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    I’m not a robot: मजाक सा लगने वाला ये एक क्लिक, करता है आपका पूरा इन्वेस्टिगेशन; ऐसे बताता है कि आप इंसान हैं

    Updated: Fri, 20 Jun 2025 03:44 PM (IST)

    Tech Tips इंटरनेट ब्राउजिंग के दौरान आपने जरूर कभी न कभी I’m not a robot वाला बॉक्स देखा होगा। आपको कई बार ये मजाक सा लगा होगा कि आखिर एक बार बॉक्स पर क्लिक करने से ये कैसे तय हो जाता है कि मैं इंसान हूं। मैं रोबोट नहीं हूं। लेकिन ये आसान सा लगने वाला प्रोसेसर दरअसल एक छोटा डिजिटल इन्वेस्टिगेशन होता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

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    I am not a robot पर क्लिक करने से क्या होता है।

     टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आपने इंटरनेट ब्राउज करते समय 'I’m not a robot' चेकबॉक्स जरूर देखा होगा। आपको ये काफी आसान लगता होगा, बस बॉक्स टिक करें और आगे बढ़ जाएं। कई बार आपको मजाक भी सूझता होगा कि मैं इंसान हूं ये मुझे ही साबित करना है। लेकिन, ये काफी स्मार्ट प्रोसेस होता है। इस तरह का टेस्ट CAPTCHA (कम्पलीटली ऑटोमेटेड पब्लिक ट्यूरिंग टेस्ट टू टेल कंप्यूटर्स एंड ह्यूमन्स अपार्ट) कहलाता है। इसका मकसद बॉट्स को रोकना और सिर्फ असली इंसानी यूजर्स को आगे बढ़ने देना है।

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    जब आप 'I’m not a robot' चेकबॉक्स पर क्लिक करते हैं, तो सिस्टम सिर्फ आपकी बात पर भरोसा नहीं करता। ये चुपके से आपके बिहेवियर को क्लिक से पहले और दौरान एनालाइज करना शुरू करता है। मिसाल के तौर पर, ये ट्रैक करता है कि:

    • क्लिक करने से पहले आपका माउस कैसे मूव करता है।
    • आपका मूवमेंट स्मूथ और इंसानों जैसा है या रोबोटिक।
    • आप कितनी तेजी से बॉक्स तक पहुंचकर क्लिक करते हैं।
    • पेज पर आपका ब्राउजिंग बिहेवियर- स्क्रॉलिंग, रुकना, हिचकिचाना।

    इसे बिहेवियरल एनालिसिस कहते हैं। बॉट्स आमतौर पर सीधी लाइन में या बहुत तेजी से मूव करते हैं, जबकि इंसानी बिहेवियर थोड़ा इम्परफेक्ट होता है, जिससे फर्क पता करना आसान हो जाता है।

    आपके माउस मूवमेंट्स के अलावा, Google या दूसरे CAPTCHA प्रोवाइडर्स आपके ब्राउजर हिस्ट्री और कुकीज भी चेक करते हैं। अगर आप फेमिलियर ब्राउजर यूज कर रहे हैं, जो Google में लॉग इन है या जिसमें रेगुलर वेब यूज की हिस्ट्री है, तो ये मजबूत संकेत देता है कि आप असली इंसान हैं। अगर आप क्लीन ब्राउजर या इनकॉग्निटो मोड से आ रहे हैं, तो आपको ज्यादा चैलेंजेस मिल सकते हैं, जैसे स्ट्रीट साइन्स या ट्रैफिक लाइट्स वाली इमेज पहचानना।

    कभी-कभी, अगर चेकबॉक्स क्लिक करने के बाद सिस्टम को पक्का नहीं होता कि आप इंसान हैं, तो ये एडिशनल टेस्ट शो करता है- जैसे क्रॉसवॉक्स वाली इमेज पर क्लिक करना या डिस्टॉर्टेड शब्द टाइप करना। ये टेस्ट बॉट्स के लिए सॉल्व करना मुश्किल होते हैं।

    यानी शॉर्ट में बात करें तो चेकबॉक्स टिक करने से आपके ऑनलाइन बिहेवियर, ब्राउजर डेटा और इंटरैक्शन पैटर्न्स का बैकग्राउंड चेक शुरू होता है। ये सब आपके टाइम वेस्ट किए बिना आपको इंसान कंफर्म करने के लिए होता है। CAPTCHA स्पैम रोकने, हैकिंग से बचाने और वेबसाइट्स को मैलिशियस बॉट्स से प्रोटेक्ट करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वो भी बस एक सवाल पूछकर। ऐसे में अगली बार जब आप वो चेकबॉक्स क्लिक करें तो याद रखें कि ये सिर्फ टिक नहीं है। बल्कि ये एक मिनी डिजिटल इन्वेस्टिगेशन है।

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