आगरा में 12वीं पास बांट रहा था सरकारी नौकरी: DGP के पीआरओ का मित्र बता बेरोजगारों से ठगे 1.25 करोड़
Agra News: आगरा में डीजीपी के पीआरओ का दोस्त बनकर एक ठग ने आठ बेरोजगारों से सवा करोड़ रुपये से ...और पढ़ें

Agra News: इंसेट में आरोपित।
HighLights
डीजीपी पीआरओ का दोस्त बनकर की ठगी
आठ बेरोजगारों से सवा करोड़ रुपये ठगे
आरोपी वीरू शर्मा गिरफ्तार, भेजा गया जेल
जागरण संवाददाता, आगरा। Agra News: पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पीआरओ का मित्र बनकर ठग ने आठ बेजरोजगारों से सवा करोड़ रुपये की ठगी कर ली। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और युवा कल्याण समेत कई विभागों में सेटिंग बताकर युवाओं को जाल में फंसाने वाला शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के पास से मिले मोबाइल और उससे पूछताछ में पुलिस को कई युवाओं से ठगी के सुराग मिले हैं।
एकता थाना क्षेत्र शमसाबाद रोड स्थित रौनक एन्क्लेव निवासी वीरू शर्मा के विरुद्ध साइबर क्राइम थाने में अरविंद सक्सेना ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।
प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका अरविंद की पत्नी सुनीता सक्सेना की बीएलओ के कार्य के दौरान आरोपित वीरू शर्मा से मुलाकात हुई थी। उसने पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक (लिपिक) की नौकरी लगवाने के नाम पर दंपती से 13.25 लाख रुपये ठग लिए थे।
पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल एवं युवा कल्याण विभाग में नौकरी के नाम पर की ठगी
आरोपित ने डीजीपी के पीआरओ से अपनी पहचान बताते हुए राज शर्मा नाम के युवक से फोन पर पीड़ित की बात कराई थी। रकम लेने के बाद परीक्षा परिणाम की फर्जी पीडीएफ वाट्सएप पर भेज दी। जबकि वेबसाइट पर जारी परिणाम में नाम नहीं होने पर छानबीन की तो धोखाधड़ी का पता चला। आरोपित वीरू शर्मा से पूछताछ में पता चला कि अरविंद सक्सेना के अलावा सात अन्य लोगों को भी सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगा था। लोगों से की गई ठगी की रकम सवा करोड़ रुपये से अधिक है।
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गिरफ्तार आरोपित वीरू शर्मा ने आठ लोगों से ठगी करना किया स्वीकार किया, जेल भेजा
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य ने बताया कि आरोपित ने बेरोजगारों से यह रकम पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सचिवालय, मेट्रो, धौलपुर में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय समेत अन्य विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी थी। 12वीं पास वीरू के साथ एक अन्य युवक भी था। वह पहले भरोसा जीतते थे। इसके बाद नौकरी लगवाने का झांसा देकर रकम ले लेते थे।
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फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी युवाओं को दे देते थे। ज्वाइन करने पहुंचने पर मामला खुलता था। आरोपित के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में कूटरचित प्रपत्र तैयार करना, कूटरचित प्रपत्र में इलेक्ट्रानिक अभिलेखों के प्रयोग की धारा बढ़ाई है। आरोपित को जेल भेजा गया है।
