नई दिल्ली, टेक डेस्क। भारत में 5G स्मार्टफोन्स को लॉन्च करने का चलन शुरू हो चुका है। भारत के पहला 5G स्मार्टफोन Realme X50 Pro 5G को लॉन्च कर दिया गया है। वहीं, iQOO 3 5G भी भारत में आज दस्तक दे रहा है। इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां एक तरफ भारतीय टेलिकॉम कंपनियां 4G को पूरी तरह नहीं अपना पाई हैं। ऐसे में 5G तकनीक पर टेलिकॉम कंपनियां कितनी खरी उतर पाएंगी? क्योंकि भारत में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज भी 3G तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। हालांकि, अब यह पूरी तरह से टेलिकॉम कंपनियों पर निर्भर करता है कि वो कितनी जल्द इस तकनीक को अपनाती हैं और यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाती हैं।

टेलिकॉम कंपनियां यूजर एक्सपीरियंस कब तक बेहतर करेंगी इस बात की जानकारी तो हम नहीं दे सकते हैं लेकिन आपको यह जरूर बता सकते हैं कि आखिर 5G क्या होता है और यह कैसे 4G से अलग है।

जानें क्या है 5G? क्वालकॉम के मुताबिक, यह 5th जनेरेशन मोबाइल नेटवर्क है। यह नेटवर्क केवल लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का ही काम नहीं करेगा बल्कि मशीन, ऑब्जेक्टस और डिवाइसेज को भी जोड़ने और कंट्रोल करने का काम करेगा। यूजर एक्सपीरियंस को बढ़ाने के लिए यह एक अलग स्तर की परफॉर्मेंस देने में सक्षम होगा। 5G मल्टी- Gbps पीक रेट, अल्ट्रा-लो लेटेंसी, ज्यादा क्षमता और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस देने में मददगार साबित होगा।

5G और 4G में क्या होगा मुख्य अंतर:

स्पीड: CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों जनेरेशन्स में मुख्य अंतर स्पीड का होगा। 5G नेटवर्क 4G के मुकाबले 100 गुना तेज होगा। अगर स्पीड पर गौर किया जाए तो इसके जरिए 2 घंटे की एक मूवी 10 सेकेंड से कम समय में डाउनलोड की जा सकेगी। 4G में यह समय 7 मिनट तक का है। हालांकि, मूवी स्ट्रीमिंग के अलावा भी कई ऐसी चीजें होंगी जिसमें 5G फायदेमंद साबित होगा। 5G नेटवर्क सुपर-हाई-फ्रीक्वेंसी एयरवेब्स पर काम करता है। सुपर-हाई-फ्रीक्वेंसी एयरवेब्स के जरिए ही यह ज्यादा डाटा ट्रांसमिट कर सकता है। क्योंकि ज्यादा फ्रीक्वेंसी इस काम में पूरी तरह सक्षम होती है।

क्षमता: कई बार ऐसा होता है कि अगर किसी जगह पर एक साथ कई लोग मौजूद होते हैं और वो वहां इंटरनेट पर कुछ ओपन करने की कोशिश करते हैं तो वो बफर होने लगता है और पेज ओपन नहीं हो पाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी एक जगह पर जब एक साथ कई लोग इंटरनेट एक्सेस कर रहे होते हैं तो कंजेशन बढ़ जाता है। इस वजह से इंटरनेट स्लो हो जाता है। यूजर्स को इस परेशानी से 5G निजात दिलाएगा। इसकी क्षमता 4G से ज्यादा होगी। 5G के जरिए किसी भी नेटवर्क से ज्यादा से ज्यादा डिवाइसेज को कनेक्ट किया जा सकेगा।

लैटेंसी: स्पीड और लैटेंसी के बीच बहुत छोटा अंतर है। आपको अपने फोन में किसी कंटेंट को डाउनलोड करने में या फिर वेबपेज लोड होने में कितना समय लग रहा है यह स्पीड पर निर्भर करता है। वहीं, जब आप अपने किसी दोस्त को मैसेज भेजते हैं तो वो उसके पास कब तक पहुंचता है यह लैटेंसी पर निर्भर करता है। आपको बता दें कि लैटेंसी मिलीसेकेंड पर निर्भर करती है। वैसे 4G के साथ भी लैटेंसी काफी कम है लेकिन 5G के साथ यह जीरो हो सकती है। यानी आप किसी को कोई मैसेज करेंगे तो वो तुरंत ही दूसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाएगा। अभी कई बार ऐसा होता है कि मैसेज दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने में कुछ समय लग जाता है।

Posted By: Shilpa Srivastava

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस