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    Earth Day 2023: कितनी सुरक्षित है धरती को बचाने वाली ओजोन परत, ऐसे करती है खतरनाक यूवीए किरणों से बचाव

    By Anand PandeyEdited By: Anand Pandey
    Updated: Fri, 21 Apr 2023 11:15 AM (IST)

    What is Ozone Layer Description Importance and Sources ओजोन रिक्तीकरण की प्रक्रिया प्राकृतिक नहीं है और इसके लिए एक बड़े हिस्से के लिए मनुष्य जिम्मेदार हैं। काफी हद तक ओजोन की कमी ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) के उपयोग के माध्यम से होती है। (फाइल फोटो जागरण )

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    What is Ozone Layer, Definition, Significance, Formation everything you should know

    नई दिल्ली, टेक डेस्क। ओजोन परत वायुमंडल में मात्र 3mm का कवच है, जो पृथ्वी पर पनप रहे जीवन को सूर्य से आने वाली हानिकारक यूवी किरणों से बचाता है। जब वायुमंडल में कुछ स्थानों पर ओजोन परत पतली हो जाती है, तो उस परत की कमी को ओजोन छिद्र कहा जाता है।

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    इसमें वायुमंडल के अन्य भागों की तुलना में ओजोन O3 की उच्च सांद्रता है, लेकिन समताप मंडल में अन्य गैसों की तुलना में यह बहुत कम है। आइये आपको डिटेल से समझाते हैं कि ओजोन परत क्या होती है, ये कैसे काम करती है।

    ओजोन परत खराब होने के पीछे कारण

    ओजोन रिक्तीकरण की प्रक्रिया प्राकृतिक नहीं है और इसके लिए एक बड़े हिस्से के लिए मनुष्य जिम्मेदार हैं। काफी हद तक, ओजोन की कमी ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) के उपयोग के माध्यम से होती है, जिसमें हैलोन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन और मिथाइल क्लोरोफॉर्म जैसी गैसें शामिल हैं। ये पदार्थ एसी, रेफ्रिजरेटर और कीटनाशकों में पाए जा सकते हैं। 

    ओजोन परत क्यों है जरूरी

    ओजोन परत, पूरी तरह या आंशिक रूप से, हमें- यूवी, ए, बी और सी से बचाती है। जबकि संपूर्ण यूवीसी और कुछ यूवीबी ओजोन परत और वातावरण द्वारा अवशोषित होते हैं, यूवीए हमारे ग्रह के लिए अपना रास्ता बनाता है। मनुष्यों को विटामिन डी उत्पन्न करने के लिए यूवीबी की आवश्यकता होती है, लेकिन इन किरणों की अधिकता गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है और इसके परिणामस्वरूप फसल की उपज भी कम हो सकती है।

    मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?

    मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जिसे 1987 में अंतिम रूप दिया गया था, ओजोन क्षयकारी पदार्थों (ODS) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध करके ओजोन परत की रक्षा के लिए एक वैश्विक समझौता है। ओजोन सचिवालय के कार्यकारी सचिव के अनुसार, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने एक उभरती हुई पर्यावरणीय आपदा से सफलतापूर्वक निपटा है। 

    मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ऐसे कर रहा मदद

    वैज्ञानिकों के अनुसार, आज 99 प्रतिशत से अधिक ओजोन-क्षयकारी पदार्थ समाप्त हो चुके हैं और ओजोन परत ठीक होने की राह पर है। उनके अनुसार, 2060 के दशक तक ओजोन छिद्र नहीं रहेगा, हालांकि, यह इस तथ्य को दूर नहीं करता है कि अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

    ओजोन परत से होने वाले नुकसान

    जानवरों में पराबैंगनी किरण के सीधे संपर्क में आने से त्वचा और आंखों का कैंसर होता है। ओजोन परत की कमी के कारण मनुष्य सीधे सूर्य से हानिकारक पराबैंगनी किरण के संपर्क में आ जायेगा। इससे त्वचा रोग, कैंसर, सनबर्न, मोतियाबिंद, तेजी से बुढ़ापा हो सकता है। हानिकारक पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने से प्लैंकटन को बहुत नुकसान होता है। यदि प्लवक समाप्त हो जाते हैं, तो निचली खाद्य श्रृंखला में मौजूद प्रजातियां भी प्रभावित हो सकती हैं।