नई दिल्ली (टेक डेस्क)। सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों को आधार का इस्तेमाल न करने का फैसला दिया था। इसके बाद से कंपनियां अपने यूजर्स को जानने के लिए कंपनियां KYC करती हैं। KYC का मतलब Know Your Customer होता है। इसके लिए कंपनियां फिजिकल इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध करा रही हैं। Paytm ने तो इसकी शुरुआत कर दी है। कंपनी ने इसके लिए कई एग्जीक्यूटिव को काम पर भी लगा दिया है जिससे वो यूजर्स की KYC पूरी करने में मदद कर सकें। Paytm के बाद अब Amazon ने भी अपने ई-वॉलेट के लिए यूजर्स के घर जाकर KYC सर्विस उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

घर जाकर वेरिफिकेशन करना पड़ता है महंगा:

यूजर्स के घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करना कंपनी को महंगा पड़ता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कंपनियों के पास कुछ ही ऑप्शन्स बचे हैं जिससे वो अपने यूजर बेस को सुरक्षित रखकर नए यूजर्स को जोड़ सकेंगे। आधार वेरिफिकेशन में यूजर के फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं। लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन में यूजर के घर जाकर फिजिकल डॉक्यूमेंट्स को जांचना होता है। आधार वेरिफिकेशन फिजिकल वेरिफिकेशन से सस्ती पड़ती है।

RBI ने ई-वॉलेट्स को लेकर एक आदेश जारी किया था कि कंपनियों को फरवरी तक अपने सभी यूजर्स के डॉक्यूमेंट्स को वेरिफिकेशन के लिए जमा करना होगा। अगर छोटी ई-वॉलेट कंपनियों को देखा जाए तो वो अभी भी अपने मौजूदा यूजर्स को KYC में कनवर्ट करने पर काम कर रही हैं। वहीं, अगर Mobikwik की बात करें तो ई-वॉलेट के साथ-साथ यह वित्तीय सर्विस प्लेटफॉर्म में भी अपने पैर पसार रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि इस समय अपने सभी यूजर्स का पूरा KYC डाटा जमा करना काफी मुश्किल हो गया है।

वहीं, अगर Flipkart को देखा जाए तो उसने PhonePe के लिए UPI विकल्प को चुना है। ऐसे में उसे इस तरह की कोई दिक्कत नहीं आ रही है। क्योंकि UPI के जरिए एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसा ट्रांसफर किया जाता है और बैंकों ने यूजर्स की KYC पहले ही कर रखी है।

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Posted By: Shilpa Srivastava