नई दिल्ली (टेक डेस्क)। सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने चीनी कंपनी हुवावे, लेनोवो, ओप्प और टीसीएल से यूजर डाटा शेयर करने की बात स्वीकार लिया है। हांलाकि फिलहाल फेसबुक ने अन्य कंपनियों एप्पल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और ब्लैकबेरी से डाटा शेयर करने की बात नहीं की है। इस साल की शुरुआत में फेसबुक डाटा लीक पर दुनिया भर में काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद कंपनी ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव करने की बात की थी।

डाटा साझा करने की दी मंजूरी

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के मोबाइल पार्टनरशिप के वाइस प्रेसिडेंट (उपाध्यक्ष) फ्रेंसिसको वारेला ने कबूल किया कि कंपनी ने हुवावे के साथ काम किया है। वारेला ने अपने बयान में कहा कि हुवावे, लेनोवो, ओप्पो और टीसीएल के साथ फेसबुक के एकीकरण को हमने गेट-गो से नियंत्रित किया गया और हमने इन कंपनियों के साथ डाटा साझा करने की मंजूरी दी थी। वारेला ने आगे कहा, इस मामले में अमेरिकी संसद की रूचि को देखते हुए हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस समझौते के साथ जो भी जानकारियां हुवावे से साझा की गई थी, वे डिवाइस में ही स्टोर किया गया था। इन जानकारियों को कंपनी सर्वर में नहीं स्टोर किया गया था।

2010 से साझा किया जा रहा है डाटा

फेसबुक ने इस बात की पुष्टि अमेरिकी मीडिया के उस रिपोर्ट के बाद की है, जिसमें कहा गया था कि निर्माताओं को यूजर्स का डाटा मुहैया कराया गया था। इस रिपोर्ट में अमेजन, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और ब्लैकबेरी के भी नाम शामिल थे। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि फेसबुक ने कहा कि चीनी कंपनियों के साथ हुए समझौते के तहत दोनों कंपनियों (फेसबुक और अन्य कंपनी) को यूजर्स और उनके दोस्तों के धार्मिक और राजनीतिक झुकाव, काम एवं शौक्षणिक जानकारी के साथ-साथ रिलेशनशिप स्टेटस सहित विस्तृत जानकारी तक पहुंचने की अनुमति देता है। इस तरह की अनुमति की पेशकश ब्लैकबेरी को भी की गई है। फेसबुक ने कहा कि यह समझौता 2010 से पुराना है और हुवावे के साथ यह समझौता सप्ताह के अंत तक खत्म हो जाएगा।

हुवावे ने कहा, नहीं किया डाटा इकठ्ठा

चीनी मोबाइल कंपनी हुवावे ने कहा कि कंपनी ने कभी भी फेसबुक यूजर डाटा को इकठ्ठा या स्टोर नहीं किया। हुवावे ने फेसबुक के साथ यूजर्स को बेहतर सर्विसेज देने के लिए समझौता किया था। आपको बता दें कि कैंब्रिज ऐनालिटीका स्कैंडल के बाद फेसबुक की दुनियाभर में कड़ी आलोचना हुई थी। इस डाटा लीक विवाद में करीब 8 करोड़ यूजर्स प्रभावित हुए हैं। प्रभावित हुए यूजर्स में सबसे ज्यादा करीब 81 प्रतिशत अमेरिका से हैं। इसके बाद ब्रिटेन एंव अन्य देश के यूजर्स हैं। भारत के करीब 5 लाख यूजर्स इस लीक में प्रभावित हुए हैं।

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Posted By: Sakshi Pandya

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