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    क्या आप जानते हैं Bluetooth के नाम के पीछे की मजेदार कहानी, जानकर रह जाएंगे हैरान

    By Saurabh VermaEdited By:
    Updated: Wed, 05 May 2021 12:24 PM (IST)

    Bluetooth दो डिवाइस को आपस में जोड़ने का काम करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर इस डिवाइस को आपस में जोड़ने वाली टेक्नोलॉजी का नाम Bluetooth क्यों रखा गया है। अगर नहीं तो आज हम आपको Bluetooth के नाम के पीछे की मजेदार कहानी बता रहे हैं।

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    यह Bluetooth की प्रतीकात्मक फाइल फोटो है।

    नई दिल्ली, टेक डेस्क। अगर आप स्मार्टफोन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, तो वाजिब है कि आपने Bluetooth का नाम जरूर सुना होगा। Bluetooth की मदद से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को आपस में वायरलेस तरीके से कनेक्ट किया जा सकता है। साधारण तौर पर कहें, तो ब्लूटूथ दो डिवाइस को आपस में जोड़ने का काम करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर इस डिवाइस को आपस में जोड़ने वाली टेक्नोलॉजी का नाम Bluetooth क्यों रखा गया है। अगर नहीं, तो आज हम आपको Bluetooth के नाम के पीछे की मजेदार कहानी बताने जा रहे हैं।

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    डेनमार्क के राजा के नाम पर पड़ा Bluetooth का नाम 

    Bluetooth के नाम के पीछे की कहानी टेक्नोलॉजी से नहीं, बल्कि राजनीति से जुड़ी है। Bluetooth का नाम Jim Kardach ने दिया था, जो Bluetooth बनाने वाली टीम का हिस्सा थे। Jim Kardach की मानें, तो उन्होंने Bluetooth का नाम डेनमार्क के 10वीं सदी के राजा King Harald Bluetooth के नाम से लिया है। बता दें कि King Harald को कई राज्यों को आपस में जोड़ने के लिए जाना जाता था। उन्होंने डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन को आपस में मिलाकर एक राज्य स्कैंडिनेविया बनाया था। कुछ इसी तरह का काम भारत में सरदार पटेल ने किया था।

    ऐसे King Harald के पीछे जुड़ा Bluetooth 

    बता दें कि जैसे ब्लूटूथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को आपस में जोड़ने का काम करता है, उसी तरह King Harald Bluetooth ने राज्यों को आपस में जोड़ा था। इस वजह से Jim Kardach ने इसे Bluetooth नाम दिया था। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि King Harald के नाम के पीछे Bluetooth जोड़ने की एक खास वजह थी, क्योंकि King Harald का एक दांत पूरी तरह से डेड था, जिसकी वजह से वो नीला दिखाई पड़ता था। इसके चलते King Harald के नाम के पीछे Bluetooth जोड़ा गया था।