Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दुनिया के वो टॉप-5 ऐप्स, जो कमाई में हैं सबसे आगे, जानें डिटेल

    By Saurabh VermaEdited By:
    Updated: Mon, 04 Jul 2022 10:45 AM (IST)

    Top 5 Highest Earning App ऐपल (Apple) ने ऐप स्टोर से इन ऐप परचेज सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम ऐप और गेमिंग से करीब 43.7 बिलियन डॉलर की कमाई की है। यह पिछले साल के मुकाबले 5.6 फीसद ज्यादा है।

    Hero Image
    Photo Credit - Top 5 highest Rating Apps

    नई दिल्ली, टेक डेस्क। Top 5 Highest Earning App: मौजूदा वक्त में दुनियाभर में लाखों की संख्या में ऐप्स मौजूद हैं। लेकिन कुछ ऐसे ऐप्स भी हैं, जो दुनियाभर में अपनी पहचान बना पाते हैं। अगर दुनिया के टॉप-5 ऐप्स की बात करें, तो टिकटॉक (TikTok) नॉन गेमिंग ऐप लिस्ट में टॉप पायदान पर काबिज है। Tiktok ऐप iOS और गूगल प्ले स्टोर पर सबसे ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है। 

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    यूजर्स ऐप पर कर रहे ज्यादा खर्च 

    बता दें कि जहां एक साल पहले तक यूजर्स ऐप पर 920.7 मिलियन डॉलर खर्च करते थे। वहीं एक साल बाद यह आंकड़ा बढ़कर 1.7 बिलियन डॉलर हो गया, जो कि पिछले साल के मुकाबले 85 फीसद ज्यादा है। अगर टिकटॉक की बात करें, तो इसका लाइफ-टाइम रेवेन्यू करीब 5.5 बिलियन डॉलर हो गया है। YouTube कमाई के मामले में दूसरे पायदान पर है। यह दुनिया का सबसे ज्यादा कमाई करने वाला दूसरा नॉन गेमिंग ऐप है। इससे करीब 693.6 मिलियन डॉलर की कमाई हुई है। वही गूगल वन (Google One) इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर है। ऐप से करीब 614 मिलियन डॉलर की कमाई हुई है। इसी तरह Tinder को चौथा और Disney के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Disney+ को पांचवां स्थान मिला है।

    टॉप-5 ऐप 

    • TikTok 
    • Youtube 
    • Google One
    • Tinder 
    • Disney+ 

    ऐपल की ऐप स्टोर से कमाई हुई कम 

    Google Apple Store और Google Play Store पर साल की पहली छमाही में 71.2 बिलियन ऐप को इंस्टॉल किए गए हैं, जो कि साल 2021 के पहली छमाही के मुकाबले 1.5 फीसदी कम हैं। इसमें ऐपल ऐप स्टोर के जोरदार नुकसान उठाना पड़ा है। ऐपल ऐप स्टोर ने वर्ल्ड वाइड 15.9 बिलियन डाउनलोड हुआ है। दुनियाभर में साल 2022 की पहली छमाही में ऐपल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर करीब 65 बिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं। एक साल पहले तक यह आंकड़ा 1 फीसद हुआ करता था।