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    ऑनलाइन स्कैम से बचाएंगे ये तरीके, डिजिटल हाइजीन से लेकर सॉफ्टवेयर रखें अप-टू-डेट

    Updated: Fri, 20 Jun 2025 06:03 PM (IST)

    जागरूकता और तमाम सुरक्षा उपायों के बीच साइबर अपराधी अपना शिकार ढूंढने में सफल क्यों हो जाते हैं? इसका एक बड़ा कारण है कि वे किसी को टारगेट करने से पहले सेंध की संभावित जानकारियों को तो जुटाते ही हैं, साथ ही यूजर के मनोभावों पर भी नियंत्रण जमा लेते हैं। बदलती साइबर चुनौतियों और जरूरी सुरक्षा उपायों की चर्चा कर रहे हैं।

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    ऑनलाइन स्कैम से कैसे बचें।

    ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि हमें इतनी जानकारी है कि हमारे साथ साइबर ठगी की ही नहीं सकती, लेकिन रुकिए, सच्चाई थोड़ी उलट है। साइबर अपराधी हर रोज नए-नए हथकंडे अपनाकर शातिर होते जा रहे हैं। साइबर सुरक्षा हमारे लिए भले ही सतर्कता और जागरूकता तक सीमित हो, लेकिन साइबर ठगों के लिए यह फुल टाइम जाब है। हाल के दिनों में वाहनों की फर्जी नीलामी विज्ञापन, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और यूपीआई स्कैम जैसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं। डिजिटल अरेस्ट अब तो साइबर अपराधियों की रोजाना की गतिविधि है। वहीं एआई टूल्स आने के बाद से साइबर ठगों के हाथ में एक तरह से अलादीन का चिराग ही लग गया है।

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    इन तमाम हथकंडों के जरिए बीते अप्रैल से इस जनवरी तक मात्र 10 महीनों में 4245 करोड़ रुपये का डिजिटल फाइनेंशियल फ्रॉड हुआ है, जो गत वर्ष के मुकाबले 67 प्रतिशत अधिक है। दरअसल, ठगी को अंजाम देने से पहले साइबर अपराधी लोगों का विश्वास जीतने और उन्हें झांसे में लेने के लिए कई तरह की मनोवैज्ञानिक युक्तियों का सहारा लेते हैं। इनके चंगुल में फंसने से बचने के लिए हमें कुछ सामान्य सी बातों का ध्यान हमेशा रखना होगा।

    डिजिटल आदतों में करें सुधार

    अगर एक ही या एक जैसा ही पासवर्ड या पिन सभी वेबसाइट या ऐप्स के लिए प्रयोग कर रहे हैं, तो यह आदत आपको एक दिन जोखिम में डाल सकती है। ध्यान रखें abc, 1234, जन्मतिथि जैसे पासवर्ड जोखिम भरे होते हैं। पासवर्ड को अपडेट करते रहना और पासवर्ड मैनेजर का प्रयोग करना आपके लिए एक सुरक्षित उपाय हो सकता है। फाइनेंशियल अकाउंट, ईमेल और स्टोरेज के लिए पासवर्ड को हमेशा मजबूत रखना चाहिए।

    साफ्टवेयर रखें अप-टू-डेट

    आपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर्स और ऐप्स को अपडेट करते रहना आवश्यक है। आउटडेटेड साफ्टवेयर और डिवाइस साइबर अपराधियों के आसान टारगेट होते हैं। चूंकि, पुरानी डिवाइस या मॉडल के लिए निर्माता कंपनियां अपडेट जारी करना बंद कर देती हैं, इसलिए साइबर सुरक्षा का जोखिम बढ़ सकता है। साफ्टवेयर अपडेट को आटोमैटिक रखें, ताकि इसका नोटिफिकेशन प्राप्त होने पर आप इसे इंस्टाल कर सकें।

    सहजता से ना करें विश्वास

    कोई भी निजी जानकारी साझा करने या फाइनेंशियल ट्रांसजैक्शन करने से पहले उसकी वैधता को अलग-अलग स्तरों पर जांचना जरूरी है। आधिकारिक संपर्क नंबर, वेबसाइट या ईमेल जैसी जानकारियों को लेकर आश्वस्त हो लेना चाहिए। अगर कोई बैंक अधिकारी बनकर या पार्सल डिलीवरी के लिए फोन करता है, तो पहले आधिकारिक वेबसाइट या ऐप्स से इसे वेरिफाई करना चाहिए।

    जानकारी साझा करने में समझदारी

    अगर आपकी कई सारी जानकारियां पहले से ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स जैसे इंटरनेट मीडिया पर उपलब्ध हैं तो आप साइबर अपराधियों के लिए आसान टारगेट हो सकते हैं। इन जानकारियों से पासवर्ड का अनुमान लगाना या फिशिंग के जरिए आपको टारगेट करना आसान हो जाता है। इसी के आधार पर स्कैमर फेक मैसेज तैयार करके आपको टारगेट कर सकते हैं। इंटरनेट मीडिया अकाउंट, बैंक और क्रेडिट कार्ड पर संभावित असामान्य गतिविधियों की निरंतर निगरानी करते रहना चाहिए।

    संदिग्ध एक्टिविटी पर नजर

    अगर आपके फाइनेंशियल डेटा या पर्सनल डेटा में छेड़‌छाड़ का पता लगता है या कुछ असामान्य दिखता है, तो बिना देर किए इसकी जानकारी संबंधित अथारिटी को देनी चाहिए। आजकल केवाइसी फ्रॉड के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो रही है, इसे लेकर जागरूक होने की जरूरत है। अकाउंट की सुरक्षा के लिए मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना समझदारी होगी, इसमें पासवर्ड के साथ-साथ फोन पर कोड प्राप्त करने, गूगल आथेंटिकेटर से वेरिफाइ करने जैसी अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

    एआई टूल्स साबित हो रहे हैं खतरनाक

    हैकर्स एआई की लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए फेक वेबसाइट और वीडियो तैयार करके ठगी को अंजाम दे रहे हैं। गूगल के मुताबिक फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए अटैकर्स फेक एआई टूल्स को प्रमोट करते हैं। इसमें कई बार लूमा एआई, कैनवा ड्रीम लैब आदि का फेक वर्जन तैयार करके यूजर्स को फर्जी वेबसाइट्स पर ले जाते हैं।

    इन पेजों पर यूजर्स को एआई जेनरेटेड वीडियो या इमेज का इंटरफेस दिखता है, जहां जिप फाइल इंस्टाल करने की सुविधा आफर की जाती है, इसे डाउनलोड करते ही यूजर के सिस्टम में मालवेयर इंस्टाल हो जाता है और पर्सनल डेटा दांव पर लग जाता है। गूगल ने चेताया है कि वेबसाइट को जांचना आवश्यक है और अनजान सोर्स से कुछ भी डाउनलोड करने से बचना चाहिए। अपडेटेड एंटीवायरस का प्रयोग करना आवश्यक है।

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