नई दिल्ली, टेक डेस्क.  फेस्टिवल सीजन नजदीक है। ऐसे में Amazon, Flipkart समेत ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियां ऑनलाइन प्रोडक्ट की खरीद पर शानदार ऑफर दे रही हैं। लेकिन ऑनलाइन खरीददारी करते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए, वरना आपको भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। दरअसल फेस्टिवल सीजन के दौरान भारी मात्रा में ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से भी बड़े पैमाने पर नकली प्रोडक्ट की बिक्री की जाती है। साल 2018 में हुए एक सर्वे के मुताबिक कई ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट से एक-तिहाई से ज्यादा नकली प्रोडक्ट की बिक्री की जा रही है। ऐसे में अगर आप ऑनलाइन खरीददारी करने जा रहे हैं, तो कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। इससे आप ठगी का शिकार होने से बचे रहेंगे। 

चेक करें ऑनलाइन वेबसाइट का लिंक 

ज्यादातर ऑनलाइन फर्जीवाड़ा फेक वेबसाइट से होता है। अक्सर लोगों को WhatsApp या किसी अन्य मैसेजिंग ऐप से Flipkart या Amazon पर भारी डिस्काउंट और डील का ऑफर मिलता है। इस ऑफर के साथ एक लिंक दी होती है, जो कि फर्जी हो सकती है। ऐसे में इस लिंक से ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले वेबसाइट के नकली होने की जांच कर लें। साफ है कि अगर वेबसाइट फर्जी है, तो प्रोडक्ट जरूर फर्जी होगा। ऐसे ऑनलाइन प्रोडक्ट की खरीददारी करते वक्त लिंक के URL को सावधानी से चेक करें। बता दें कि असली वेबसाइट https से शुरू होगी, न कि http से इसकी शुरुआत होगी। ऐसे में हमेशा https से शुरू होने वाली वेबसाइट से ही ऑनलाइन शॉपिंग करें। 

ऑफिशियल वेबसाइट से प्रोडक्ट का करें मिलान 

हर एक प्रोडक्ट का एक मॉडल नंबर होता है। इस मॉडल नंबर को कई ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट पर डालकर देंखे। साथ ही प्रोडक्ट की ऑफिशियल वेबसाइट से भी इसी मॉडल नंबर की डिटेल हासिल करें। अगर ऑनलाइन मोबाइल खरीद रहे हैं, तो बॉक्स के पर लिखे IMEI नंबर  को देखें और प्रोडक्ट को खरीदने से पहले इसे ब्रांड की ऑफिशियल वेबसाइट से मिलाएं। दरअसल ई-कॉमर्स साइट कई प्रोडक्ट की बिक्री थर्ड पार्टी के जरिए करती है। ऐसे में असली और नकली प्रोडक्ट की पहचान करना मुश्कल हो जाता है।  

Smart Consumer ऐप पर करें प्रोडक्ट की चेकिंग

इलेक्ट्रॉनिक और FMCG कंपनियां नकली प्रोडक्ट से बचाव के लिए एक खास तरह का QR कोड और होलोग्राम लगाने लगी है, जिसके जरिए असली नकली की पहचान हो सकती है।  इसके अलावा नकली प्रोडक्ट की पहचान के लिए फूड रेगुलेटर FSSAI के Smart Consumer एप की भी मदद ले सकते हैं। इसे Google Play Store से डाउनलोड करके इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐप में आपको QR code स्कैन करने और QR नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद प्रोडक्ट के मैन्युफैक्चरिंग डिटेल हासिल हो जाएगी। इस तरह प्रोडक्ट के असली और नकली होने की पहचान की जा सकेगी। 

मैन्युफैक्चरिंग और ब्रांडिंग के करें पहचान  

नकली सामान की पहचान कंपनी के लोगो और स्पेलिंग से की जा सकती है। नकली सामान बेचने वाली कंपनियां बिल्कुल हूबहू logo बनाती हैं। लेकिन यह logo ब्रांड के logo से कुछ अलग होगा। साथ ही ब्रांड के नाम में स्पेलिंग की गलत प्लेसिंग करके नकली प्रोडक्ट की बिक्री करती हैं। ऐसे में ऑनलाइन सामान खरीदते वक्त हमेशा ब्रांड के logo को ध्यान से देखना चाहिए। साथ ही प्रोडक्ट की स्पेलिंग की भी सही से जांच पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही कपडों की ऑनलाइन खरीददारी करते वक्त उसके फ्रैब्रिक की पहचान करनी चाहिए। 

ज्यादा डिस्काउंट वाला प्रोडक्ट हो सकता है नकली 

ऑनलाइन खरीददारी करते वक्त हमेशा चेक करना चाहिए कि जिस प्रोडक्ट की खरीद कर रहे हैं, उसका फिजिकल एड्रेस, ईमेल, फोन नंबर और कॉन्टैक्ट डीटेल है या नही। अगर यह सारी चीजे नहीं हैं, तो जरूर प्रोडक्ट फर्जी होगा। साथ ही ऑनलाइन खरीददारी करते वक्त भारी डिस्काउंट के लालच में नही आना चाहिए। बता दें कि ब्रांडेड आइटम, लग्जरी प्रोडक्ट पर एमआरपी (MRP) की तुलना में 70-80 फीसदी का डिस्काउंट नहीं मिलता है। ऐसे में अगर MRP से 70 से 80 फीसदी से ज्यादा छूट मिल रही तो समझ लें कि आइटम नकली है। 

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