गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू किया गया।

65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का नहीं लिया जाता है गुर्दा, दो बेटों की हो चुकी है मृत्यु

एसएन के यूरोलाजिस्ट डॉ. अभिषेक पाठक को दानदाता की आयु अधिक होने के कारण प्रक्रिया पूरी करने में समय ज्यादा लगा और शाम 5 30 बजे गुर्दा प्रत्यारोपण पूरा हुआ। दीपक और राजवीर दोनों की ठीक हैं। प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने बताया कि असाध्य रोग निधि से निश्शुल्क गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया है। लखनऊ और दिल्ली की टीम के मार्गदर्शन में हर महीने दो गुर्दा प्रत्यारोपण किए जाएंगे।

इनका रहा सहयोग

आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली के यूरोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. हेमंत गोयल,नेफ्रोलाजी विभाग के डॉ. मुदित खुराना, डॉ.कैरवी भारद्वाज, यूरोलाजी विभाग के डॉ. प्रशांत लवानिया, डॉ. अभिषेक पाठक,( लीड ट्रांसप्लांट सर्जन ) डॉ. विजय त्यागी, डॉ. अंकुश गुप्ता, डॉ. प्रदीप देब, एनेस्थीसिया विभाग की टीम के डॉ. अपूर्व मित्तल, एडा. अमृता गुप्ता, डॉ. प्रवीण पांडे, डॉ. प्रभा, प्रदीप त्यागी आदि का सहयोग रहा।

गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए ये है प्रक्रिया

  • गुर्दे खराब होने पर डायलिसिस करा रहे मरीज एसएन की ओपीडी में पंजीकरण करा सकेंगे
  • मरीज और गुर्दा दान करने वाले स्वजन की जांच की जाएगी
  • एसएन का पैनल मरीज और दानदाता के दस्तावेजों और चिकित्सकीय जांच को देखकर अनुमति देगा
  • स्वास्थ्य विभाग के पैनल से अनुमति ली जाएगी
  • मरीज और दानदाता का पुलिस से सत्यापन कराया जाएगा

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