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    Alert: हैकर्स के निशाने पर एंड्रॉइड यूजर्स, एक छोटी सी गलती करवा देगी भारी नुकसान

    Updated: Sun, 30 Jun 2024 02:00 PM (IST)

    चेक पॉइंट रिसर्च (सीपीआर) ने कहा कि ये मैलवेयर दुनियाभर के एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बना रहा है। इस दौरान की गई एक छोटी सी गलती आपका बड़ा नुकसान करवा सकती है। जिन देशों के एंड्रॉइड यूजर्स के लिए ये वॉर्निंग जारी हुई है उनमें खासतौर से संयुक्त राज्य अमेरिका चीन और इंडोनेशिया शामिल हैं। इससे सेफ रहने के लिए यूजर्स को कुछ चीजों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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    ये मैलवेयर दुनियाभर के एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बना रहा है। (AI Generated Image)

    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। एंड्रॉइड यूजर्स की सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसके मुताबिक हैकर्स लाखों एंड्रॉइड स्मार्टफोन यूजर्स को निशाना बना सकते हैं।

    चेक पॉइंट रिसर्च (सीपीआर) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार राफेल आरएटी नामक एक एंड्रॉइड मैलवेयर दुनिया भर में लाखों यूजर्स को निशाना बना रहा है। इससे सेफ रहने के लिए यूजर्स को कुछ चीजों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

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    एंड्रॉइड यूजर्स हो जाएं सतर्क

    चेक पॉइंट रिसर्च (सीपीआर) ने कहा कि ये मैलवेयर दुनियाभर के एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बना रहा है। इस दौरान की गई एक छोटी सी गलती आपका बड़ा नुकसान करवा सकती है। जिन देशों के एंड्रॉइड यूजर्स के लिए ये वॉर्निंग जारी हुई है उनमें खासतौर से संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और इंडोनेशिया सबसे अधिक प्रभावित देश हैं। इस रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन टूल (आरएटी) को जासूसी से लेकर रैनसमवेयर हमलों तक कई तरह के ऑपरेशनों में देखा गया है।

    सैमसंग सहित इन्हें खतरा

    सीपीआर की जांच में राफेल आरएटी से जुड़े लगभग 120 कमांड और कंट्रोल सर्वर का पता चला है, जो इशारा करता है कि ये मैलवेयर एंड्रॉइड यूजर्स के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यह मैलवेयर मुख्य रूप से सैमसंग डिवाइस को प्रभावित करता है और इसके बाद शाओमी, वीवो और हुआवेई फोन आते हैं।

    यानी, मतलब साफ है जहां भी इन कंपनियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल किए जा रहे हैं उन्हें सिक्योरिटी को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। Android 11 सबसे अधिक प्रभावित संस्करण बताया गया है। वहीं Android 8 और 5 जैसे पुराने संस्करण भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

    कैसे करें खुद को सेफ?

    -केवल Google Play Store जैसे विश्वसनीय स्रोतों से ही ऐप्स इंस्टॉल करें।

    - अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को अपडेट रखें।

    - विश्वसनीय मोबाइल सुरक्षा एप्लिकेशन का उपयोग करें।

    - किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।

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