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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मस्क क्री क्रांतिकारी योजना, महज 30 मिनट में दिल्ली से पहुंच सकेंगे अमेरिका, स्पेसक्राफ्ट से होगा धरती पर सफर

Published: Sun, 17 Nov 2024 01:12 PM (IST)Updated: Sun, 17 Nov 2024 01:35 PM (IST)

अभी एक देश से दूसरे देश के किसी शहर में जाने में फ्लाइट से भी घंटों का समय लगता है। ...और पढ़ें

ट्रंप प्रशासन में मस्क की क्रांतिकारी योजना को मंजूरी मिल सकती है।
ट्रंप प्रशासन में मस्क की क्रांतिकारी योजना को मंजूरी मिल सकती है।

HighLights

  1. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ट्रैवल करने के तरीके को जल्द बदल सकती है।
  2. कंपनी के स्पेसक्राफ्ट स्टारशिप के जरिए एक से दूसरे देश एक घंटे से भी कम समय में पहुंचा जा सकेगा।
  3. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में FAA की मंजूरी इस प्रोजेक्ट को मिल सकती है।

 टेक्नोलॉजी डेस्क,नई दिल्ली। Elon Musk का SpaceX हमारे ट्रैवल करने के तरीके को बदल कर रख देने वाला है। कंपनी एक बेहद क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। एलन मस्क की कंपनी की नई योजना के साथ दुनिया भर के प्रमुख शहरों के बीच यात्रियों को एक घंटे से भी कम समय में ट्रैवल करना संभव हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परिकल्पना का केन्द्र बिन्दु स्टारशिप है, जो स्टेनलेस स्टील से बना 395 फुट ऊंचा स्पेसक्राफ्ट है।

अरबपति मस्क और विवेक रामास्वामी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। इस बीच मस्क ने कहा कि उनके स्टारशिप रॉकेट पर 'अर्थ टू अर्थ' स्पेस ट्रैवल की उनकी महत्वाकांक्षी योजना अब डोनाल्ड ट्रम्प के फिर से चुनाव के बाद संभव है।

दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को 30 मिनट में जा सकेंगे

डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेसएक्स द्वारा लगभग एक दशक पहले कल्पना की गई थी कि पृथ्वी पर मौजूद सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप में 1,000 यात्री सवार होंगे और ये ऑर्बिट में ब्लास्ट करेंगे। रिपोर्ट में बताया गया कि अंतरिक्ष में अंधेरे में जाने की जगह स्टारशिप पृथ्वी के साथ-साथ उड़ते हुए दूसरे शहर की यात्रा करेगा।

स्टारशिप लोगों को लॉस एंजिल्स से टोरंटो 24 मिनट में, लंदन से न्यूयॉर्क 29 मिनट में, दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को 30 मिनट में और न्यूयॉर्क से शंघाई 39 मिनट में पहुंचा सकता है। हालांकि, पैसेंजर्स को उड़ान भरने और उतरने के दौरान जी-फोर्स का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, उड़ान के बीच में कम गुरुत्वाकर्षण की स्थिति का मतलब ये भी होगा कि उन्हें सीटबेल्ट बांधकर रखना होगा।

मिल सकती है FAA की मंजूरी

स्पेसएक्स की योजना के बारे में सोशल मीडिया का ध्यान तब गया जब यूजर @ajtourville ने एक्स (पहले ट्विटर) पर अर्थ-टू-अर्थ कॉन्स्पेप्ट का एक प्रमोशनल वीडियो शेयर किया। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि इस प्रोजेक्ट को ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के दौरान फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की मंजूरी मिल सकती है।

मस्क ने दी प्रतिक्रिया

इसी तरह एक एक्स यूजर ने लिखा, 'ट्रंप के अंदर FAA के आने के बाद @स्पेसएक्स के स्टारशिप अर्थ टू अर्थ को भी मंजूरी मिल सकती है। जो धरती पर एक से दूसरे शहर 1 घंटे से कम समय में ले जा सकेगा।' इस पर मस्क ने जवाब दिया, 'यह अब संभव है।'

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