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    Internet Explorer Shuts Down- जानिये क्यूँ बंद हो रहा है 15 जून को इंटरनेट एक्सप्लोरर

    By Kritarth SardanaEdited By:
    Updated: Wed, 15 Jun 2022 08:39 AM (IST)

    Microsoft 15 जून को सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र Internet Explorer को बंद कर रही है। लेकिन सवाल ये उठता है जो वेब ब्राउज़र कभी सबसे लोकप्रिय था अब वो कैसे और क्यूँ ऐसे हालात में जा पहुंचा कि इसकी निर्माता कंपनी को इसे बंद करने का फैसला लेना पड़ा।

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    Web Browser Internet Explorer photo- Jagran File Photo

    नई दिल्ली, कृतार्थ सरदाना। Microsoft 15 जून को सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र Internet Explorer को बंद कर रही है। लेकिन सवाल ये उठता है जो वेब ब्राउज़र कभी सबसे लोकप्रिय था अब वो कैसे और क्यूँ ऐसे हालात में जा पहुंचा कि इसकी निर्माता कंपनी को इसे बंद करने का फैसला लेना पड़ा।

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    Internet Explorer के मुक़ाबले में एक तरफ तो पहले से मौजूद नेटस्केप नैविगेटर था ही साथ ही और नए वेब ब्राउज़र भी लॉंच होते रहे। इनमें ओपेरा और सफारी जैसे ब्राउज़र मशहूर होने लगे लेकिन इनके अलावा बाकी बहुत से लॉंच हुए वेब ब्राउज़र कामयाब नहीं हो सके। जिस प्रकार इंटरनेट एक्सप्लोरर के नए वर्जन लॉंच हो रहे थे उसी प्रकार नेटस्केप नैवीगेटर,ओपेरा और सफारी के भी।

    सफारी तो ऐपल ने ही बनाया था इसलिए यह विंडोज यूजर्स के काम का नहीं था। इससे इंटरनेट एक्सप्लोरर का सीधा मुक़ाबला नेटस्केप नैवीगेटर और ओपेरा से था। इस मुक़ाबले में हमेशा इंटरनेट एक्सप्लोरर बहुत आगे रहा। सन 2003 तक 95 प्रतिशत लोग इंटरनेट एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करते थे।

    जब Internet Explorer को लगा पहला झटका

    जब सन 2004 में मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स के नाम से एक नया वेब ब्राउज़र लॉंच हुआ तब इसने इंटरनेट एक्सप्लोरर को पहला झटका दिया। फ़ायरफ़ॉक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर से कुछ तेज़ और अलग था। फ़ायरफ़ॉक्स अपने नए इंटरफेस से लोगों को लुभाने में कामयाब हुआ और कई लोग इंटरनेट एक्सप्लोरर की जगह इसका प्रयोग करने लगे। सन 2007 तक वेब ब्राउज़र के बाज़ार में नेटस्केप नैवीगेटर पूरी तरह दम तोड़ चुका था। ओपेरा चल रहा था लेकिन रेस में मुक़ाबला इंटरनेट एक्सप्लोरर और फ़ायरफ़ॉक्स के बीच ही चल रहा था। हालांकि इंटरनेट एक्सप्लोरर का जलवा तब भी बरकरार था।

    Internet Explorer लोकप्रिय क्यूँ बना रहा

    इंटरनेट एक्सप्लोरर से बेहतर होने के बावजूद भी फ़ायरफ़ॉक्स, हमेशा इंटरनेट एक्सप्लोरर से काफी पीछे रहा। इसका सबसे बड़ा कारण इंटरनेट एक्सप्लोरर की निर्माता कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट ही रही। इंटरनेट पर भी हर कोई अपनी निजता और सुरक्षा चाहता है। यूजर जो कुछ ईमेल के जरिये भेजता है या इंटरनेट पर अपलोड-डाउनलोड करता है वह नहीं चाहता कि यह सब को पता चले। इसके साथ ही हैकर्स, ऑनलाइन बैंकिंग में धोखाधड़ी और सभी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड से वह हमेशा डरता है। अपनी विंडोज से माइक्रोसॉफ़्ट पूरी दुनिया में एक विश्वसनीय ब्रांड बना और यही विश्वास लोगों ने उसके इंटरनेट एक्सप्लोरर में दिखाया। इसी कारण कोई अन्य वेब ब्राउज़र इंटरनेट एक्सप्लोरर से आगे निकलना तो दूर उसके बराबर भी नहीं पहुँच पाता था।

    Internet Explorer का कैसा शुरू हुआ पतन

    अब जरूरत थी एक ऐसे वेब ब्राउज़र की जो इंटरनेट एक्सप्लोरर से बेहतर हो और किसी बड़ी और विश्वसनीय कंपनी ने उसे बनाया हो जिस पर पूरी दुनिया विश्वास कर सके। ये कमी सन 2008 में गूगल ने गूगल क्रोम लॉंच कर के पूरी की। क्रोम, इंटरनेट एक्सप्लोरर के मुक़ाबले बहुत तेज़ और ज्यादा सुरक्षित तो था ही साथ ही इसका बिलकुल नया इंटरफ़ेस लोगों को बहुत पसंद आया। सन 2008 में पूरी दुनिया में गूगल लोकप्रिय हो रहा था। गूगल ने अपने होम पेज के जरिये क्रोम का प्रचार किया जिसमें लिखा होता था क्रोम डाउनलोड कर, फास्ट गूगल सर्च करें। जिस प्रकार विंडोज के जरिये हर कंप्यूटर में इंटरनेट एक्सप्लोरर पहुंचा उसी तरह गूगल सर्च के पेज से ही गूगल क्रोम कंप्यूटर में पहुँचना शुरू हो गया। भारत समेत पूरी दुनिया में लोग धीरे धीरे क्रोम से जुड़ते गए। अब लोगों को इंटरनेट एक्स्प्लोरर का विकल्प मिल चुका था इसलिए लोगों ने इंटरनेट एक्स्प्लोरर की जगह गूगल क्रोम इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। साथ ही मोज़िला फायरफॉक्स को भी इंटरनेट एक्स्प्लोरर के यूज़र्स मिल रहे थे।

    सन 2013 में इंटरनेट एक्सप्लोरर का 11वां और आखिरी वर्जन लॉंच किया गया था जो अभी तक चल रहा है। माइक्रोसॉफ्ट की तमाम कोशिशों के बाद भी यूज़र इंटरनेट एक्स्प्लोरर से क्रोम की ओर जा रहे थे। फिर 2015 में माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी विंडोज 10 के साथ माइक्रोसॉफ्ट एज नाम से एक नया वेब ब्राउज़र निकाल दिया। माइक्रोसॉफ्ट ने एज को विंडोज 10 के साथ देकर इंटरनेट एक्स्प्लोरर जैसी सफलता दोहराने की कोशिश की, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। माइक्रोसॉफ्ट एज में कुछ खामियां थीं जिसे दूर कर अब एज को बेहतर और अच्छा ब्राउज़र बना दिया गया है।

    आज 2022 में मई महीने तक की एक रिपोर्ट अनुसार वेब ब्राउज़र (कंप्यूटर) के बाज़ार में अकेले गूगल क्रोम का 70.67 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट एज का 14.77 प्रतिशत, फायरफ़ॉक्स का 4.86 प्रतिशत हिस्सा,इंटरनेट एक्स्प्लोरर का 1.53 प्रतिशत, सफारी का 2.63 प्रतिशत और ओपेरा का 1.40 प्रतिशत हिस्सा है। शेष प्रतिशत अन्य ब्राउज़र के पास है।

    तो वहीं मोबाइल ब्राउज़र में भी क्रोम का 66.25 प्रतिशत हिस्सा है, सफारी का 17.64 प्रतिशत, सैमसंग इंटरनेट का 6.92 प्रतिशत है। शेष अन्य ब्राउज़र के पास है। इंटरनेट एक्स्प्लोरर मोबाइल के लिए कभी उपलब्ध ही नहीं था।

    साफ है गूगल क्रोम ने इंटरनेट एक्स्प्लोरर से उसकी बादशाहत छीन ली है। इंटरनेट एक्स्प्लोरर जिसका पूरी दुनिया में कभी 95 प्रतिशत हिस्सा था अब उसका 2 प्रतिशत से भी कम हिस्सा रह गया है। और अब इसका ये हिस्सा भी पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा। यही सब देख माइक्रोसॉफ्ट ने इसे बंद करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने पिछले वर्ष ही इसको लेकर घोषणा भी कर दी थी,ताकि सभी कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर अपग्रेड कर लें। वहीं माइक्रोसॉफ्ट अब अपना ध्यान एज को और बेहतर बनाने में लगायेगी।

    इसी के साथ वेब ब्राउज़र की दुनिया से Internet Explorer का अध्याय भी खत्म हो रहा है और अब इंटरनेट एक्सप्लोरर इतिहास के पन्नों पर ही रह जाएगा।