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    सत्य, प्रेम और करुणा हैं धर्म के तत्व

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Sun, 11 Jun 2023 11:56 AM (IST)

    राम ईश्वर के रूप में सबके हृदय में हैं। कबीर ने कहा है- राम सब घट मेरा साइयां... राम ईश्वर के रूप में सबके हृदय में हैं। सदा सर्वदा सबके हृदय में रहेंगे। आज इतनी शिक्षा बढ़ी है युवा पीढ़ी भी अध्यात्म में रुचि ले रही है।

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    सत्य, प्रेम और करुणा हैं धर्म के तत्व

    मोरारी बापू, कथावाचक| अक्सर पूछा जाता है कि राम की अलग-अलग छवि देखने को मिलती है, फिर असली राम कहां हैं? मैं कहता हूं, असली राम परम सत्य में हैं। असली राम प्रेम में है। असली राम करुणा में है। जल को जिस पात्र में डालो, उस पात्र के आकार का जल बन जाता है।

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    यद्यपि जल का कोई आकार नहीं है, लेकिन कोई एक प्याले में ले, लोटे में ले या घड़े में ले, सबके राम अपनी पात्रता के अनुसार होते हैं। लेकिन जिनका आदि-अंत तक कोई नहीं पा सका, वह परमतत्व राम, मेरी दृष्टि में असली राम वे हैं, जहां प्रेम है, जहां सत्य है, जहां करुणा है।

    राम ईश्वर के रूप में सबके हृदय में हैं। कबीर ने कहा है- राम सब घट मेरा साइयां... राम ईश्वर के रूप में सबके हृदय में हैं। सदा सर्वदा सबके हृदय में रहेंगे। आज इतनी शिक्षा बढ़ी है, युवा पीढ़ी भी अध्यात्म में रुचि ले रही है।

    आज हनुमान जी की तरह सीना फाड़ने की जरूरत नहीं है, सिर्फ आंखें खोलने की जरूरत है। रामकथा बहुत मार्गदर्शन दे सकती है। रामकथा बहुत उपयोगी हो सकती है। राम कथा को केवल धार्मिक न समझें। रामकथा पंडाल में कहता हूं कि ये मेरी धर्मसभा नहीं है, ये मेरी प्रेम सभा है।

    धर्म को हमने संकीर्ण कर दिया है। समाज को जागरूक करने के लिए सत्संग की आवश्यकता है। सत्संग के कारण जो विवेक आएगा, वह इसमें सुधार ला सकेगा। हमें याद रखना चाहिए कि धर्म जोड़ने के लिए होता है। जो लड़े और लड़ाए, वह धर्म नहीं है।

    हमारे वेद कहते हैं- सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया:... सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब शतायु हों। वहां कोई, वर्ण, जाति, समूह और पक्ष-विपक्ष की बात ही नहीं है। ऋषि-मुनियों ने युगों पहले कह दिया था। विनोबा जी ने कहा था कि युद्ध दो धर्मों के बीच नहीं होता, हमेशा दो अधर्मों के बीच होता है। जहां धर्म दो कर दे, वहां धर्म कैसे बचेगा। धर्म का काम जोड़ना है, तोड़ना नहीं है। धर्म का मतलब सत्य, प्रेम, करुणा है।

    कलिकाल में समस्याओं के समाधान का एक बड़ा साधन और उपाय हरि नाम है। स्वयं भगवान शिव राम नाम जपते हैं। राम परम तत्व हैं। हमारी बहुत सी परेशानियों का कारण हमारा मोह है। मोह रूपी रावण को राम ने मारा था। हमारे भीतर महामोह का महिषासुर बैठा है। महिषासुर का वध राम ने नहीं, मां काली ने किया था। इसे मारने के लिए हम राम कथा का सहारा लें। राम कथा एक ओर जहां काली के रूप में कराल है, तो वहीं चंद्रमा की किरणों की तरह उसमें कोमलता-शीतलता भी है।