नई दिल्ली (टेक डेस्क)। फाइनेंस मिनिस्टर पीयूष गोयल ने आज अंतरिम बजट 2019 पेश किया। इस बजट में तकनीक के क्षेत्र को भी सम्मिलित किया गया है। आपको बता दें कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक नेशनल सेंटर शुरू करेगी। अंतरिम बजट 2019-20 को लोकसभा में पेश करते हुए पीयूष गोयल ने बताया कि भारत स्टार्टअप के लिए दूसरे सबसे बड़ा हब बन गया है। साथ ही वैश्विक तौर पर भारत में सबसे कम कीमत में डाटा और वॉयस कॉल प्रदान करता है। पीयूष गोयल ने कहा, “वर्ष 2030 की डिजिटल इकोनॉमी और डिजिटल इंफ्रास्टक्चर, हाल के वर्षों में सरकारी प्रक्रियाओं और निजी लेन-देन के डिजिटलीकरण की सफलता पर बनाया जाएगा।”

पीयूष गोयल ने कहा कि AI और एडवांस टेक्नोलॉजी के लाभ को प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा AI पर एक नेशनल प्रोग्राम की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि एक नेशनल AI पोर्टल भी जल्द ही डेवलप किया जाएगा। AI तकनीक अलग-अलग तकनीकों जैसे कार का पावर मैनेजमेंट, मोबाइल डिवाइस, वेदर, वीडियो और इमेज एनालिसिस, के डाटा का विश्लेषण करने में मदद करेगी। इससे उनकी क्षमता में सुधार हो सके। पीयूष गोयल ने कहा, “मोबाइल डाटा खपत के मामले में भारत दुनिया में प्रमुख है। पिछले 5 वर्षों में मासिक मोबाइल डाटा खपत 50 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। वहीं, भrरत में डाटा और वॉयस की कीमत संभवत: दुनिया में सबसे कम है।”

पीयूष गोयल ने कहा, “Make in India प्रोग्राम के तहत मोबाइल और पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की संख्या 2 से 268 से ज्यादा हो गई है। इससे रोजगार भी बढ़ रहा है। भारत अब विभिन्न क्षेत्रों में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग बह बनने की राह पर है जिसमें ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और चिकित्सा डिवाइस शामिल हैं।” साथ ही यह भी बताया कि लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार देने वाले तीन लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) नागरिकों को डिजिटल रूप से कई सेवाएं दे रहे हैं।

पीयूष गोयल ने यह भी बताया कि CSCs अब अपनी सर्विसेज बढ़ा रहा है और गांवों में डिजिटल इंफ्रास्टक्चर जैसे कनेक्टिविटी देने की कोशिश कर रहा है। सरकार अगले 5 वर्षों में 1 लाख गांवों को डिजिटल विलेज बनाने की तैयारी में है। जिस तरह रोजगार की अवधारणा में विश्व स्तर पर बदलाव हो रहा है ऐसे में रोजगार केवल सरकारी सेवाओं या कारखानों तक ही सीमित नहीं है।

पढ़ें क्या पड़ेगा प्रभाव:

अगर AI सेक्टर की बात करें तो इसका नेशनल सेंटर भारत के लिए कई मायनों में मददगार साबित होगा। आपको बता दें कि चीन पिछले कुछ वर्षों से AI सेक्टर में काफी निवेश कर रहा है। स्टैंडपोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने 2018 में कहा था कि AI अगले इलेक्ट्रिसिटी होगी। यह आने वाले समय में डेवलपमेंट का ठीक वैसा ही मुख्य स्तम्भ होगा, जैसा कि 20वीं सदी की शुरुआत में विश्व विकास में इलेक्ट्रिसिटी ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। ऐसे में अगर भारत AI पर इसी तरह काम करता रहा तो पावर मैनेजमेंट, मोबाइल डिवाइस, वेदर, वीडियो और इमेज एनालिसिस, के डाटा का विश्लेषण करने में मदद करेगी। 

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Posted By: Shilpa Srivastava

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