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    कानून की धार, नियम तोड़ रहा पशु व्यापार

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 20 Jun 2017 01:03 AM (IST)

    जागरण संवाददाता, आगरा: पशुओं की बिक्री के लिए बना नया कानून किसानों और व्यापारियों के लिए मुश्किल बन

    कानून की धार, नियम तोड़ रहा पशु व्यापार

    जागरण संवाददाता, आगरा: पशुओं की बिक्री के लिए बना नया कानून किसानों और व्यापारियों के लिए मुश्किल बनने लगा है। कुछ बाजारों में खरीद-बिक्री डर-डर कर हो रही है। हाटों में ज्यादा उम्र के पशुओं की बिक्री तो बहुत कम हो गई है, इसकी जगह सीधे घर से खरीद-फरोख्त हो रही है।

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    केंद्र सरकार ने पशु बाजार में पशुओं पर होने वाली क्रूरता और गोवध रोकने के लिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत नया नोटिफिकेशन जारी किया है। बाजार में खरीद करने आने वाले हर किसान, व्यापारी को लिखित में देना होगा कि वे खरीदे गए मवेशी का प्रयोग खेती, दुग्ध या घरेलू काम के लिए करेंगे। खरीद से पहले क्रेता-विक्रेता दोनों को परिचय पत्र के साथ ही स्वामित्व का दस्तावेज भी अपने पास रखना होगा। नियम के तहत खरीदे गए पशु को छह माह के भीतर पुन: नहीं बेचने की बाध्यता भी है।

    नये नियम को किसान अव्यावहारिक बता रहे हैं। बाह निवासी रमेश कहते हैं कि अनपढ़ किसान लिखत-पढ़त कैसे करेंगे। जो पशु दूध नहीं दे रहा होगा, उसे पैंठ में बेचने में कोई एतराज नहीं होना चाहिए। चौकड़ा निवासी श्रीकृष्ण चेतन चौहान कहते हैं कि चारा बहुत महंगा है, आखिर अनुपयोगी भैंस वंश के पशुओं का किसान भार कैसे उठा सकेंगे।

    फतेहाबाद निवासी हाकिम सिंह कहते हैं कि नया नियम कड़ाई से लागू हो जाएगा तो दिक्कतें आएंगी। इससे तो पशु बाजार ही बंद हो जाएंगे।

    फतेहाबाद, बैनई और बाह क्षेत्र में सज रहे बाजार

    कागजों पर नियम तैयार हैं, लेकिन लागू कराने के लिए अधिकारी गंभीर नहीं है। कुछ स्थानों पर उत्पीड़न की शिकायतें जरूर आ रही हैं। बाह के प्यारमपुर में शनिवार को पशु बाजार सजता है, यहां पर नए नियमों का कोई असर नहीं है। फतेहाबाद क्षेत्र में गढ़ी उदयराज में बुधवार को, धिमश्री में रविवार को बाजार सजता है। सभी में हजारों की संख्या पशु आते हैं। फतेहाबाद क्षेत्र के बाजार राजस्थान और बाह के बाजार मप्र के निकट है। नियम संशोधन के बाद भी यहां बिना दस्तावेज के खरीद-फरोख्त हो रही है। जबकि नियम ये है कि राज्यों की सीमा के 25 किलोमीटर के दायरे में पशु बाजार नहीं लग सकता।

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    ये पड़ेगा असर

    पशु बिक्री में सख्ती के कारण अनुपयोगी पशुओं की संख्या में इजाफा होगा। इससे जिले में पहले से नील गाय की समस्या झेल रहे किसानों की फसल को ऐसे पशु भी नष्ट करेंगे। इसके साथ ही चमड़ा व्यापार भी प्रभावित होगा।

    ये है दुधारू पशुओं की संख्या

    वर्ष 2012 में हुई गणना के अनुसार जिले में दूधारू गायों की संख्या साठ हजार और भैंसों की संख्या 4.94 लाख है।