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    Meta Threat Report: चीन से चल रहे थे खालिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स, मेटा की थ्रेट रिपोर्ट में खुलासा

    मेटा की हालिया थ्रेट रिपोर्ट में उन सभी संभावित खतरों के बारे में जिक्र है जिनके जरिए भारत समेत ग्लोबल इंटरनेट यूजर्स को टारगेट किया जा रहा है। इसके साथ ही उनसे कई क्रॉस इंटरनेट कैंपेन का भी पता लगाया है जिन्हें मेटा ने ब्लॉक कर दिया है। एआई जेनरेटेड हमलों को लेकर मेटा ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है।

    By Yogesh Singh Edited By: Yogesh Singh Updated: Fri, 31 May 2024 08:41 PM (IST)
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    हर तीन महीने में मेटा थ्रेट रिपोर्ट जारी करता है।

    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा हर तीन महीने में मेटा थ्रेट रिपोर्ट जारी करता है। हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में मेटा ने लगभग 37 फेसबुक अकाउंट, 13 पेज और 9 इंस्टाग्राम अकाउंट और 5 ग्रुप हटा दिए हैं।

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    जिन पर आरोप है कि ये प्लानिंग के तहत उसकी पॉलिसियों का उल्लघंन कर रहे हैं। कथित तौर पर इन अकाउंट का कनेक्शन चीन से पाया गया है। यह अकाउंट लंबे समय से भारत के खिलाफ ऐसे पोस्ट कर रहे थे।

    मेटा थ्रेट रिपोर्ट की खास बातें

    मेटा की हालिया थ्रेट रिपोर्ट में उन सभी संभावित खतरों के बारे में जिक्र है, जिनके जरिए भारत समेत ग्लोबल इंटरनेट यूजर्स को टारगेट किया जा रहा है। इसके साथ ही उनसे कई क्रॉस इंटरनेट कैंपेन का भी पता लगाया है, जिन्हें मेटा ने ब्लॉक कर दिया है।

    एआई जेनरेटेड हमलों को लेकर मेटा ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है। जेन एआई से बनी फोटो, वीडियो और न्यूज से इंटरनेट और सोशल मीडिया में कई फेक कैंपेन लगाए गए। मेटा कहना है कि उन्होंने आज तक इस तरह के हमले नहीं देखे। इंटरनेट पर फेक कैंपेन चलाने के लिए फेक प्रोफाइल का इस्तेमाल होता है। ये अकाउंट जेनेरेटिव एडवरसराइल नेटवर्क (GAN) द्वारा तैयार किए जाते हैं, जिससे इनके पीछे कौन है यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

    चीन से चल रहे थे खालिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स

    चाइना का एक नेटवर्क इन सब पोस्ट के लिए जिम्मेदार है। इन गतिविधियों के जरिये दुनियाभर की सिख कम्युनिटी को निशाना बनाया जा रहा था। इसमें भारत, कनाडा, पाकिस्तान, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल है।

    यह पोस्ट एक्स (पूर्व में ट्विटर) और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिये किए जा रहे थे। इतना ही नहीं पोस्ट में खालिस्तानियों को समर्थन करने जैसे पोस्ट भी इस दौरान देखे गए। यूजर्स को गुमराह करने के लिए इन अकाउंट्स को क्रिएट किया था।

    ईयू और यूक्रेन भी रहा निशाने पर

    मेटा ने बताया कि यूरोपन यूनियन (ईयू) के संसदीय चुनावों को लेकर चल रही चर्चा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन को मिल रहे समर्थन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। ईयू के संसदीय चुनाव से जुड़ी चर्चा विदेशी थ्रेट्स के फोकस में थी। इनमें डोपेलगैंगर भी शामिल है। मेटा ने फिलहाल ईयू को लेकर चल नेगेटिव कैंपेन, अप्रमाणिक कंटेंट को ब्लॉक किया है। इसके साथ ही क्रोएशिया, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड और इटली से जुड़े कंटेंट भी हटा दिया गया है।

    इसके साथ ही यूक्रेन को मिल रहे अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट को कमजोर करने के चलाए जा कैंपेन को मेटा ने ब्लॉक किया है। मेटा का यह भी कहना है कि उन्हें यूक्रेन के खिलाफ चल रहे कैंपेन रन करने वाले स्पूफ वेबसाइट का किसी न्यूज मीडिया या सरकारी एजेंसी से कोई लिंक नहीं मिला है।

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