Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Vallabhacharya Jayanti 2022: महाप्रभु वल्लभाचार्य की जयंती आज, जानें क्या है इस दिन का महत्व

    By Shivani SinghEdited By:
    Updated: Tue, 26 Apr 2022 02:01 PM (IST)

    Vallabhacharya Jayanti 2022 श्री वल्लभ आचार्य जयंती हिन्दू वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन को श्री वल्लभ आचार्य जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। जानें इस दिन का महत्व

    Hero Image
    Vallabhacharya Jayanti 2022: महाप्रभु वल्लभाचार्य के बारे में जानिए सबकुछ

    नई दिल्ली, Vallabhacharya Jayanti 2022: भारत के इतिहास में कई ऐसे विद्वान और संत हुए हैं जिन्होंने ईश्वर और उनकी भक्ति का एक अलग ही मार्ग खोजा। इन्हीं संतों में से एक थे महाप्रभु वल्लभाचार्य। इस महान संत ने भारत के ब्रज क्षेत्र में पुष्टि संप्रदाय की स्थापना की थी। इसी कारण महाप्रभु वल्लभाचार्य को भगवान कृष्ण का प्रबल अनुयायी कहा जाता था। इतना ही नहीं वल्लभाचार्य को भक्ति आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जानिए महाप्रभु वल्लभाचार्य के बारे में खास बातें।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    महाप्रभु वल्लभाचार्य की जयंती

    बता दें, हिंदू कैलेंडर के वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष एकादशी के दिन वल्लभाचार्य का जन्म हुआ था। इसी कारण इसे जयंती के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 26 अप्रैल को सुबह 1.39 बजे से शुरू होगी और 27 अप्रैल को दोपहर 12.47 बजे तक प्रभावी रहेगी।

    Varuthini Ekadashi 2022: शुभ योग में वरुथिनी एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय

    महाप्रभु वल्लभाचार्य जयंती का महत्व

    श्री वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ई. में वाराणसी में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इसी कारण हर साल वल्लभाचार्य जयंती 26 अप्रैल को मनाई जाती है। वल्लभाचार्य श्री कृष्ण के प्रबल अनुयायी थे। भगवान के कई भक्तों की तरह वह भी सर्वोच्च शक्ति में विश्वास करते थे और श्रीनाथ जी की पूजा करते थे, जिन्हें भगवान कृष्ण का एक रूप माना जाता है। एक लोकप्रिय धारणा के मद्देनजर मनाया जाता है कि इस शुभ दिन पर ही भगवान कृष्ण श्री वल्लभाचार्य के सामने प्रकट हुए थे।

    ऐसा कहा जाता है कि जब वल्लभाचार्य उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहे थे, तो उन्होंने गोवर्धन पर्वत के पास एक असामान्य घटना देखी, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण से जुड़ी है। उन्होंने देखा कि एक गाय प्रतिदिन पहाड़ पर एक विशेष स्थान पर दूध दे रही थी। एक दिन, वल्लभाचार्य ने विशिष्ट स्थान खोदने के बारे में सोचा और खोदने में उन्हें भगवान कृष्ण की मूर्ति मिली। ऐसा कहा जाता है कि भगवान संत के सामने प्रकट हुए और उनके समर्पण के लिए उन्हें गले लगाया। उस दिन से पुष्टि संप्रदाय द्वारा भगवान कृष्ण की 'बाला' या युवा छवि की बहुत भक्ति के साथ पूजा की जाती थी।

    महाप्रभु वल्लभाचार्य जयंती पर समारोह और अनुष्ठान

    महाप्रभु वल्लभाचार्य की जयंती पूरे देश में विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में भव्य तरीके से मनाई जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और अपने घरों और मंदिरों को सजाते हैं। वे भगवान कृष्ण की मूर्ति को पवित्र स्नान कराते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। इसके साथ-साथ कई जगहों पर यज्ञों का आयोजन भी किया जाता है।

    Pic Credit- instagram/devotionalharvi

    डिसक्लेमर'

    इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।