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    जीवन में समस्या इसलिए है कि हम उसका समाधान भूल चुके हैं

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Tue, 08 Nov 2016 10:23 AM (IST)

    आप आनंदपूर्ण परमात्मा की संतान हैं। जब पिता आनंदपूर्ण हैं तो पुत्र कैसे दुखी हो सकता, आप दुखी हैं तो कारण है आपका संबंध परमात्मा से टूट चुका है।

    जीवन में समस्या इसलिए है कि हम उसका समाधान भूल चुके हैं

    स्मरण रखें आप विराट आनंदपूर्ण परमात्मा की संतान हैं। जब पिता आनंदपूर्ण हैं तो पुत्र कैसे दुखी हो सकता है? अगर आप दुखी हैं तो इसका एक ही कारण है आपका संबंध परमात्मा से टूट चुका है। बचपन में आप परमात्मा से जुड़े थे, लेकिन अब आप परमात्मा से टूट चुके हैं। परमात्मा के प्रकाश से बाहर आ चुके हैं। फलत: आपके जीवन में दुख का गहरा अंधकार छा गया है। जिस प्रकार आप जब तक मोबाइल के टावर के रेंज में रहते हैं तब तक आपकी बातचीत होती रहती है वैसी ही स्थिति हमारी भी है। हम जब तक परमात्मा और प्रकृति से जुड़े रहते हैं, तब तक हम स्वस्थ और प्रसन्न बने रहते हैं।
    ज्यों ही हमारा संबंध परमात्मा और प्रकृति से टूटता है, हम अंधकार में चले जाते हैं, हमारा जीवन चिंताग्रस्त और दुखपूर्ण हो जाता है। बहती नदी में कभी शैवाल नहीं लगता, न पानी सड़ता है, लेकिन पानी का बहना ज्यों ही रुकता है वहां शैवाल भर जाता है, पानी महकने लगता है। हमारे जीवन में अगर दुख है तो उसका एक ही कारण है कि हमने अपने जीवन में प्रेम, आकर्षण व आशा को निकाल दिया है। हमने मान लिया है कि हमारे जीवन में अब सुख आने वाला नहीं है। हम सुख को भूल चुके हैं, सुख के मार्ग को बंद कर चुके हैं। हमने स्वयं अपने जीवन को मरुभूमि बना लिया है। हमारे जीवन में दुख इसलिए है कि सुख का अभाव हो गया है।
    जीवन में समस्या इसलिए है कि हम उसका समाधान भूल चुके हैं। श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि समस्या या दुख जीवन में आता है तो उसे आने दो। आप उसकी गति को रोक नहीं सकोगे। केवल समस्या से लड़ें मत। दुख से लड़ते-लड़ते मर जाओगे। आपको समस्या या दुख का निदान खोजना है। दुख आपके पास नहीं आया है। वह तो कहीं जा रहा था। आप स्वयं उसके मार्ग में आकर खड़े हो गए हो। आपने जाते हुए दुख को रोका क्यों? उसे जाने देते, लेकिन आप कब से उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। दुख के बारे में सोचेंगे, उसे अपने पास आने का मार्ग देंगे तो दुख स्वत: बहता हुआ आपके पास आ जाएगा। दुख या सुख एक भाव है, एक विचार है, एक ऊर्जा है, शक्ति है। इसलिए अगर आप दुख के बारे में सोचेंगे तो दुख मिलेगा। आप जब कमरे में लगा स्विच ऑफ कर देते हैं तो वहां अंधकार को आना पड़ता है। यह अंधकार की अपनी मजबूरी है। जब तक प्रकाश था, अंधकार का कोई पता नहीं था। प्रकाश गया अंधकार को आना पड़ा।

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