Surdas Jayanti 2021: कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख कवियों और लेखकों में सूरदास जी को एक महत्वपूण स्थान प्राप्त है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण भक्त सूरदास जी का जन्म मथुरा के रुनकता गांव में हुआ था। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, सूरदास जी का जन्म सन्‌ 1478 ई. में हुआ था। ऐसे में इस वर्ष सूरदास जयंती आज 17 मई को मनाई जा रही है। वे जन्म से ही दृष्टिहीन थे और भगवान श्रीकृष्ण में उनकी अगाध आस्था थी। उन्होंने जीवनपर्यंत भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की और ब्रज भाषा में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। वे भक्ति शाखा के कवियों में महत्वपूर्ण हैं। आइए सूरदास जी की जयंती पर जानते हैं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में।

1. सूरदास जी की जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता रामदास थे। कोई कहता है कि वे जन्म से अंधे थे, तो कोई इसे गलत बताता है।

2. अपने प्रभु श्रीकृष्ण का गुणगान करते हुए उन्होंने सूर सागर, सूर सारावली, साहित्य लहरी जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं कीं। जो आज भी मौजूद हैं और उनका महत्व है।

3. ऐसी मान्यता है कि श्री वल्लभाचार्य जी सूरदास जी के गुरु थे। उन्होंने ही सूरदास जी को श्रीकृष्ण भक्ति की प्रेरणा दी थी। उन्होंने ही उनका मार्गदर्शन किया था।

4. वल्लभाचार्य जी ने ही सूरदास को श्रीकृष्ण लीलाओं का दर्शन कराया और उन्होंने ही श्री नाथ जी के मंदिर में श्रीकृष्ण जी के लीलाओं के गान का भार सूरदास जी को दिया था। उसके बाद से वे हमेशा कृष्ण लीलाओं का गान करते रहे।

5. मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनको दृष्टि प्रदान की थी। यह घटना उस समय हुई जब एक दिन सूरदास जी श्रीकृष्ण भक्ति में डूबे कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में वे एक कुंआ में गिर पड़े। कहा तो यह भी जाता है कि भगवान ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने फिर से उनको दृष्टिहीन कर देने को कहा। सूरदास जी ने कहा ​कि वे अपने प्रभु के अतिरिक्त किसी और को नहीं देखना चाहते।

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